घर से बाहर निकलिए आपसे भी ज्यादा लोग संघर्ष कर रहे है..
कोई कुछ सांस के लिए तो कोई कुछ पल के लिए संघर्ष कर रहे है..
और हम घर में बैठकर सोच रहे है कि संघर्ष सिर्फ हमारे ही जिंदगी में है..।
WHO के अनुसार प्रत्येक मिनट 105 लोग रोग से जूझते हुए एक-एक सांस के लिए तड़प के मरते है,और प्रत्येक घंटे 6300 लोग.और प्रत्येक दिन 1.5 लाख लोग..।
और हम यू ही..अपना मिनट,घंटा और दिन जाया कर रहे है...।
क्या आपको पता है..विश्व मे कितने दिव्यांग लोग है..??
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार पूरे विश्व मे 130 करोड़ लोग दिव्यांग है..यानी विश्व की 16%आबादी दिव्यांग है..।।
आशा करता हूँ आप उनमें से नही होंगे...।
क्या आपको पता है इनके जीवन मे किस तरह की समस्या आती है..??
शायद आपको पता नही होगा..
क्योंकि आप उनके जिंदगी से 2-4 नही होते है..।
उन्हें पारिवारिक,सामाजिक,आर्थिक हरेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है..
मगर..उनमें से कुछ ऐसे लोग होते है जो अपनी विकलांगता को अपनी वैसाखी बना कर जिंदगी के हरेक सपनों को पूरा करते है..और अपनी विकलांगता को मात देते है..।।
मगर आज सबसे ज्यादा मानसिक रोगग्रस्त आज की युवा पीढ़ी है..
जो देखने मे तो पूर्ण स्वस्थ है..मगर वो मानसिक रूप से कमजोर है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि उसे पता ही नही है कि उसे क्या करना है..?
अगर कुछ कर रहा है तो उसे अहसास ही नही है कि मैं जो कर रहा हूँ वो सही है या गलत..??
सच कहूं तो उसे इन सब का अहसास ही नही हो रहा है..
पता है क्यों..??
क्योंकि आज की युवा पीढ़ी अपना समय तो..यू ही जाया कर रही है..
•ILO(इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन) के 2024 के रिपोर्ट के अनुसार 80% भारतीय युवा बेरोजगार है(MoSPI भारत सरकार के 2025 के रिपोर्ट के अनुसार 4.7%)
•पोर्न हब के अनुसार 40% युवा पोर्न एडिक्टेड है..
•40% से ज्यादा युवा सोशल मीडिया एडिक्टेड है..
•35% से ज्यादा युवा जंक फूड एडिक्टेड है..
•60% से ज्यादा युवा डिप्रेशन से ग्रस्त है..
मगर उन्हें इन सबसे फर्क नही पड़ता,क्योंकि उन्हें इन सब चीजों से डोपामिन मिल रहा है,और मस्त जिंदगी जी रहे है..
क्योंकि इस पीढ़ी को किसी चीज के लिए संघर्ष नही करना पड़ रहा है..
न पढ़ने के लिए,न खेलने के लिए,न खाने के लिए,न कहीं जाने के लिए..
क्योंकि एक क्लिक पे सबकुछ उपलब्ध है..।
मगर एक चीज जो उपलब्ध नही है..वो आइडेंटिटी...
उनकी जो भी आइडेंटिटी है वो आभाषी(virtual) है,इसिलिय सबकुछ होने के बाद भी वो अकेले है..क्योंकि उनकी अपनी स्थायी पहचान नही है..।
उनके पड़ोसी भी उन्हें अच्छी तरह से नही जानते..
क्योंकि आज के युवा ने अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली है..
जो शुरुआत में तो अच्छा होता है..मगर ज्यों-ज्यों समय बीतता है..
तो संघर्ष शुरू होता है..और वो इसे समझ नही पाते..जिस कारण वो एक दलदल से निकल कर दूसरे दलदल में फंसते जाएंगे..
और उनके इस दलदल में फंसने के कारण कुछ मुट्ठीभर लोग इसका फायदा उठाएंगे..या कहें तो उठा रहे है..।
आपके आसपास वो सबकुछ है जिससे आप कुछपल के लिए वास्तविक दुनिया से निकलकर आभासी दुनिया मे जा सकते है..
मगर फिर वास्तविक दुनिया मे ही आना पड़ेगा..।
मगर कुछ लोग इस मकड़जाल से बाहर नही निकल पाते जिस कारण प्रत्येक दिन भारत मे ~500 के आसपास लोग आत्महत्या करते है..और ये आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है,जो चिंताजनक है..।।
इसका कारण क्या है..??
लक्ष्यविहीन जिंदगी..और आभाषी जिंदगी से निकलने के बाद वास्तविक जिंदगी का सामना करने में असमर्थता..।।
मगर इससे निकलना बहुत आसान है...
बस आपको अपना पहला कदम घर से बाहर निकालना होगा..।
जब आप वास्तविक जिंदगी में कदम रखेंगे तब आपको अहसास होगा..
आपका संघर्ष तो कुछ भी नही है..
यंहा तो लोग एक सांस,एक पल,1₹ तक के लिए संघर्ष कर रहें है..।।
घर से बाहर तो निकलिए...
आपके हरेक समस्या का समाधान, आपके घर के बाहर इंतजार कर रहा है..।।
संघर्ष तो जिंदगी का वैशाखी है जो जीना सिखाता है..
संघर्ष तो जिंदगी का रंग है, जो जिंदगी में रंग भरता है..
संघर्ष तो वो हमसफ़र है, जो जिंदगी को खुशनुमा बनाता है..
इसीलिए जिंदगी में जब भी संघर्ष आये,तो उसे सहस्र स्वीकार करें..।।



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