मंगलवार, 24 मार्च 2026
नजरिया : प्रकृति को समझिए
"माँ कात्यायनी"
ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। इन्हें महिषासुर का वध करने वाली 'युद्ध की देवी' भी माना जाता है।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। बाईं ओर के ऊपरी हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में खड्ग है। दाईं ओर के हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं।
- वाहन: माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।
- ऊर्जा: इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और चमकीला है, जो बुराई के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
◆ योग विज्ञान: आज्ञा चक्र (Ajna Chakra)
एक योग साधक के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज चेतना आज्ञा चक्र (तीसरी आँख) में स्थित होती है।
- स्थान: दोनों भौहों के बीच (Eyebrow Center)।
- महत्व: यह चक्र अंतर्ज्ञान (Intuition), एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता का केंद्र है। माँ कात्यायनी की कृपा से साधक को आत्म-साक्षात्कार की शक्ति प्राप्त होती है।
माँ कात्यायनी की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करना चाहिए-
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
अर्थ: जिनके हाथों में चमकती हुई चंद्रहास तलवार है और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, वे दानवों का विनाश करने वाली माँ कात्यायनी मेरा कल्याण करें।
सोमवार, 23 मार्च 2026
माँ स्कंदमाता: वात्सल्य और ज्ञान की देवी
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र 'कार्तिकेय' का एक नाम 'स्कंद' भी है। स्कंद की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को 'स्कंदमाता' कहा जाता है।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। अपनी ऊपरी दो भुजाओं में वे कमल का पुष्प धारण करती हैं।
- गोद में स्कंद: माँ अपनी एक भुजा से गोद में बाल कार्तिकेय (स्कंद) को पकड़े हुए हैं। यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक है।
- वरमुद्रा: इनका एक हाथ वरमुद्रा में रहता है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने का संकेत है।
- पद्मासना: चूँकि माँ कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, इसलिए इन्हें 'पद्मासना देवी' भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।
◆ योग विज्ञान: विशुद्ध चक्र (Vishuddha Chakra)
आज साधक की चेतना विशुद्ध चक्र में स्थित होती है।
- स्थान: कंठ (गले) के मध्य में।
- तत्व: आकाश (Space Element)।
- प्रभाव: यह चक्र संचार, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का केंद्र है। माँ स्कंदमाता की कृपा से साधक की वाणी में माधुर्य आता है और वह सत्य को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर पाता है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
23 मार्च..क्यों है खास..।
"क्रांति से हमारा तात्पर्य अंततः एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है जिसे इस प्रकार के घातक खतरों का सामना न करना पड़े और जिसमें सर्वहारा वर्ग (श्रमिक वर्ग) का प्रभुत्व हो।"
भगत सिंह को जानने के लिए इनकी पुस्तक "why I am an atheist?" पढ़ें..आप सोचने पे विवश हो जाएंगे..।
"हमें फांसी की सजा का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि हमारी मौत सोई हुई जनता को जगाने का काम करेगी। एक जीवित क्रांतिकारी से कहीं अधिक शक्तिशाली एक मृत (शहीद) क्रांतिकारी होता है।"
सुखदेव जी ने गांधी जी को 7अक्टूबर 1930 को पत्र लिखा था,तबतक इन्हें फांसी की सजा सुना दिया गया था. उस पत्र के कुछ प्रमुख अंश-
• क्रांतिकारियों को पथभ्रष्ट या हिंसक कहने पर गांधीजी से कहते है-
"आप हमें जनता के सामने अपराधी की तरह पेश करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि हम जो कर रहे हैं, वह देश के गौरव और स्वाभिमान के लिए है..?"
• गांधी इरविन समझौता पर वार्ता के समय सवाल करते है-
"यदि आप सरकार के साथ समझौता कर रहे हैं, तो याद रखें कि केवल कुछ कैदियों की रिहाई से क्रांति समाप्त नहीं होगी। जब तक पूर्ण स्वतंत्रता और शोषण का अंत नहीं होता, तब तक यह आग जलती रहेगी।"
•"हम मौत से नहीं डरते। हम तो चाहते हैं कि हमारी फांसी देश के युवाओं के दिलों में आजादी की मशाल जला दे। क्या आपकी अहिंसा इस बलिदान की शक्ति को समझ पाएगी?"
●सुखदेव इस बात के सख्त खिलाफ थे कि गांधीजी उनकी फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेजों से 'दया' की भीख मांगें। उन्होंने गौरव के साथ कहा कि वे शहीद होना चाहते हैं ताकि उनका रक्त देश के काम आए।
◆राजगुरु..
जहाँ भगत सिंह 'विचारक' और सुखदेव 'रणनीतिकार' थे, वहीं राजगुरु दल के सबसे घातक 'निशानेबाज' माने जाते थे।
राजगुरु महाराष्ट्र से थे और छत्रपति शिवाजी महाराज उनके सबसे बड़े आदर्श थे। वे अक्सर कहा करते थे...
"गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहकर सौ साल जीने से बेहतर है कि,स्वतंत्रता की वेदी पर एक दिन शेर की तरह शहीद हो जाना.."
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, जब जेल में साथियों के बीच चर्चा होती थी, तब राजगुरु ने मुस्कुराते हुए कहा था..
"फांसी का फंदा मेरे लिए फूलों की माला जैसा है। मुझे गर्व है कि मैं अपने देश के काम आ रहा हूँ और भगत सिंह व सुखदेव जैसे शेरों के साथ शहीद हो रहा हूँ।"
राजगुरु संस्कृत के विद्वान थे। वे अक्सर जेल में कठिन संस्कृत श्लोकों का पाठ करते थे। उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति और शास्त्र हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाते हैं..।।
रविवार, 22 मार्च 2026
Yoga for digestive system
पाचन तंत्र हमारे शरीर का इंजन है। योग के आसन और प्राणायाम 'पेरिस्टालिसिस' (Peristalsis - आंतों की गति) को विनियमित करते हैं और पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) में सुधार करते हैं।
◆ मयूरासन (Peacock Pose) और रक्त का अंतःप्रवाह
- वैज्ञानिक साक्ष्य: यह आसन कोहनी के माध्यम से उदर महाधमनी (Abdominal Aorta) पर अस्थायी दबाव डालता है। जब आसन छोड़ा जाता है, तो पाचन अंगों में ताजे ऑक्सीजन युक्त रक्त की बाढ़ आ जाती है।
- शारीरिक प्रभाव: यह लिवर और अग्न्याशय (Pancreas) को पुनर्जीवित करता है और पुरानी कब्ज को दूर करने में वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है।
◆ पवनमुक्तासन (Wind-Relieving Pose) और आंतों की गतिशीलता
• वैज्ञानिक साक्ष्य: पेट पर पड़ने वाला शारीरिक दबाव बड़ी आंत (Large Intestine) में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और मल त्याग की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है।
• शारीरिक प्रभाव: यह 'इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम' (IBS) के लक्षणों को कम करने और पेट फूलने (Bloating) की समस्या में राहत देता है।
◆ अग्निसार क्रिया और चयापचय (Metabolism)
- वैज्ञानिक साक्ष्य: पेट की मांसपेशियों का तेजी से संकुचन और विस्तार 'पैरासिम्पेथेटिक नर्व' को उत्तेजित करता है। शोध बताते हैं कि यह बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) को बढ़ाता है।
- शारीरिक प्रभाव: यह सुस्त पाचन को सक्रिय करता है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करता है।
◆ वज्रासन और वेगस नर्व (Vagus Nerve) का सक्रियण
- वैज्ञानिक साक्ष्य: भोजन के बाद वज्रासन में बैठने से पैरों की ओर रक्त का प्रवाह कम होकर पाचन क्षेत्र की ओर बढ़ जाता है। यह वेगस नर्व को संकेत देता है कि पाचन प्रक्रिया शुरू की जाए।
- शारीरिक प्रभाव: यह भोजन के बाद होने वाली भारीपन की भावना को कम करता है और एसिड रिफ्लेक्स (Acid Reflux) को रोकता है।
माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति
माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति
'कु' का अर्थ है छोटा, 'ष्म' का अर्थ है ऊर्जा और 'अंडा' का अर्थ है ब्रह्मांड। माना जाता है कि जब चारों ओर अंधेरा था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- अष्टभुजा देवी: माँ की आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र और गदा है।
- अष्टसिद्धि और नवनिधि: इनके आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है।
- वाहन: माँ कुष्मांडा सिंह पर सवार हैं, जो साहस का प्रतीक है।
◆ योग विज्ञान: अनाहत चक्र (Anahata Chakra)
आज साधक का मन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) में स्थित होता है।
- स्थान: हृदय के मध्य में।
- तत्व: वायु (Air Element)।
- प्रभाव: इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव जागता है। यह वह केंद्र है जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक ऊर्जाएँ मिलती हैं।
◆ वैज्ञानिक पक्ष: जीवनी शक्ति (Vital Energy)
माँ कुष्मांडा का निवास 'सूर्य मंडल' के भीतर माना जाता है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो सूर्य ही इस पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। माँ कुष्मांडा इसी जीवनी शक्ति (Pranic Energy) का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे स्वास्थ्य और बुद्धि को तेज करती हैं।
"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"
"बिहार दिवस": हां हम बिहारी है..
हां हम बिहारी है..
और बिहारी होने पे गुमान है..
क्योंकि मेरे कारण ही..
भारत कभी विश्वगुरु और सोने की चिड़िया था..
और मेरे कारण ही भारत फिर से सोने की चिड़िया और विश्व गुरु बनेगा..
हां हम बिहारी है..।।
मेरे ही गोद में..
जानकी,बुद्ध, महावीर,चंद्रगुप्त, चाणक्य, अशोक, समुंद्रगुप्त,आर्यभट, वराहमिहिर,विद्यापति,वाल्मीकि,गुरु गोविंद,शेर शाह,कुँवर सिंह,डॉ राजेन्द्र प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, जयप्रकाश,बिस्मिल्लाह खां इत्यादि पले है..
कितना नाम गिनाऊँ..
किस-किस का काम गिनाऊँ..।
इस सबने मिलकर भारत को आयाम दिया..
विश्व में इक पहचान दिया..।।
मगर इस भारत ने..
आजादी के बाद इसको क्या दिया..??
इसके संसाधन का शोषण करके..
हरियाणा,गुजरात,महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों में कंपनी और उद्योग का निर्माण किया..।
मजबूरन यंहा के लोगों को..
पेट भरने के लिए..
उस भारत में प्रस्थान किया..
कभी जिनके पूर्वजों ने..
भारत को विश्व का शिरमोर बनाया..।
आज उनके ही संतानों को..
पूरे भारत ने "बिहारी" कह कर सम्मान किया..।।
हां हम बिहारी है..।
भारत का शायद ही कोई कोना ऐसा हो.
जंहा हम बिहारी अपने पसीनों से उस क्षेत्र को न सींचा हो..
हां हम बिहारी है..।
आज भारत जिस संसाधन और जिन-जिन चीजों पे इतरा रहा..
उन सबको बिहारी ने अपने पसीनों से सींचा है..।
हां हम बिहारी है..।।
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...






