सोमवार, 22 दिसंबर 2025

मैं जब भी..

मैं जब ही इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम मुझे हरेक बार ऊर्जावान बना देते हो..
मेरे चेहरे से उदासी हटा कर,ताजगी भर देते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार...
हताशाओं और निराशाओं से भरी जिंदगी को,
दलदल से निकाल कर...
एक नए मुकाम पे खड़ा कर देते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार..
मेरे मुरझाये हुए चेहरे पे मुस्कान बिखेर जाते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार...
मुझे नए जिंदगी से रु-ब-रु करवाते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..


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