गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

रामानुजन.. क्या आप इन्हें जानते है..??

 रामानुजन.. क्या आप इन्हें जानते है..??

जरा सोचिए... अगर हां, तो कितना जानते है..?? और क्या जानते है..। 

अगर नही,तो क्यों नही जानते ...??



रामानुजन एक आम इंसान नही थे या है..?? क्योंकि ऐसे लोग हमेशा जीवंत रहते है,आप भले भूल जाये मगर इतिहास आपको भूलने नही देगा..। 

रामानुजन ने खुद को ही खास नही बनाया,बल्कि अंग्रेज के बेड़ियों से जकड़े हुए भारत को, कृष्ण की तरह भारत का एक विराट छवि का आभास अंग्रेजों को कराया..।।

मैं उस रामानुजन की बात कर रहा हूँ, जिनके जन्म दिवस पर भारत सरकार गणित दिवस मनाती है..।। मगर अफसोस भारत की 50% से ज्यादा आबादी को ये नही पता कि हम गणित दिवस क्यों मनाते है..??

जबकि आज हमारे पास जानने के अनेक माध्यम है..।मगर हमें जानने की इच्छा ही नही है.. आखिर क्यों..??

ये क्यों का जबाब जरूर अपने अंदर सोचिएगा.. क्योंकि क्यों आपको सोचने वाला इंसान बनायेगा।।

चलिए हम उस रामानुजन को जानते है,जो आज भी गणितज्ञों के लिए पहेली बना हुआ है..।।

रामानुजन का जन्म मद्रास के इरोड़ में एक तमिल गरीब ब्राह्मण परिवार में 22 दिसंबर 1887 को हुआ। इनके पिता के श्री निवास साड़ी के दुकान में क्लर्क का काम करते थे। और माँ गृहणि थी और भक्ति भजन करती थी।

1892 में नजदीक के स्कूल में नामांकन हुआ मगर 5वी तक पढ़ाई में कोई रुचि नही था,बल्कि इनके ऊपर नजर रखा जाता था कि ये स्कूल से भाग न जाये।

जब ये माध्यमिक स्कूल में गए तब इनकी मैथ में रुचि बहुत बढ़ गई।रुचि इतनी बढ़ने लगी कि इन्हें स्कॉलरशिप भी मिलना शुरू हुआ।

मगर 11थ मैं इनकी रुचि मैथ में ज्यादा होने के कारण ये फैल हो गए और इनसे स्कॉलशिप भी छिन गया ।

इसी बीच इनकी शादी 1909 में जानकी से हो गया..।जिसने हमेशा इनका साथ दिया।

1910 में ये रामास्वामी अय्यर से मिलें जो "इंडियन मैथमैटिसियन सोसाइटी" के संस्थापक थे। इन्होंने अपना थ्योरम इन्हें दिखाया,जो इनसे बहुत प्रभावित हुए ।।

1912 में रेवेन्यू डिपार्टमेंट में क्लर्क की नॉकरी 20₹ प्रतिमाह पे किया। यही से उन्होंने G.H.Hardi(उस समय के महान गणितज्ञ) को अपना थ्योरम पत्र के माध्यम से भेजना शुरू किया।

1913 में G.H.Hardi ने रामानुजन को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी लाने के लिए J.E.Littlewood को भारत भेजा..।। 

इस समय समुन्द्र यात्रा भारतियों के लिए अच्छा नही माना जाता था,लोग जब विरोध करने लगे तो इन्होंने कहा कि मैं अपने कुल माता नामगिरी से पूछुंगा। उन्हें अपनी कुलदेवी से हां में जबाब मिला।और वो कैम्ब्रिज के लिए निकल गए। जब ये आ रहे थे तब पत्नी ने इनसे कहा कि मैं भी चलूंगी तो इन्होंने मना कर दिया,क्योंकि वंहा में कंहा और कैसे रहूंगा इसका कोई ठिकाना नही है।

रामानुजन शाकाहारी थे जिस कारण ब्रिटेन में अच्छा खाना मिल नही पाता था,जिस कारण इनकी तबियत गिरने लगी,ज्यों-ज्यों शरीर कमजोर हो रहा था, त्यों-त्यों ये मैथ की ऊंचाइयों पे पहुंच रहे थे।

-6 दिसम्बर 1917 में ये "लंदन मैथेमेटिक्स सोसाइटी" के सदस्य चुने गए।

-1918 में "रॉयल सोसायटी" के लिए इनका चयन हुआ, ये दूसरे भारतीय और उस समय में सबसे युवा चयनित थे।

- इन्हें ट्रिनिटी कॉलेज ने फेलोशिप के लिए चयन किया,जो प्रथम भारतीय थे



इन्होंने ने मैथ के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया है,उस समय के महान गणितज्ञों में से एक G.H.Hardi भी अपने आपको इनसे छोटा समझते थे।

-इन्होंने "divergent series" के ऊपर 120 थ्योरम दिए,साथ ही "partion of whole number", "Fermat Theorem", "Cubic equation & quadratic equation" और Hypo geometric series पर बहुत ही कार्य किया..।।

-इन्होंने अपने जीवन काल मे 3000 से ज्यादा थ्योरम दिए।

-इन्होंने "MOC Theta Function" दिया जिसने 2002 में 'ब्लैक होल' को समझने में मदद किया। और साथ ही कैंसर सेल को समझने में भी मदद हो रहा है।

- 1914 से ही तबियत खराब रहने के कारण 1919 में भारत वापस आ गए । जंहा 26 अप्रैल 1920 में 32 साल के उम्र में क्षय रोग के कारण इनका मृत्यु हो गया।और एक महान सख्सियत की मृत्यु समय से पहले हो गया और इस ब्रह्मांड में कही खो गया।

- एक बार Hardi ने रामानुजन से पूछा कि तुम थ्योरम कैसे हल कर लेते हो..। रामानुजन ने कहा में अपने कुलदेवी 'नामगिरी' को याद करता हूँ और वो उसका जबाब मिल जाता है।

-जब रामानुजन अस्पताल में थे तब उनसे मिलने Hardi अपने मित्र के साथ कार मिलने आये। रामानुजन ने उस गाड़ी की नंबर के चार विशेषता बतलाया। जिसे हार्डी को 3 विशेषता सुलझाने में 6 साल लग गए,और चौथी विशेषता के बारे में Hardi ने अपने वसीयत में लिखा कि रामानुजन ने लिखा है तो सही ही होगा। जिसे हार्डी के मरने के 22 साल बाद सुलझाया गया।।

रामानुजन इस दुनिया के थे ही नही,या फिर समय से पहले इनका प्रादुर्भाव हो गया.. या फिर कुछ और..???

अगर आप रामानुजन को और जानना चाहते है तो उनके ऊपर बनी फ़िल्म - "The man who knew infinity" जरूर देखें। https://youtu.be/8WwLPep9xNg


आप जरा सोचिएगा की आप रामानुजन को क्यों नही जानते..??

इसके लिए सिर्फ आप ही नही,बल्कि हमारा समाज ,हमारा सरकार भी दोषी है..।। अगर हां तो कैसे..?? जरूर बताइएगा..।।

मंगलवार, 20 दिसंबर 2022

तस्वीर बहुत कुछ बयां करती है..

 ये तस्वीर बहुत कुछ बयां करती है...



अगर आप युवा है- 
तो आप इनसे सीख सकते है कि परिस्थितियां भले ही कैसी हो हिम्मत नही हारना है,हरेक परिस्थितियों से लड़ना है,भागना नही है।
गीता में भी कृष्ण कहते है-
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।



 मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि"।।2.47।।

कहने का तात्पर्य ये है कि हमारा सिर्फ कर्म करने का अधिकार है,उसके परिणाम के ऊपर हमारा कोई अधिकार नही है,हम अपने इच्छानुसार परिणाम नही बदल सकते हम जब अपने जीवन मे असफल होने लगते है तो हमारी कार्य के प्रति आसक्ति नही रह जाती जिस कारण जीवन और दुखमय हो जाता है।।

इसीलिए परिस्थितियां भले ही कितनी ही बुरी क्यों न हो हमें कर्म करना ही चाहिए..।।


ये तस्वीर दांपत्य जीवन के बारे में भी बहुत कुछ बयां करता है..

हरेक रोज हजारों जोड़ियां टूट रही है क्यों..??

क्योंकि शादियां अब संबंध नही जरूरत बन गयी है..।जब तक जरूरत पूरी होती रहती है तब-तक शादियां टिकी रहती है,जब जरूरत पूरी नही होती तो शादियां टूट जाती है।।

कहा जाता है कि-

 "दाम्पत्यम् अनुकूलं चेत् किं स्वर्गस्य प्रयोजनम्।
  दाम्पत्यं प्रतिकूलं चेत् नरकं किं गृहम् एव तत्"॥

अगर दांपत्य जीवन अनुकूल हो तो स्वर्ग की कोई जरूरत नही है,अगर अनुकूल न हो तो घर ही नरक बन जाता है।

अगर पति का कर्तव्य है कि वो पत्नी की जरूरत को पूरा करें, तो पत्नी का भी कर्तव्य है कि वो अपने पति के साथ विपरीत परिस्थितियों में कदम-से-कदम मिला के चले।।

हम अपने इतिहास को ही नही बल्कि अपनी संस्कृति को भी भूल गए है।

-जिस कैकय-दशरथ, राम-सीता, सतीअनसुइया का महिमामंडन पौराणिक काल मे किया गया था। अब लोग उसे भूल गए है।।

ये तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रहे है.. इन्हें शब्दों से बयां किया ही नही जा सकता है।


बुधवार, 30 नवंबर 2022

समस्या और व्यक्तित्व(राम )

 


इस धरा पे शायद ही कोई हो..

जिसे समस्या का सामना न करना पड़ा हो। जिसने जितनी बड़ी समस्याओं से लड़ा उसका व्यक्तित्व उतना ही बड़ा हो गया।

जरा सोचिए ... हम अपने व्यक्तित्व को निखारना तो चाहते है,मगर समस्या से नही लड़ना चाहते , हमेशा इस उधेड़-बुन में लगे रहते है कि किस तरह समस्याओं से बचा जाय।

अच्छा किसी एक व्यक्ति का नाम बताइये ...

जो लोकप्रिय हो,जिसे गूगल पे सर्च किया जा सके। या फिर आप अपने परिवार या समाज मे ही किसी सफल व्यक्ति को देखिए..।। क्या उसने कभी समस्या का सामना नही किया होगा..?? पढ़ना बंद कीजिए और जरा सोचिए🙇....

हां तो सोचा हो गया..।।

क्या निष्कर्ष निकला.. हो सकता है आप किसी निष्कर्ष पर न भी पहुंचे हो.. क्योंकि हमारा दिमाग समस्याओं का आदि हो गया है,उसके समाधान का नही।।

क्या आपको एक बात पता है🤔...

समस्या के समाधान में वो ताकत है कि आपको भगवान बना दे.. ।। तो चलिए सबसे पहले भगवान की ही बात करते है..।

राम भारत के जनस्मृति में सबसे लोकप्रिय नाम है.. हम उन्हें पूजते ही रह गए, उसने जो सीख दी उससे कुछ सीखा ही नही।। राम से वो श्रीराम कैसे बन गए इस और हमारा ध्यान गया ही नही, जरा सोचिए🤔 आखिर वो कौन सी चीज थी जिसने उन्हें राम से श्रीराम बना दिया.।।

श्रीराम समस्या से भागे नही,उन्होंने सामना किया,जब पूरे राज्य में उनके राज्यभिषेक की घोषणा हुई,और अगले ही दिन जब उन्हें वनवास हुआ तो उन्होंने ये नही कहा कि ये कैसा न्याय है..?? उन्होंने उस समस्या का सामना किया,और खुशी से वन चले गए,न कि ये बोलते हुए की मेरे साथ बुरा हुआ। 

अगर ये घटना हमारे आपके साथ हुआ होता तो क्या होता .. आप क्या करते..?? जरा सोच के बताइये..

 हम तो छोटे-छोटे चीज पे नाराज हो जाते है..।

यही नही जब रावण ने सीता का हरण कर लिया तो वो बैठे नही रहे.. बल्कि सीता को खोज कर रावण का वध किया।। हम कितनी आसानी से ये बात कह देते है.. राम ने रावण को मार,मगर कैसे मारा इस बात पे चर्चा नही करते..।।

कंहा रावण.. जिसकी कीर्ति चहु दिशा में है,उसके शौर्य का,उसके पराक्रम का,उसके राज्य के वैभवशाली का.. और कंहा राम.. अयोध्या का एक साधारण सा राजकुमार.. जिसकी राज्य की सीमा शुरू होते ही सरयू के तट पे खत्म हो जाती है। कंहा रावण,जिसकी राज्य की सीमा खत्म होती ही नही है,बाजू में उसके जितनी ताकत बढ़ती जाती है ,उतनी उसकी सीमा बढ़ती जाती है।।

राम ने उससे लड़ा, सिर्फ लड़ा ही नही,बल्कि उसपे विजय पाया.. उसके राज्य की सीमा को लांघते हुए उसके ही घर मे धराशायी किया।।

कैसे...?? जरा सोचिए... राम ने  हमारे आपके तरह रोना नही शुरू किया,मेरे पास सेना नही है,मेरे पास अस्त्र नही,मेरे पास संसाधन नही है..।। उन्होंने उस परिस्थिति का सामना किया जो था उसका सही दिशा में उपयोग किया.. जंगल मे ढेर सारे वानर(जनजाति) थे,उसीसे अपने सेना का निर्माण किया।। समुन्द्र पार करने के लिए योजना बनाई और उसपे पुल का निर्माण किया।। जब लक्ष्मण को वाण लगा तो,हिम्मत जुटाई और उस भगवान पे आस्था रखा क्योंकि उसे पता था कि में सही दिशा पे जा रहा हूँ।। इसीलिए आप भी आस्था रखिये उस परमपिता पे .. अगर आप सही दिशा पे जा रहे है तो सही परिणाम जरूर मिलेग।।

 जब रावण अपने दिव्य रथ पे लड़ने आया तो राम ने ये नही कहा कि ये क्या हो रहा है,उन्होंने सामना किया,और राम के मदद के लिए देवता भी आगे आये और उन्होंने राम को भी दिव्य रथ दिया।। इससे हमें ये सीख मिलती है कि जब आप सही दिशा में बढोगे तो जरूर आपकी मदद करने के लिए कई लोग आएंगे।।

और किसकी चर्चा करू.. जिन्होंने समस्याओं का सामना करके महान व्यक्तित्व बन गये.. कृष्ण,बुद्ध,विवेकानंद,गांधी,बोस, या फिर वर्तमान में हमारे प्रधानमंत्री.. कितनों का नाम लूं.. असंख्य नाम है,जिन्होंने समस्याओं का सामना करके इस धरा पे अपनी अमिट छाप छोड़ी है..।।

क्योंकि उन्होंने समस्या का सामना किया.. उससे भागे नही , समस्या को टाले नही,उससे सामना किया और समस्या का हल ढूंढा..।।

अब आप भी सोचिए... 

क्या आप सफल होना चाहते है...??? अगर हां, तो अब से समस्या का सामना कीजिये,और उसका हल ढूंढिये,बैचैन होके नही,चेहरे पे एक मुस्कान😊 रखके..।।

हरेक समस्या का हल है,और उसका हल हमें तबतक नही मिलता, जबतक की हम समस्या का सामना नही करते..।।

हां जाते-जाते एक बात और... अगर आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिले,जिसने समस्या का सामना किये बिना ही सफल हो गया है तो,जरूर बताइएगा..😊।।

सोमवार, 21 नवंबर 2022

तुम वो नही ,जो दिखते हो


तुम वो नही ,जो दिखते हो।

तुम वो हो,जो दिखते नही ..।।

तराशो अपने आप को,

कुरेदे अपने आप को,

भट्टियों में तपाओ अपने आप को,

तब पता चलेगा..

तुम वो हो,जो दिखते नही ।।


ओढ़े हुए केंचुल को नोच फेंको,

उस आइने को तोड़ फेको,

जिसमें खुद को देख रहे हो..

तब ही खुद से साक्षात्कार होगा,

तुम वो हो,जो दिखते नही ..।।


समय आ गया, अब न देर करो..

अगर अब नही,तो फिर कब..?

खुद से साक्षात्कार करोगे..

तुम वो नही ,जो दिखते हो।

तुम वो हो,जो दिखते नही ...।।


रविवार, 20 नवंबर 2022

हार कर हारना, क्या हार है..



हार कर हारना, क्या हार है..

जिस हार से,हार का अहसास न हो,

वो हार भी क्या हार है..।


वो हार भी क्या हार है..

जिस हार से मन द्रवित न हो,

सीने में आग प्रजवल्लित न हो,

आँखों मे क्रोध की ज्वाला न हो,

और अपनी कमियों को,

भट्टियों में झोंकने की ताकत न हो,

वो हार भी भला क्या हार है..।


वो हार भी भला क्या हार है..

जो नए कीर्तिमान रचने को विवश न करें,

वो हार भी भला क्या हार है..

जो स्वर्णिम अक्षरों में नाम न खुदवा दे..

वो हार भी भला क्या हार है..

जो खुद से खुद का आत्म-साक्षात्कार न करा दे..

वो हार भी क्या हार है..

जिस हार से, हार का अहसास न हो..।।


शनिवार, 19 नवंबर 2022

कमर कस हुंकार भर


 हार कर, उदास होकर बैठने से क्या होगा

जबतल्क मंजिल न मिले , तबतल्क रुकना गुनाह है..।

हार कर ही हिमालय फतह हुआ,

हार कर ही समुन्द्र की गहराइयां पता चला,

हार कर ही आसमां की उचाइयां पता चला,

बिना हारें, किसी का अमिट अक्षर में कंहा नाम हुआ..

जबतल्क मंजिल न मिले , तबतल्क रुकना गुनाह है..।


अपने हार को भी जीत में तब्दील कर,

तू इस कदर कर्म कर, की हारकर भी जीत का अहसास हो।

वो जीत भी क्या जीत है..

जिस जीत से, हार की खुश्बू आती नही।

वो जीत भी क्या जीत है..

जिससे खुद का साक्षात्कार का अहसास न हो।

वो जीत भी क्या जीत है..

जिससे अपनों का अहसास न हो।।


अपने हार को भी जश्न बना..

जिस हार ने तेरी कमजोरियां दिखाई ..।

क्योंकि यंहा कौन है..??

जो तेरी कमजोरियां दिखायेगा..।

अपने हार का भी सम्मान कर..

जिस कदर करता गुरु का सम्मान है..।

अपने हार का भी आदर कर,

जिस कदर करता बड़ों का आदर..।।


मगर ये हार का सिलसिला कब तक चलेगा..

जब हार कर भी, हार का अहसास न हो...।

तब समझ ले तू, जीत के काबिल नही है..

अगर थोड़ी भी, आन-शान बचा हो

तो जीत के लिए जी-जान झोंक दे..।।


जब हार का अहसास न हो..

तो तू समझ ले, 

तू जीत के काबिल नही..।

क्योंकि तेरी कमियों ने तुझे जकड़ लिया है,

जीते-जी मृतप्राय होने से पहले,

इस जकड़न को तोड़ कर तू, जीत का स्वाद चख ले..।।


उस जीत से भी बड़ी जीत होगी,

जब अपनी कमियों के केचुल को उखाड़ फेंकोगे..।

क्योंकि जो अपनी कमियों पे विजय पा ले,

उसे जीतना सब आसान है..।।


कमर कस, हुंकार भर। 

अपनी कमियों को ललकार कर,

युद्धभूमि में सीना तानकर..

अपने कमियों पर प्रहार कर..।

अपने तरकश से पहला बाण निकालकर,

अपने काम(क्रोध,मोह) पर तुम वार कर।

दूसरे बाण से तुम अपने आलस्य पर प्रहार कर।

और तीसरे बाण से तुम अपने अंतर्द्वंद्व पर वार कर।

अगर इससे भी न हो, तो आखरी अस्त्र इस्तेमाल कर,

 पुनर्जीवन(ध्यान) को स्वीकार कर..

फिर से अंकुरित होकर अपने आप को स्वीकार कर..।।


गुरुवार, 17 नवंबर 2022

आज वो फिर रोएगी..

आज वो, फिर रोएगी..

मुझसे कंही ज्यादा,

क्योंकि मुझसे कंही ज्यादा उसने मेहनत की है..

मैं तो अपनी खामियां जानकर खुद को समझा लूंगा..

मगर वो खुद को कैसे समझाएगी..।।

बेवजह उस खुदा पे, और अपने कर्मों पे खिजेगी वो,

कैसे कहु मैं..

मैं अपनी असफलताओं के लिए, खुद ही जिम्मेदार हूँ..।।

आज वो फिर रोएगी,

मुझसे कंही ज्यादा..।।


Yoga for digestive system