ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। इन्हें महिषासुर का वध करने वाली 'युद्ध की देवी' भी माना जाता है।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। बाईं ओर के ऊपरी हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में खड्ग है। दाईं ओर के हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं।
- वाहन: माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।
- ऊर्जा: इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और चमकीला है, जो बुराई के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
◆ योग विज्ञान: आज्ञा चक्र (Ajna Chakra)
एक योग साधक के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज चेतना आज्ञा चक्र (तीसरी आँख) में स्थित होती है।
- स्थान: दोनों भौहों के बीच (Eyebrow Center)।
- महत्व: यह चक्र अंतर्ज्ञान (Intuition), एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता का केंद्र है। माँ कात्यायनी की कृपा से साधक को आत्म-साक्षात्कार की शक्ति प्राप्त होती है।
माँ कात्यायनी की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करना चाहिए-
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
अर्थ: जिनके हाथों में चमकती हुई चंद्रहास तलवार है और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, वे दानवों का विनाश करने वाली माँ कात्यायनी मेरा कल्याण करें।

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