बुधवार, 24 दिसंबर 2025

प्यार की पांति..उसने कहा..

उसने कहा..
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।
कबतक यू ही..
खुद से मुँह फेरते रहोगे..
कबतक यू ही सबसे मुँह फेरते रहोगे..।

उस काबिल तो बनो..
जिससे अपना मुँह,
मुझको दिखा तो सको..।

उसने कहा..
सिर्फ तुम ही नही गिरे हो..
हरेक रोज कई गिरते है..।
मगर तुम उन जैसा तो न बनो..
जो गिर के उठ न सके..।
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
कबतक जिंदगी यू ही अकेले काटते रहोगे..
कबतक यू ही सबसे मुँह फेरते रहोगे..
कंही ऐसा न हो..
की ये एकांकीपन तुमसे ही मुँह फेरने लगे..।
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
मैं भी..भला कबतक तुम्हें झकझोरता रहूंगा..
एकदिन मैं भी कंही थक जाऊंगा..
तो फिर मेरा क्या होगा..??
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
क्या कहा..??
उसने कहा..
बहुत कुछ कहा..
मगर मैं,नासमझ..
कुछ समझ न पाया..
उसने कहा..
क्या कहा..??


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