एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।
क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।
क्योंकि अभी जो मैं हूँ..
उस लायक नही हूँ मैं..
मैं इससे और बेहतर होना चाहता हूं..
खुद को बदलना चाहता हूं..
और एक नए जिंदगी की शुरुआत करते है..।
एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।
थोड़ा नही,पूर्णतया निजात पाना चाहता हूं..।
और खुद को नए मुकाम पे ले जाना चाहता हूं..
और इस चाह को वास्तविकता में परिवर्तित करना चाहता हूं..।
आसान नही है,
स्वयं को बदलना..
मगर हरेक रोज स्वयं को 1%भी बदलना शुरू किया..
तो एक दिन स्वयं में बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा..।
सबसे पहले अपने कमियों पे काम करते है..
अपने कमियों को पहचानते है..
और उसे दूर करते है..
ये आसान नही है..
मगर बिना इसे दूर किये हुए..
खुद को बदल नही सकते..।
क्योंकि आज जो मैं हूँ..
अपने कमियों और गलतियों के वजह से..
और कल जो मैं होऊंगा..
वो अपने कमियों और गलतियों को दूर करके ही..।
एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।
क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।

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