शनिवार, 2 अगस्त 2025

हे भगवान कृपा करो..

मैं सुबह-सुबह रास्ते से जा रहा था..तो एक मंदिर दिखा..
मैंने भगवान से कहा-हे भगवान सदमार्ग पे ले चलो..
भगवान जी ने कहा- पहले कुमार्ग तो छोड़ो..।

क्या भगवान के कृपा के बिना आप कुमार्ग छोड़ सकते है..??
शायद बिल्कुल नही..।
मैंने बहुत प्रयास किया..न जाने कितनों के कसम खाये और तोड़े..अंत में,मैंने प्रयास करना ही छोड़ दिया..।
मगर अंतस मन से भगवान को कहा करता था..
 हे भगवान इस दलदल से निकाले..।
मेरा आवाज उन तक पहुंचा,और मैं इतना बीमार हो गया कि मुझमें खड़े होने का हिम्मत तक नही था..ये सिलसिला 1 सप्ताह से ज्यादा तक रहा..सारा दिन बिछावन पर ही लेटा रहता..।

भगवान के कृपा से आज मैं स्वस्थ हूँ..और उस दलदल से निकल चुका हूं..।
हां कभी-कभी वो दलदल मुझे अपनी तरफ खिंचता है,मैं उधर बढ़ भी जाता हूँ,मगर फिर भगवान उधर से खींच कर सदमार्ग पे ले आते है..।।

"भगवान कृपा करते है,उनपे विश्वास रखें..
 हां हमारी आवाज ही देर से पहुंचती है,
 शायद इसलिए कृपा होने में देर लग जाती है।।"



शोध का विषय ये है कि- किस तरह की आवाज भगवान तक पहुंचता है🤔..??

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

मैं थक गया हूँ..

मैं थक गया हूँ..
जबकि अभी तक सही दिशा में चला नही हूँ..
आधी उम्र यू ही सबके नजर से छिपी हुई गंदगियों में बिताया..
लोगों को लग रहा था कि मैं आगे बढ़ रहा हूँ..
मगर सच तो ये है कि उस गंदगियों का आदी हो गया था,
जब उस गंदगी से निकला तबतक सब कुछ खो चुका था..।।
जिस उम्र में लोग सफलता के ऊंचाइयों पे होते है,
मैं उस उम्र में,
एक सफलता के लिए लालायित हूँ..।।


अब वो कुछ कर नही सकता...
जो मैंने सोचा था..।
मगर ऐसा भी नही है कि,
मैं कुछ कर नही सकता..।
अभी भी बहुत कुछ कर सकता हूँ..
जो मैंने सोचा था..
यंहा तक कि उस से भी ज्यादा कर सकता हूँ..
क्योंकि अभी भी मेरे पास कुछ वक्त और उम्र बचे है..
कुछ करने को,खुद को बदलने को..
और खुद के ही नजर मैं गौरवान्वित महसूस करने को..।।

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

स्वयं को खाली करें..

हमसब खुद को बदलना चाहते है,जिंदगी में कुछ नया पाना चाहते है,मगर अफसोस..
हममें से ~90% लोग खुद को नही बदल पाते..
आखिर क्यों..??
क्योंकि पानी से भरे गिलास को फिर से नही भरा जा सकता है..जबतक की गिलास को खाली न किया जाय..।

हमलोगों का भी हाल पानी से भरे गिलास की तरह है,हमसब खुद को बदलना तो चाहते है..मगर अपने अंदर जमी पुरानी आदतों को नही छोड़ पाते..।।
जबतक हम खुद को खाली नही करेंगे तबतक उसके जगह नई आदते नही ले सकता है..।।
ये आसान काम नही है..
क्योंकि हममें उतना ताकत नही है कि, खुद को खाली कर सकें..।


तो ताकत कंहा से लाये..?
इसे कंही से नही लाया जा सकता बल्कि जो ऊर्जा फालतू चीजों में बर्बाद हो रहा है, उसे चिन्हित करके उसे छोड़े और उस ऊर्जा को संचित करें..।।

अब आप खुद को खाली करें..
थोड़ा मनन कीजिये..
और सोचिये आप क्या-क्या छोड़ सकते है..जो आपके रास्ते का बाधक बन रहा है,और बन सकता है..।।
जब ही आप इन आदतों को छोड़ेंगे जिंदगी में नया बदलाव खुद-ब-खुद आ जायेगा..।।
जमा हुआ पानी बदबू देता है..अगर इसमें पानी का स्रोत खोल दिया जाय तो बदबू समाप्त हो जाता है...
इसी तरह गंदी आदतें भी आपको बदबूदार बना देगा..इसी लिए अच्छी आदतों को अपनाए और स्वयं को निखारें..
इसके लिए आपको सबसे पहले स्वयं को खाली करना होगा..।।


रविवार, 6 जुलाई 2025

मन हुआ था..

मन हुआ था, घर जाने को..
मगर फिर अहसास हुआ कि,
घर...घर कंहा है..
पापा के उम्मीदों का सपना तोड़ के आखिर कैसे उनका सामना कर सकूंगा
माँ के अरमानों को बिखेर कर आखिर कैसे सुकून से रह सकूंगा..
समाज की चुभती निगाहों का कैसे सामना कर सकूंगा..।।
सब कुछ भूल गया था मैं..
क्योंकि इतना थक चुका था मैं,
की दो पल घर पर बिताने को जी चाह रहा था..
रेलवे से फ्लाइट तक कि टिकट कटा कर जाने को तैयार था मैं..।।
फिर सारी उम्मीदों पे पानी फिर गया..
जब कोई अपना ने मुझे मेरा औकाद बताया..।।
किस मुँह लेकर घर जाऊँ..।

तबियत

तबियत बड़ी जोड़ की खराब है..
मन करता है घर को जाऊ..
मगर घर के दरवाजे भी बंद है..।

15 दिन होने को है..शरीर मानो जबाब दे रहा है..
आज बहुत मन हुआ घर चला जाऊं..
मगर घर पर जाकर माँ के ऊपर बोझ नही बनना चाहता..।।

माँ का कॉल का इंतजार कई दिनों से कर रहा हूँ..
मगर अब माँ का भी फोन नही आ रहा है..।।
अब शरीर साथ नही दे रहा है..
सोचा थोड़ा दिन घर पे बिताऊँ..

असफलता का बोझ अब सहन नही हो रहा है..
जिंदगी में,आगे का राह कुछ दिख नही रहा है..।
कहने वाले कह रहे है कि कोई नॉकरी कर लो..
किस मुँह से कहु..
इस 21 वी सदी में हम जैसे डिग्रीधारियों के लिए कोई ढंग का जॉब नही..।।

मंगलवार, 24 जून 2025

मैं क्या सोच रहा था..

सच हमेशा वो नही होता..
जो आप देखते है,और सुनते है..
सच इससे अलग भी हो सकता है..।।

अभी-अभी ऑटो से आ रहा था..और ऑटो में ग़दर फ़िल्म का गाना बज रहा था.."हो मैं निकला गड्डी लेकर...
वो गाना सुनके मैं भी गुनगुणाने लगा..
मगर बार-बार आवाज कम और ज्यादा हो रहा था..
जिसकारण मेरे अंदर ड्राइवर के प्रति नाराजगी उभरने लगा..
कुछ ही सेकंड के बाद ड्राइवर ने मुझसे कहा देखिए ना मोबाइल मैं क्या हो गया है..
आवाज खुद-ब-खुद कम हो जा रहा है..।
ये सुनते ही मुझे शर्मिंदगी महसूस हुआ..
मैं क्या सोच रहा था..
जबकि वास्तिवकता बिल्कुल इससे अलग था..।।

सोमवार, 23 जून 2025

सफल लोग...

दुनिया सिर्फ सफल लोगों को ही याद रखता है..
क्या आपको कोई असफल लोग याद है..??
आपके जेहन में जितने भी नाम होंगे..
(जान-पहचान वालों को छोड़कर😊)
वो कंही-न-कंही अपने जिंदगी में सफल जरूर होंगें..।

चलिए आंख बंद कीजिए..
और मन मे किसी भी क्षेत्र से किसी का नाम सोचिये..।
क्या आपने सोचा...??
अगर हां,तो आपके जेहन में उसका नाम क्यों आया..
क्योंकि वो अपने क्षेत्र में सफल है..।।

हममें से हरेक लोग सफल होना चाहते है..
और हममें से हरेक लोग(100%) जिंदगी में कभी-न-कभी सफल जरूर होते है..।।

तो फिर आखिर क्या होता है कि हम असफल हो जाता है..??
हम अपनी असफलता के लिए स्वयं ही जिम्मेदार होते है..
अगर हम/आप अगर अपनी असफलता के लिए दूसरों को कोसते है,तो वो इसलिये की हममें इतनी भी हिम्मत नही है कि हम सच्चाई को स्वीकार कर सकें..।।
असफलता की शुरुआत स्वयं से ही होती है..
सफलता त्याग मांगती है..
और हम कुछ त्यागने के लिए तैयार ही नही होते..।

हममें से शायद ही कोई होगा जो गांधी को नही जानता होगा..?
आखिर क्यों..??
क्योंकि गांधी ने अपना सर्श्व त्याग दिया..।।
शायद ही कोई युवा होगा जो भगत सिंह को नही जानता होगा..
क्यों..क्योंकि उन्होंने जिंदगी की भीख को ठुकरा कर फांसी के फंदे को चुना..।

सफलता त्याग से मिलती है..
आप जितना त्याग(काम,क्रोध,मोह,लोभ) करते जाएंगे आप सफलता के ऊंचाइयों पे उतना चढ़ते जाएंगे..।।

सफलता की ऊंचाई पठार की तरह नही बल्कि शूल की तरह है..
जो दूसरों को तो देखने में अच्छा लगता है..मगर स्वयं को चुभता रहता है..अगर इसके साथ तालमेल नही बिठाया तो जिंदगी का बुरा हश्र होता है..।।


हरेक दशक में कई नामचीन हस्ती उभरते है..
मगर अपने सफलता का रजत जयंती(25 वर्ष) भी नही मना पाते है..।
आप जंहा है वंहा से 10 वर्ष पीछे जाए और उस समय के हरेक क्षेत्र के लोकप्रिय लोगों का नाम सोचें..
उनमें से आज कितने लोग अपने सफलता को बरकरार रखें हुए है..।
आप जितने पीछे जाते जाएंगे उतने कम लोग को जानते जाएंगे..।।
मगर आगे हमारा भविष्य पड़ा हुआ है..अगर कोई हमें भी याद रखें.. कोई रखें या न रखें गाँव वाला ही रखें.. या फिर आनेवाली हमारी पीढियां ही याद रखें.. तो उनके लिए ही सही कुछ करना होगा...।
नही तो, हममें से जैसे कई लोग अपने बाप-दादा को कोसते है,उसी तरह हमारी आनेवाली पीढियां भी हमें कोसेगी..।।

अपने कमियों को त्यागे..और सफलता की और अग्रसर हो..।।
सफलता का एक ही रहस्य है..
"अपने लक्ष्य के प्रति सरस्व त्याग के लिए तत्परता,निरंतरता और कर्मठता.."
इन राहों पे चलकर आजतक कोई असफल नही हुआ है..।।
बुद्ध, महावीर से लेकर स्वामी विवेकानंद,अरविंदो..
अशोक,चंद्रगुप्त से लेकर गांधी,पटेल..
आर्यभट,वराहमिहिर से लेकर c.v.रमन,साराभाई..
कालिदास,हरिषेण से लेकर प्रेमचंद्र,दिनकर..

सबके सफलता का एक ही रहस्य था..
"अपने लक्ष्य के प्रति सरस्व त्याग के लिए तत्परता,निरंतरता और कर्मठता.."

Yoga for digestive system