र खुशियां क्या है..??
जरा सोचिए..
क्या खुशियों का कोई परिभाषा हो सकता है..
मेरे अनुसार तो नही..
क्योंकि जो चीज आपको दुःखी करता है..
हो सकता है वही चीज दूसरों के लिए खुशी का कारण हो..।।
मगर कुछ तो सार्वभौमिक सत्य होता ही है..
मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि खुशी सार्वभौमिक सत्य नही है...जबकि दुःख है..।
तो फिर खुश कैसे रहा जाए..??
हरेक परिस्थितियों को स्वीकार कर उसका सामना करके ही खुश रहा जा सकता है..।
और कोई उपाय नही है..।।
आप कोई भी ऐसा व्यक्ति दिखा दीजिए..
जो खुश है..
अगर कोई खुश है..
तो वो खुशी क्षणभंगुर होगी..
1 दिन,2 दिन, 2 महीना,2 साल..उसके बाद..
जिसे वो खुशी समझ रहे है,वही उनके लिए अभिशाप बन जायेगा।।
हम ताउम्र खुश नही रह सकते..
मगर हम ताउम्र आनंदमय जीवन जी सकते है..।।
आज 20 मार्च है,और दुनिया इस दिन को..
"विश्व हैप्पीनेस डे" के रूप में मनाता है..इसकी शुरुआत 2012 में "ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय" के "वेल बीइंग रिसर्च सेंटर" और "संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क(UNSDSN)" द्वारा शुरू किया गया..।
ये दोनों मिलकर एक इंडेक्स भी जारी करते है..
147 देशों में फिनलैंड लगातार 9वे साल भी पहले पायदान पर है..
आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल जो लगभग सालभर से युद्धरत है वो इस पायदान में 8वे स्थान पर है..।
और अगर आप भारतीय है..तो आपको जानकर और हैरानी होगी कि पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से अच्छी है..पाकिस्तान 104वे स्थान पर है..जबकि भारत 116वे स्थान पर..।।
◆आखिर ये इंडेक्स जारी कैसे किया जाता है..??
इसके 6 पैमाने है..
प्रति व्यक्ति GDP, जीवन प्रत्याशा,सामाजिक संबंध,भ्रष्टाचार,उदारता, और निर्णय लेने की स्वतंत्रता..।।
अगर हम इन 6 पैमाने को देखें तो लगता है..सही ही है,हम भारतीयों की रैंकिंग..।
मगर एक सवाल है..
क्या खुशियों का कोई पैमाना होता है..??
सच कहूं तो खुशियों का कोई पैमाना नही होता..
बस खुश होने का एक बहाना ढूंढना होता है..।।
◆क्या आपको पता है..
हमारी खुशियां सोशल मीडिया छीन रहा है..?
•देखा गया है कि जो 5 घंटे से ज्यादा समय सोशल मीडिया(व्हाट्सएप, फेसबुक,इंस्टाग्राम,यूट्यूब इत्यादि)पे समय बिताते हैं वो दुःखी होते है..।।
•वंही जो 1घण्टे से कम समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं,वो खुश होते है..।।
(अगर आपका आय का जरिया सोशल मीडिया है तो ये आपके लिए नही है..😊)
तो आपने क्या सोचा..
आपके लिए हैप्पीनेस के क्या मायने है..??


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