शनिवार, 31 अगस्त 2024

विश्वास रखें प्रयास से परिणाम बदलते है..

1940 में अमेरिका के बेथेलहेम में एक लड़की का जन्म होता है,वो अपने माता-पिता के 22 संतानों में 20वी थी..
पिता रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करते थे,और माँ किसी के घर पर साफ-सफाई का काम करती थी..
वो जन्म से ही लगातार बीमार रहती थी..4 साल के उम्र में निमोनिया हो गया,बचते-बचते बच गई.. मगर कुछ समय बाद पोलियो ग्रस्त हो गई..इस बार उनका बायां पैर लगभग लकवाग्रस्त हो गया..
डॉक्टरों का कहना था...ये फिर कभी इस पाँव का इस्तेमाल नही कर पायेगी..

अब आपको क्या लगता है..
क्या ये लड़की कभी दौड़ पाएगी..??
अगर दौड़ पाएगी भी तो कितना दौड़ पाएगी..??
क्या इतना तेज दौड़ पाएगी, की दुनिया इसे याद रखें..??


हां वो लड़की सिर्फ दौड़ी ही नही,
बल्कि 1960 के रोम ओलंपिक में इतना स्पीड दौड़ी की 3 गोल्ड मैडल जीत गई..
100मीटर,200मीटर,4×100मीटर रिले में..


वो विल्मा रुडोल्फ थी..
जिसने असंभव को संभव बनाया..
मगर इसमें उनके परिवार वालों का भी अहम योगदान था..
वो अपनी माँ के साथ हरेक सप्ताह अपने घर से 80km दूर इलाज के लिए जाती थी..ये सिलसिला 2 साल तक चलता रहा..
उसके बाद घर पर ही दिन में 4 बार इनके पाँव को मसाज किया जाता था..ये सिलसिला 8 साल तक चला..

और 12 साल के उम्र में उन्होंने लेग ब्रेस और आर्थोपेडिक जूते उतार कर फेंक दिया..
और अपने स्कूल में सबसे पहले बास्केटबॉल खेलना शुरू किया फिर दौड़ना शुरू किया..

वो क्या चीज था..
जिसने विल्मा रुडोल्फ को दौड़ने के लिए मजबूर किया..??

इच्छा शक्ति,दृढ़ संकल्पता और सतत प्रयास के द्वारा परिणाम बदला जा सकता है..

क्या आप तैयार है..अपने उन अवगुणों के अपंगताओ को त्यागने के लिए..??
विश्वास रखें...प्रयास से परिणाम बदलते है..।।

रविवार, 25 अगस्त 2024

कृष्ण आज भी प्रासंगिक है..

कृष्ण आज से लगभग 5000 साल पहले हुए..
मगर अभी तक उन्हें कोई समझ नही पाया..
उन्हें जानने और समझने का प्रयत्न अभी तक जारी है,और आने वाले भविष्य में उन्हें जानने का और प्रयत्न किया जाएगा..।



आज ऐसा कोई क्षेत्र नही है,जंहा कृष्ण प्रासंगिक नही है..

●वो प्रेम के इतने बड़े मानदंड गढ़ दिए है कि कोई अभी तक वंहा तक पहुंच नही पाया..

●उन्होंने मित्रता भी ऐसी निभाई की कोई उनके बराबरी तक नही आ पाया..उन्होंने सुदामा को वो सबकुछ दिया जो उनके पास था..

कृष्ण से बड़ा शांतिप्रिय कोई नही है..
उन्होंने शांति की स्थापना के लिए मथुरा छोड़कर द्वारका चले गए..।।
उन्होंने शन्ति के लिए पांडवो का दूत बनना भी स्वीकार किया.1

●वो इतने बड़े राजनीतिज्ञ/कूटनीतिज्ञ थे कि, उन्होंने सबकुछ करके भी कुछ नही किया..
-उन्होंने ही सर्वप्रथम युद्ध को प्रासंगिक बतलाया..
क्योंकि युद्ध जरूरी है उत्थान के लिए,प्रगति के लिए..।।
चाहे वो वाहय युद्ध हो या अंतर्मन का ...
जिसने लड़ा उसने ही नाम किया..
फर्क नही पड़ता कि आप हारे या जीते..

वर्तमान में ही देखिए सबसे ज्यादा समृद्ध देश कौन है..
जिन्होंने युद्ध लड़ा..??
जापान,जर्मनी,दक्षिण कोरिया ने युद्ध हारा,मगर आज वो समृद्ध है..

महत्वपूर्ण ये है कि क्या आप लड़े..??
मगर हम भारतीय लड़ना ही भूल गया..आज हम लड़ रहे है इसलिये आगे बढ़ रहे है..।।

युद्ध की सबसे बड़ी देन क्या है..??
आर्थिक,सांस्कृतिक,सामाजिक,वैज्ञानिक विकास है..
वर्तमान में ही देखिए..
•रशिया सर्वप्रथम अंतरिक्ष मे गया, क्यों..??
•अमेरिका सर्वप्रथम चाँद पे मानव उतारा,क्यों..??
•भारत ने मंगल पर अपना उपग्रह भेजा,क्यों..??
ये सब क्या था एक प्रकार का युद्ध ही तो था..अगर ये युद्ध नही होता तो क्या हम आज इतना जान पाते..??
(युद्ध से तात्पर्य आर्थिक,सांस्कृतिक,सामाजिक,वैज्ञानिक स्तर पर आगे बढ़ने की होड़ से है)

वर्तमान मे मनुष्य के तकलीफों का सबसे बड़ा कारण क्या है..??
हम हरेक चीज को दमन करते जा रहे है,और जब किसी चीज के दमन का स्तर ज्यादा विषाक्त हो जाता है तो अनेक समस्याओं का उद्गार होता है..और हममें से अक्सरहाँ उस समस्या से लड़ नही पाते है..

कृष्ण का पूरा व्यक्तित्व यही संदेश देता है..
किसी चीज का दमन न करें जब जिस चीज की जरूरत हो,उसे पूरा करें..
चाहे झूठ बोलना पड़े,क्रोध करना पड़े,लड़ना पड़े,भागना पड़े,पाँव पकड़ना पड़े,प्रेम करना पड़े,छल करना पड़े या फिर युद्ध ही क्यों न करना पड़े..उसे करें..
मगर हममें से अक्सरहाँ लोग इन सब चीजों का दमन कर रहे है..
मगर ध्यान रखें ये सब तब करें जब सिर्फ आपका ही नही बल्कि सबसे बड़े वर्ग का हित सधता हो तब ही करें..।।

मगर हम क्या कर रहें है..??
अगर इनमें से कुछ कर भी रहे है तो वो सिर्फ हम तक ही सीमित है..
अगर बहुत बड़े वर्ग का हित छिपा हुआ है तो हम रिस्क नही लेना चाहते..

कृष्ण ही ऐसे व्यक्तित्व हुए जिन्होंने हरेक चीज को प्रासंगिक ठहराया..
बाकी किसी ने नही..
चाहे वो राम हो,बुद्ध हो,महावीर हो,यीशु हो,मोहम्मद साहब हो,गुरु नानक हो..सबो ने शांति का ही पैगाम देने की कोशिश की...

कृष्ण ही सिर्फ एकलौते व्यक्तित्व है जिन्होंने शांति की स्थापना के लिए युद्ध को प्रासंगिक ठहराया..।।
काश कृष्ण जैसे एक-दो व्यक्तित्व इस धरा पर और होता तो क्या होता..??

हम मानव समुदाय अभी तक उतने प्रौढ़ नही हुए की कृष्ण को समझ पाये..
हम जितने प्रौढ़ होते जाएंगे,कृष्ण की प्रासंगिकता और बढ़ती जाएगी..।।



रविवार, 18 अगस्त 2024

इस रक्षाबंधन भाइयों के लिए संदेश..

आपने कभी सोचा है कि हम रक्षाबंधन क्यों मनाते है...??
शायद इसलिए कि भाई बहन की रक्षा और विपरीत परिस्थितियों में साथ दे..।।
मगर आज हमारी बहनों को, किसी बहन के भाई से ही खतरा है..।।
हम अपनी बहन का रक्षा करने के लिए कभी-कभी सारी हदें पार कर देते है..वंही किसी दूसरे के भाई की बहन के साथ हमारा व्यवहार क्यों बदल जाता है..??


आज हमारी बहनों को राखी बांधते हुए अपने भाई से यही कहना चाहिए की...।।
जिस तरह आप मेरा सम्मान और आदर करते हो उसी तरह दूसरों के बहनों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करो..।।
●आपके व्यवहार से कोई बहन असहज न महसूस करें..।

हम सदियों से राखी बांधते और बंधवाते आ रहे है..
मगर आज भी हमारी बहनें असुरक्षित है..क्यों..??
क्योंकि किसी के भाई के कारण ही किसी की बहन असुरक्षित है..।।

अब समय आ गया है..
बहनों के बंदिशों की जंजीर तोड़कर..
भाइयों को बंदिशों के जंजीरों में जकड़ने का..
नही तो फिर कोई भाई किसी की बहन की अस्मिता को नोचेगा..
और हम निर्लज होकर TV और अखबार में न्यूज़ देखेंगे और पढ़ेंगे..और इससे ज्यादा हुआ तो सोशल मीडिया पे कमेंट कर के भूल जाएंगे...।।


ये सरकार की निर्लज्जता नही तो और क्या है..
अपने सुरक्षा के लिए इन्हें Z सेक्यूरिटी चाहिए और हमारी बहनों के लिए सुरक्षित माहौल का भी प्रबंधन नही कर सकते है...।।
ये निर्लज्ज सरकार अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए ध्वनिमत से विधेयक पारित करते है..
और हमारी बहनों के सुरक्षा के लिए कोई सख्त कानून नही बनाते..जिससे उन दरिंदों भाइयो के अंदर कानून का डर हो..

ये भारतभूमि है जंहा जोर-जोर से कहा जाता है..
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता..

मगर आज इस भारत भूमि को क्या हो गया है..
जंहा हर गलियों में देवी की आराधना होती है,वंहा देवी जैसी बहन के साथ आज दरिंदगी बिना ख़ौफ़ के साथ किया जा रहा है..।

हम भाइयों का भी कुछ कर्तव्य है..
इस रक्षाबंधन संकल्प ले की..
●हमारे व्यवहार के कारण किसी की बहन को दुःखी न होना पड़े..
●हमारे व्यवहार के कारण किसी की बहन को असहजता न महसूस हो..
●हमारे व्यवहार के कारण किसी की बहन को डरने की आवश्यकता न हो..

और भगवान से आराधना करें कि हमारी बहन इतनी सशक्त बने की उसे भाइयों की जरूरत न पड़ें, बल्कि भाइयों को उनकी मदद की जरूरत पड़े..।।



शनिवार, 17 अगस्त 2024

धैर्य रखिये,प्रयास से परिणाम बदलते है..

मुझे पेड़ पौधों से लगाव है..
मगर मैं जंहा रहता हूँ,वंहा कई महीनों से सोच रहा था कि एक दो पौधा लगाऊ..
मगर लगा ही नही पा रहा था..
एक दिन मेरे सामने वाली ऑन्टी रूम खाली कर रही थी तो उन्होंने अपने बागवानी के पौधे बांट दिए..
सबो ने अच्छे-अच्छे पौधे चुन के ले लिए..
मैं जब आया तो मेरे हिस्से में एलोवेरा आया..
वो इस अवस्था मे था मानो ऑन्टी के रूम खाली करने का गम और उनसे जुदाई का गम सबसे ज्यादा इसे ही था..।
मुझे जिस अवस्था मे पौधा मिला वो पूर्णतया मृत अवस्था मे ही था,वो पूर्णतया भूरा हो गया था..
मगर मैंने उसकी थोड़ी सेवा भाव की..
कुछ ही दिनों में वो भूरा से हरा हो गया..
वो दो से चार और चार से आठ हो गए है..
गमला पूर्णतया भर गया है..
अब पता ही नही चलता कि इसमें सबसे पुराना पौधा कौन सा है..।।
बस इतना ही नही बल्कि इस गमले से ही 4 सदाबहार के पौधे भी उगे और वो अब खिल रहे है..


मैं और मेरे रूम ऑनर ने तुलसी के पौधे खरीद कर लगाने का भी प्रयास किया मगर नही लगा..
मगर एलोवेरा के गमले से ही तुलसी के पौधे भी निकले जो आज लहलहा रहे है..।।

इसीलिए धैर्य रखिये
प्रयास से परिणाम बदलते है..
अगर आपने धैर्य रखा,
तो आपको वो भी मिलेगा,
जिसकी आपको अपेक्षा नही थी..

शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

त्याग से सफलता की और..

आप कितने लोकप्रिय लोगों को जानते है..??
जिससे आप प्रभावित होते है,या फिर न होते हो..

न्यूनतम 10 अधिकतम 100..शायद इससे कम या इससे कुछ ज्यादा लोगो को तो आप नही जानते होंगे..।।

कभी आपने सोचा है..
सफलता और लोकप्रियता का राज क्या है..??
बस एक ही राज है..
और वो है "त्याग"(sacrifice)
हमें अपनी बुरी आदतों से इतना लगाव हो जाता है कि हम उसे छोड़ नही पाते है..(जैसे-ज्याद देर तक सोना,गुस्सा करना,इत्यादि मगर वर्तमान में सबसे बुरी आदत है मोबाइल पे स्क्रोल करना,इसे हममें से सब चाहते है कि इसका इस्तेमाल कम करू, मगर कर नही पाते..)
और सफल लोग, अपनी सफलता के लिए अपनी बुरी आदत को त्याग कर ही देते है,बल्कि सफलता में आड़े आनेवाली अच्छी आदतों को भी त्याग करने से नही हिचकते..

एक आदमी को औसतन कम से कम 6 घंटा सोना चाहिए..मगर जो सफलता के पिपासु है वो सोते नही बल्कि शरीर को आराम देते है(4 घंटा काफी है)
इसी तरह सफल लोग उन रिश्तों को भी पीछे छोड़ देते है,जो उनके सफलता में आड़े आते है..

सफलता बहुत त्याग मांगती है..
और वर्तमान में हम अपनी कमियों को भी त्यागने में सक्षम नही है...।।

हममें से शायद ही कोई होगा जो लता मंगेशकर को नही जानता होगा..
एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया..
अगर आपको फिर से पुनर्जन्म मिले तो क्या आप फिर से लता मंगेशकर बनना चाहेंगी..
उनका जबाब मिला कि जन्म न मिले वो ही बेहतर है, अगर हो भी तो लता मंगेशकर के रूप में न हो..
https://youtu.be/qPKgJnVq6fQ?si=6Bm1O4nOfxG4Bj22

आखिर ऐसा उन्होंने क्यों बोला होगा..??
क्योंकि उनकी त्याग की पराकाष्ठा उस सीमा तक पहुंच गई थी कि वो जन्म-मरण से छुटकारा पाना चाहती थी,या फिर इस तरह के जीवन से..।।

आखिर ऐसी क्या चीज थी जिसने सिद्धार्थ को बुद्ध,वर्द्धमान को महावीर,विष्णुगुप्त को कौटिल्य,
अशोक को देवनामप्रिय,बदरुद्दीन को अकबर,
धनपत राय को मुंशी प्रेमचंद्र ,दिनकर को राष्ट्रकवि,
गांधी को महात्मा, सुभाष को नेताजी, 
भगत सिंह को सहीदे-आजम, अंबेडकर को बाबा साहेब , A.P.J.अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन बनाया..

कितनों का नाम लू..
मगर जितने भी लोग को हम आज पढ़ते है,जानते है,उनके विचारों से प्रभावित होते है..
उनके सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ उनका त्याग था..
जिसने जितना बड़ा त्याग किया दुनिया उसे  उसी तरह याद करती है..
हमारा आपका त्याग कभी व्यर्थ नही जाता..
हरेक त्याग का फलीभूति होता ही है..।।

क्या हम अपनी कमियों का त्याग कर सकते है..??
एक मिनट..
क्या हम अपने कमियों को जानते भी है कि नही..??
शायद नही..
कैसे जाने..
आत्ममनन करके ही जान सकते है..
मगर कुछ कमियां जेनेटिकली है, ये सब मे है..
जैसे-काम,क्रोध,मोह,लोभ,हिंसा,ईष्या,द्वेष,डर इत्यादि

ये सब कुछ जीवनयापन के लिए जरूरी है,मगर इसके अति से हमेशा बचना चाहिए..अगर आप अति से न बच पाए तो ये सब चीजें आपके जीवन को इतिश्री की और ले जाएगा..।।

क्या आप तैयार है..??

गुरुवार, 15 अगस्त 2024

संघर्ष

हमें अपने हिस्से के संघर्ष से खुद ही जूझना होता है..
यंहा कोई और नही है,आपके संघर्ष में हिस्सेदारी के लिए..
बिरले ही कोई-कोई होते है,जिन्हें मदद मिल जाती है..
संघर्ष से जूझने में..
अन्यथा अपने संघर्ष से स्वयं ही लडकर जीतना होता है..
यंहा कोई नही है,उसके सिवा..
वो सिर्फ शिव ही है..
जो आपके संघर्ष में,आपके सहयोगी हो सकते है..।।
उनपे आस्था रखकर,सबकुछ उनके ऊपर छोड़ दे..
सब ठीक हो जाएगा..।।

कमियां

आप दूसरों के नजर में कैसे है..ये उतना मायने नही रखता जितना कि, 
आप स्वयं के नजर में कैसे है..??
दूसरों के नजर में अच्छा होने से सम्मान मिलता है,
और स्वयं के नजर में गिरा होने से आत्मग्लानि होता है,मगर इसके लिए अपनी कमियों का भान होना जरूरी है,जो शायद ही किसी-किसी को होता है,और उसमें से विरले ही कोई-कोई उसे दूर कर पाता है..।।

हम सारी क्रियाकलाप दुनिया के नजर में अच्छे दिखने के लिए करते है..
और हम कभी ये मूल्यांकन नही करते कि हम स्वयं के नजर में कैसे है..।।

हम अक्सरहाँ अपनी कमियां दुसरों के नजर से छुपाते है..
मगर उन कमियों को स्वीकार कर उसका न ही मूल्यांकन करते है,और न ही उसे दूर करने की कोशिस करते है..।।

जब तक हम अपनी अच्छाइयों का मुखोटा हटाकर 
अपनी कमियों को स्वीकार कर..
उसे दूर करने की कोशिस नही करेंगे तबतक हमें तकलीफों का सामना करना पड़ेगा..।।

आपके सिवा और कोई नही,आपके कमियों के बारे में जानता है..
शायद आप स्वयं भी नही..
अपने अंदर झांके और अपनी कमियों को महसूस कर उसे दूर करें..
इससे सिर्फ आपकी ही नही, दूसरों की जिंदगी भी आनंदमय हो जाएगा..।


Yoga for digestive system