सोमवार, 15 दिसंबर 2025

मैं कंहा रह गया..

मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..
सब मुझसे आगे निकलते गए..
और मैं सिर्फ देखता रहा..
मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..।

जो मुझसे पीछे थे वो मुझसे आगे निकल गए..
जो मुझसे आगे थे वो मुझसे बहुत आगे निकल गए..
और मैं सिर्फ हाथ बांधे देखता रहा..।।


मुझे ईष्या नही है उनसे..
बल्कि वो मेरे प्रेरणाश्रोत है..।
उनकी सफलताओं से मुझे अपनी गलतियों का भान होता है..
ना जाने फिर भी मैं ऐसा कह रहा हूँ खुद से..।
एक समय आएगा..
जब मैं एक लंबी छलांग लगाऊंगा..
और इन सबसे आगे हो जाऊंगा..।
पहले तो मैं UPSC के सहारे कहा करता था..
अब तो उसका भी सहारा छूट गया..।
आखिर फिर ऐसा कौन सा छलांग लगाऊंगा, 
की मैं..सबसे आगे निकल जाऊंगा..।।

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