रविवार, 22 मार्च 2026

​माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति

माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति

​'कु' का अर्थ है छोटा, 'ष्म' का अर्थ है ऊर्जा और 'अंडा' का अर्थ है ब्रह्मांड। माना जाता है कि जब चारों ओर अंधेरा था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

​◆ स्वरूप और प्रतीकवाद

  • अष्टभुजा देवी: माँ की आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र और गदा है।

  • अष्टसिद्धि और नवनिधि: इनके आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है।

  • वाहन: माँ कुष्मांडा सिंह पर सवार हैं, जो साहस का प्रतीक है।

​◆ योग विज्ञान: अनाहत चक्र (Anahata Chakra)

​आज साधक का मन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) में स्थित होता है।

  • स्थान: हृदय के मध्य में।
  • तत्व: वायु (Air Element)।
  • प्रभाव: इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव जागता है। यह वह केंद्र है जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक ऊर्जाएँ मिलती हैं।

​◆ वैज्ञानिक पक्ष: जीवनी शक्ति (Vital Energy)

​माँ कुष्मांडा का निवास 'सूर्य मंडल' के भीतर माना जाता है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो सूर्य ही इस पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। माँ कुष्मांडा इसी जीवनी शक्ति (Pranic Energy) का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे स्वास्थ्य और बुद्धि को तेज करती हैं।

"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"


"बिहार दिवस": हां हम बिहारी है..

हां हम बिहारी है..

और बिहारी होने पे गुमान है..

क्योंकि मेरे कारण ही..

भारत कभी विश्वगुरु और सोने की चिड़िया था..

और मेरे कारण ही भारत फिर से सोने की चिड़िया और विश्व गुरु बनेगा..

हां हम बिहारी है..।।



मेरे ही गोद में..

जानकी,बुद्ध, महावीर,चंद्रगुप्त, चाणक्य, अशोक, समुंद्रगुप्त,आर्यभट, वराहमिहिर,विद्यापति,वाल्मीकि,गुरु गोविंद,शेर शाह,कुँवर सिंह,डॉ राजेन्द्र प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, जयप्रकाश,बिस्मिल्लाह खां इत्यादि पले है..

कितना नाम गिनाऊँ..

किस-किस का काम गिनाऊँ..।

इस सबने मिलकर भारत को आयाम दिया..

विश्व में इक पहचान दिया..।।


मगर इस भारत ने..

आजादी के बाद इसको क्या दिया..??

इसके संसाधन का शोषण करके..

हरियाणा,गुजरात,महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों में कंपनी और उद्योग का निर्माण किया..।

मजबूरन यंहा के लोगों को..

पेट भरने के लिए..

उस भारत में प्रस्थान किया..

कभी जिनके पूर्वजों ने..

भारत को विश्व का शिरमोर बनाया..।

आज उनके ही संतानों को..

पूरे भारत ने "बिहारी" कह कर सम्मान किया..।।

हां हम बिहारी है..।


भारत का शायद ही कोई कोना ऐसा हो.

जंहा हम बिहारी अपने पसीनों से उस क्षेत्र को न सींचा हो..

हां हम बिहारी है..।

आज भारत जिस संसाधन और जिन-जिन चीजों पे इतरा रहा..

उन सबको बिहारी ने अपने पसीनों से सींचा है..।

हां हम बिहारी है..।।


शनिवार, 21 मार्च 2026

संस्मरण:बचपन,जाति, धर्म

जब मैं छोटा बच्चा था..
तो मुझे जात-पात का भान नही था..
फिर जब थोड़ा बड़ा हुआ तो मुझे,
अपने जात का भान हुआ..
फिर जब थोड़ा और बड़ा हुआ..तो
ईद के बहाने मुसलमानों से मुलाकात हुआ..
थोड़ा और बड़ा हुआ तो..
जाति का भान हुआ..
और एक नए धर्म इस्लाम का ज्ञान हुआ..।
फिर जब अपने गाँव से अपने शहर पढ़ने गया..तो
जाति को गहरा करने वाला आरक्षण से मुलाकात हुआ..।
फिर कुछ महीनों सालों बाद 
क्रिसमस के दिन ईसाई धर्म का ज्ञात हुआ..।



अखबार पलटते-पलटते..
नेताओं के भाषणों को सुनते-सुनते..
मेरे अंदर भी, जाति,धर्म गहरा तक समा गया..
न जाने मैं कब समाजवादी,मार्क्सवादी..फिर पूंजीवादी बन गया पता ही नही चला..
गिरगिट की तरह रंग-बदलता रहा..।।

मगर वास्तविकता का भान तब चला..
जब दुनिया को देखना शुरू किया..
सच कहूं तो..
जो देश चलाते है..
न उनका कोई धर्म है,
न ही उनका कोई जाति है..
वो अपने अवसर के लिए समय-समय पर,
अपना जाति-धर्म बदलते रहते है।।

सच कहूं..
तो जाति धर्म के बोझ को वो ढ़ो रहे है..
जो दूसरों पर आश्रित है..
जो आर्थिक रूप से संपन्न है,
उनके लिए जाति-धर्म मायने नही रखता..।

हमारा एक ही जाति होना चाहिए..
वो सफलता..
और हमारा एक ही धर्म होना चाहिए..
अपने सफलता को ताउम्र बरकरार रखना..।।


"माँ चंद्रघंटा" निर्भयता, ध्वनि विज्ञान और मणिपूर चक्र का रहस्य

"माँ चंद्रघंटा"निर्भयता, ध्वनि विज्ञान और मणिपूर चक्र का रहस्य

नवरात्रि के तीसरे दिन हम माँ चंद्रघंटा की उपासना करते हैं। इनका स्वरूप जितना सौम्य है, उतना ही वीरता से भरा हुआ है। एक साधक के लिए यह दिन अपनी आंतरिक शक्ति (Inner Strength) को पहचानने का है।



​◆ स्वरूप - शांति और युद्ध का अद्भुत संतुलन

​माँ चंद्रघंटा का वाहन सिंह है और उनके दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। यह दर्शाता है कि एक संतुलित व्यक्तित्व वही है जो शांति (चंद्रमा) और शक्ति (घंटा/नाद) को एक साथ साध सके।

​◆ योग और मणिपूर चक्र (The Power House)

​आज चेतना मणिपूर चक्र (नाभि केंद्र) पर होती है।

  • तत्व: अग्नि।
  • महत्व: जैसे अग्नि अशुद्धियों को जला देती है, वैसे ही मणिपूर चक्र का जागरण हमारे डर और संशय को भस्म कर देता है।
  • साधकों के लिए: यदि आप जीवन में आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, तो माँ चंद्रघंटा का ध्यान आपको 'शेर जैसी निर्भयता' प्रदान करता है।

​◆ घंटे की ध्वनि का विज्ञान (Sound Healing)

​माँ के गले में स्थित घंटे की ध्वनि का रहस्य यह है कि यह 'नाद ब्रह्म' का प्रतीक है। वैज्ञानिक रूप से, घंटे की तीक्ष्ण ध्वनि मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (Left & Right Brain) को संतुलित करती है और एकाग्रता बढ़ाती है

"पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥"

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

वर्ड हैप्पीनेस इंडेक्स..खुशियों का पैमाना

आपके अनुसा

र खुशियां क्या है..??
जरा सोचिए..
क्या खुशियों का कोई परिभाषा हो सकता है..
मेरे अनुसार तो नही..
क्योंकि जो चीज आपको दुःखी करता है..
हो सकता है वही चीज दूसरों के लिए खुशी का कारण हो..।


मगर कुछ तो सार्वभौमिक सत्य होता ही है..
मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि खुशी सार्वभौमिक सत्य नही है...जबकि दुःख है..।

तो फिर खुश कैसे रहा जाए..??
हरेक परिस्थितियों को स्वीकार कर उसका सामना करके ही खुश रहा जा सकता है..।
और कोई उपाय नही है..।।

आप कोई भी ऐसा व्यक्ति दिखा दीजिए..
जो खुश है..
अगर कोई खुश है..
तो वो खुशी क्षणभंगुर होगी..
1 दिन,2 दिन, 2 महीना,2 साल..उसके बाद..
जिसे वो खुशी समझ रहे है,वही उनके लिए अभिशाप बन जायेगा।।

हम ताउम्र खुश नही रह सकते..
मगर हम ताउम्र आनंदमय जीवन जी सकते है..।।

आज 20 मार्च है,और दुनिया इस दिन को..
"विश्व हैप्पीनेस डे" के रूप में मनाता है..इसकी शुरुआत 2012 में "ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय" के "वेल बीइंग रिसर्च सेंटर" और "संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क(UNSDSN)" द्वारा शुरू किया गया..।
ये दोनों मिलकर एक इंडेक्स भी जारी करते है..
147 देशों में फिनलैंड लगातार 9वे साल भी पहले पायदान पर है..
आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल जो लगभग सालभर से युद्धरत है वो इस पायदान में 8वे स्थान पर है..।
और अगर आप भारतीय है..तो आपको जानकर और हैरानी होगी कि पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से अच्छी है..पाकिस्तान 104वे स्थान पर है..जबकि भारत 116वे स्थान पर..।।

आखिर ये इंडेक्स जारी कैसे किया जाता है..??
इसके 6 पैमाने है..
प्रति व्यक्ति GDP, जीवन प्रत्याशा,सामाजिक संबंध,भ्रष्टाचार,उदारता, और निर्णय लेने की स्वतंत्रता..।।

अगर हम इन 6 पैमाने को देखें तो लगता है..सही ही है,हम भारतीयों की रैंकिंग..।
मगर एक सवाल है..
क्या खुशियों का कोई पैमाना होता है..??
सच कहूं तो खुशियों का कोई पैमाना नही होता..
बस खुश होने का एक बहाना ढूंढना होता है..।।

क्या आपको पता है..
मारी खुशियां सोशल मीडिया छीन रहा है..?

•देखा गया है कि जो 5 घंटे से ज्यादा समय सोशल मीडिया(व्हाट्सएप, फेसबुक,इंस्टाग्राम,यूट्यूब इत्यादि)पे समय बिताते हैं वो दुःखी होते है..।।

वंही जो 1घण्टे से कम समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं,वो खुश होते है..।।
(अगर आपका आय का जरिया सोशल मीडिया है तो ये आपके लिए नही है..😊)

तो आपने क्या सोचा..
आपके लिए हैप्पीनेस के क्या मायने है..??




गुरुवार, 19 मार्च 2026

माँ ब्रह्मचारिणी

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। यह स्वरूप हमें सिखाता है कि बिना कठिन परिश्रम और एकाग्रता के जीवन में किसी भी उच्च लक्ष्य (सिद्धि) को प्राप्त करना असंभव है।



​◆ स्वरूप का प्रतीकवाद: नंगे पैर और हाथ में माला

माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल और भव्य है..

  • नंगे पैर चलना: यह सुख-सुविधाओं के त्याग और जमीन से जुड़े रहने का प्रतीक है।
  • दाहिने हाथ में जपमाला: यह निरंतर अभ्यास (Abhyasa) और मंत्र शक्ति का सूचक है।
  • बाएं हाथ में कमंडल: यह ज्ञान और वैराग्य के जल को संचित करने का प्रतीक है।


  • यह स्वरूप संदेश देता है कि ज्ञान (कमंडल) और क्रिया/अभ्यास (माला) का संतुलन ही सफलता की कुंजी है।

  • योग विज्ञान और 'स्वाधिष्ठान चक्र'

    ​नवरात्रि के दूसरे दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) में स्थित होता है।

    • तत्व: जल (Water Element)
    • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: यह चक्र हमारी सृजनात्मकता और भावनाओं का केंद्र है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण (Self-restraint) पाना सीखता है।

    ◆  पौराणिक संदर्भ: शिव को पाने का संकल्प

    ​देवी ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की। उन्होंने केवल फल-फूल खाए और अंत में केवल पत्तों (अपर्णा) पर जीवित रहीं। यह कथा हमें 'अनंत धैर्य' की सीख देती है। आज के युग में जहाँ हम तुरंत परिणाम (Instant Gratification) चाहते हैं, माँ ब्रह्मचारिणी हमें धैर्य की शक्ति सिखाती हैं।

    ​◆ वैज्ञानिक दृष्टिकोण: तपस्या और मस्तिष्क (Neuroplasticity)

    ​आज का विज्ञान मानता है कि 'तप' या अनुशासन से हमारे मस्तिष्क की Neuroplasticity बढ़ती है। जब हम किसी कठिन लक्ष्य के लिए अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' मजबूत होता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक शक्ति बढ़ती है।

    माँ ब्रह्मचारिणी का यह दिन हमें याद दिलाता है कि संघर्ष ही प्रगति का आधार हैयदि आपके जीवन में संघर्ष है, तो समझ लीजिए कि आप माँ के बताए 'तप' के मार्ग पर हैं, जिसका अंत 'सिद्धि' (सफलता) में ही होगा।

       

      दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

      देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

      जिनके एक हाथ में अक्षमाला और दूसरे में कमंडल है, ऐसी परम श्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।

    आप सभी को नवरात्रि के द्वितीय दिन की मंगलकामनाएं..


संभावनाएं कभी खत्म नही होता

संभावनाएं कभी खत्म नही होता है,
बल्कि हम अपने जीवन से इतने हताश हो जाते है कि,
दस्तक दे रहे संभावनाओं के लिए दरवाजे ही नही खोलते..।
इसीलिए हताश मत होइये जनाब..
तैयार रहिये..
उन संभावनाओं के स्वागत के लिए..
जो आपको फर्श से अर्श पर ले जाने के लिए आनेवाला है..।

मगर ये आसान नही है..
हम अपनी असफलताओं और रोजमर्रा के जिंदगी से इतने थक जाते है कि, हमें उन संभावनाओं का पता ही नही चलता,जो हमारे जिंदगी में बदलाव लाने वाला होता है..।
हम उसे देखकर भी अनदेखा कर देते है..
और इसका फायदा कोई और उठा ले जाता है..।।

इसीलिए कभी हताश मत होइए..
क्योंकि संभावनाएं कभी खत्म नही होता..।।



गलतियां..