आपका न होना बेघर लगता है मुझे..
आपका न होना..
ये सोच के दिल सहमता है मेरा..।
कंहा चली गई आप..।
मेरे आने के खबर सुनते ही..
कई दफा आपका फोन आ जाना न-गवारा गुजरता था मुझे..।
मेरे इंतजार में,
मेरा वाट जोहना अजीब लगता था मुझे..।
घर पे दस्तक देते ही..
आपके मुस्कान का दीदार करना..
और आपके चरणों का स्पर्श करना..
अलग अनुभूति देता था मुझे..।।
ये पहली दफा होगा,
जब घर पहुंचते ही,
आपका दीदार नही होगा..
आपके मुस्कुराते चेहरे से दो-चार नही होगा.।
आपके बेगैर उस घर में..
पहली दफा कैसे रह पाऊंगा मैं..।
मेरे सूखे बालों में तेल कौन लगाएगा अब,
वो मेरी गोल्ड बिस्कुट जबरदस्ती कौन खिलायेगा अब..
घर से बाहर दूर जाते वक्त चुपचाप कौन,मेरे हाथों में पैसा थमायेगा अब..।।
यही सब सोच के जी घबराता है..
ज्यों-ज्यों घर के करीब पहुंच रहा हूँ..
आपके न होने का अहसास और बढ़ता जा रहा है..।
आपके बेगैर उस घर में कैसा रह पाऊंगा मैं..
दादी माँ..।।





