शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

धर्म और बाजार..

जिस तरह से धर्म का बाजारीकरण किया जा रहा है,कंही ऐसा न हो कि बाजार धर्म को लील जाए..ये बुद्ध,महावीर,नानक और कबीर की धरती रही है..जंहा इनलोगों ने पूरी जिंदगी खफा दी धर्म के नाम पर पांखड करने वालों का विरोध करते हुए..
मगर आज धर्म के नाम पर जो हो रहा है उसके खिलाफ कोई बोलने वाला नही है..आखिर कौन बोलेगा..क्योंकि कंही न कंही धर्म के बाजारीकरण से सबका लाभ हो रहा है..।
जो धार्मिक है उन्हें लग रहा है लोग बहुत धार्मिक हो रहे है..
जो अधार्मिक है वो भी मुस्कुरा रहें है..।

आप खुद से पूछिए..
क्या आप धार्मिक है..??
अगर हां..?
तो कैसे..??

मैं उनके मैसेज का इंतजार करती रहीं..

मैं उनके मैसेज का इंतजार करती रहीं..
मिनटों तक..
न जाने ये मिनट..
कब घंटो में बदल गए पता ही नहीं चला..
ये घंटें..दिन में बदल गए..
और दिन सप्ताह में..
और सप्ताह महीनों में..।
हां महीनों हो गए..
उनके मैसेज का इंतजार करते हुए..।

हरेक रोज सोचती हूँ..
आज कंही उनका मैसेज न आये..
और कंही वो..
ये ना पूछ ले..
की कैसी हो..??
क्या जबाब दूंगी मैं..।
ये सोच के हर रोज भगवान से प्राथना करती हूं..
उनका कोई मैसेज न आये..।
तो फिर क्यों मैं..
उनके मैसेज का इंतजार करती हूं..??
शायद अपने पापों का पश्चाताप करती हूं..।

हर रोज,हर पहर..
हर शाम,हर रात..
मोबाइल ये सोच के स्क्रोल करती हूं..
कंही कोई आभा ही दिख जाए उनका..
उनके आभा के सहारे ही..
जी लुंगी में..।




रविवार, 4 अक्टूबर 2026

मैंने सपनों से सीखा..

सपना देखना आम बात है,उससे भी आम बात ये है कि सो के उठते ही 99% सपने हम भूल जाते है..मगर कुछ सपने ऐसे होते है जो आपको याद रह जाते है..।
मैंने भी आज दोपहर में एक सपना देखा..सपने के कुछ अंश अभी तक याद है..
पहला दृश्य-
मैं देखता हूँ कि दक्षिण भारतीय शैली का मंदिर है आसपास और छत पे कुछ लड़कियां नाच रही है और हल्की फुल्की बारिश हो रही है..
मैं छत से नीचे झांकता हूँ तो देखता हूँ कि छत के किनारे एक सोई हुई मूर्ति(भगवान) है लगभग 7-8 फ़ीट जो काले पत्थर की है..मेरी नजर उस मूर्ति से मिलते ही, मूर्ति बैठ जात है,और कहता है कि तुम बहुत दिन जियोगे वो कुछ और भी कहते है,मगर मुझे याद नहीं है..मैं ये सोचने लगता हूँ कि मैं इतना दिन जी के क्या करूँगा ये सोचकर में अत्यचारी हो जाता हूँ जिससे मेरी मृत्यु करीब आ जाये,मेरे इस अत्याचार के कारण वो मूर्ति(देवता) प्रगट होते है और मुझे मारते है,तबतक कोई उनसे प्राथना करता है,और मेरे जीवन की भी

ख मांगता है,मुझे मालूम नही,मैं बचता हूँ कि नहीं मगर मेरा शरीर दिव्य स्वरूप का हो जाता है,और मैं उनसे कहता हूं कि मैंने सुना है कि देवता के हाथों से मरने से मोक्ष की प्राप्ति होती है,इसलिए मैंने ऐसा किया..।।

मैंने सीखा- किसी के द्वारा जो भी बोला जाए, उसे अच्छी तरह सुना जाए,अन्यथा उसका परिणाम गलत हो सकता है..।

दूसरा दृश्य-
दूसरे दृश्य में देखता हूँ कि मेरी फैमली किसी झंझट में फंस गई है..और मैं उसे बचाने का प्रयास करता हूँ..और उसमें सफल भी हो जाता हूँ..।
मैंने सीखा- अगर आपके पास धैर्य और साहस हो तो किसी भी परिस्थितियों से निपटा जा सकता है..

तीसरा दृश्य- 
इस दृश्य में देखता हूँ कि कोई फंक्शन हो रहा है और उसमें कई चीजें बन रही है..देखता हूँ कि कोई चीज बन रही है,जिसे तेल में तला जा रहा है,मगर उसके साथ न खाए जाने वाली गंदगी भी साथ मे तली जा रही है..मैं उस रॉ मैटेरियल को टेस्ट करता हूँ तो मुझे शंका होता है,मैं ये जानने की कोशिस करता हूँ कि ये रॉ मटेरियल कंहा से आ रहा है,तो देखता हूँ जंहा से वो समान आ रहे है वंहा कुंच गंदगियां भी है जो साथ मे आ जा रहा है,मैं उन गंदगियों को अलग करने लगता हूँ,और कोशिस करता हूँ कि ये खबर आगे न जाये क्योंकि अगर ये खबर आगे जाएगी तो परिस्थितियां बिगड़ सकती है,वो गंदगियां ऐसी नही है,जिसे खाने से नुकसान हो,मगर उससे घृणा सबको हो सकता है..।इसिलिय मैं किसी को कुछ नही बताता..।
मैंने सीखा- कभी-कभी गलतियों को अनदेखा करने से और उसे सुधारने से बहुत बड़े मुसीबत को टाला जा सकता है..।
इसी दृश्य में देखता हूँ कि एक लंबा पाइप नुमा स्ट्रक्चर है जिसमें लोग ऊपर जाते है,और नीचे जाते है..उस पाइप नुमा सरंचना में देखता हूँ कि कुछ लोग उल्टे लटके हुए है वो इतने ऊंचे लटके हुए है की अगर गिरे तो शायद मृत्यु तक हो सकता है..।
नीचे से कोई आवाज देता है पाँव को फसा कर नीचे आ जाओ..हमलोग भी ऐसे ही आये है,उनलोगों को होंसला मिलता है,और शायद वो लोग नीचे आ जाते है..

मैंने सीखा- जब आपके पास कोई समाधान न हो तो दूसरे के द्वारा बताए हुए समाधान को मानना चाहिए..।

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

दादी माँ और पितृपक्ष का महीना...

पितृपक्ष का महीना मेरे लिए खास है..क्योंकि इस महीने से कई यादें जुड़े हुए है..खासकर दादी माँ से..।
ये महीना खास इसलिय है कि,इस महीने में दही-चूड़ा कुछ ज्यादा ही खाने को मिलता था,वो भी दादी माँ के हाथों से..।
दादी माँ चाहती थी कितना खिला दु इन बच्चों को..
शायद हम जितना खाते थे,उतना उन्हें आनंद आता था..।।


पितृपक्ष शुरू होने से पहले धान का चूड़ा कुटाया जाता था,उस चुड़े की सोंधी खुश्बू अभी भी नाक में आ रहा है..जबतक में गाँव मे था तबतक में ही चूड़ा कुटवाता था,उसके बाद पापा कुटवाया करते थे..मगर इस बार दादीमाँ है ही नही..😢।
उसके बाद तिथ के हिसाब से ब्राह्मण खिलाया जाता था..ब्राह्मण को निमंत्रण देने का कार्य पहले बाबा ही करते थे,जब बाबा अस्वस्थ हो गए तो पापा निमंत्रण दिया करते थे..उसके बाद ब्राह्मण को बीजो(बुलाने) के लिए मैं जाता था..उसके बाद जब ब्राह्मण आते तो उन्हें खिलाने का काम अक्सरहाँ दादी माँ ही करती थी..और दादी माँ साथ ही गाँव-घर की बात करती थी उन ब्राह्मणों से..।जब ब्राह्मण खा कर चले जाते,तब सब बच्चों को दादी माँ बैठा कर खिलाती..उसके बाद घर के अन्य लोग खाते..।

इस पवित्र महीने में जितिया पावन(इसमें माता अपने संतान की दीर्घायु के लिए उपवास करती है) आता है..।
मेरे बाबा एक फकरा कहा करते थे-
 "जितिया पावन बड़ भारी
  धिया-पुता के ठोक सुतेनउ,
  अपने खेनु भयर थारी.."
दरसल जितिया पावन शुरू होने से पहले ब्रह्ममुहूर्त में ही खाना होता है,खासकर जो उपवास करने वाली महिलाएं होती है उन्हें खाना होता है,तो अकेले महिलाएं खाएंगी,तो कैसा लगेगा इसलिए जो बच्चे होते है उन्हें भी सुबह में उठाया जाता है,और चुरा दही खिलाया जाता था..।

जबतक में गाँव मे रहा या फिर इस अवसर पर गाँव पहुंच जाता तो दादी माँ सब बच्चों को उठाकर खिलाती ही थी..जबतक सब उठ न जाये,सबके पत्ते पर चुरा दही पड़ न जाये तबतक दादी माँ खुद नही खाती थी..।
फिर अगले दिन उपवास समाप्ती के बाद पितृ को तेल-खरी चढ़ाने के बाद दादी माँ सब बच्चों को सिर में तेल लगाती थी..उस तेल को लगाने के बाद कुछ अजीब ही अनुभूति होती थी..क्योंकि जैसा महसूस तब तेल लगाने के बाद होता था,वैसा महसूस फिर कभी नही होता था सर् में तेल लगाने के बाद..वो चिपचिपा बाल को में अभी भी महसूस कर पा रहा हूँ..।

मगर जब में मुम्बई चला आया तब भी दादी माँ फोन पर कहा करती की कायल जितिया छैय चुरा-दही खा लेब..।तेल-खोरी कायल चढतैय..
मगर इसबार ये कहने के लिए..
दादी माँ नहीं है...।

मुझे लगता है..
आप मुझसे दूर नहीं गई है..
बस आपका फोन नहीं आता...
जबतक मैं रहूंगा..
तबतक आप रहेंगी..
मेरे यादों में..
मेरे सांसों में..
लव यू दादी माँ..।।




शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

स्वप्न -कथा..

एक खूबसूरत सपना आज सुबह में देखा,जिसमें से आधा शायद भूल भी गया..
सपने का पहला दृश्य..
कोई फंक्शन हो रहा है,थोड़ी चहल पहल ज्यादा है..
सपने में एक सुंदर लेडी थी जिसने वाइट शर्ट पहना था,जो उसे औरों से बिल्कुल अलग और खूबसूरत बना रहा था..उसके गोद मे एक क्विइट सा बच्चा था,जो किसी के गोद मे नही जा रहा था,मैं उस लेडी के करीब गया और अपना हाथ फैलाया बेबी को लेने के लिए,वो सीधे मेरे गोद मे आ गया सबको आश्चर्य हुआ कि,ये कैसे हुआ..।उसे गोद मे लेने के बाद मानों हृदय शीतल हो गया..।वो बेबी मेरे सीने से इस तरह चिपक गया मानो वो मेरे ही शरीर का अंग हो..।।


(सपने में जो लेडी थी वो कैटरीना कैफ थी..और दो हीरोइन थी😄..शायद ये सपना इसलिए देखा कि उनकी खबरें आजकल चर्चा में थी बॉडी सेमिंग के कारण शायद इस वजह से देखा हो..हां एक और वजह हो सकता है,कभी कैटरीना मेरी फेवरेट हुआ करती थी..)


इस सपने के क्या मायने हो सकते है..??
शायद कोई रेस्पोंसबिलिटी मिलने वाली है..।

सपने का दूसरा दृश्य..
रात का समय है और बारिश हो रही है,चारों और सन्नाटा है,गाड़ियां भी न के बराबर चल रही है,स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी चारों और फैली हुई है..सड़क के किनारे एक झुग्गी सा दुकान है जो खुला हुआ है..मैं उसी दुकान के पास खड़ा हूँ(मालूम नहीं मैं हूँ या कोई और चेहरा मालूम नहीं) सड़क के उस पार से एक लड़की आ रहीं है,जिसे देखकर मैं,उससे मिलने जाता हूँ..हमदोनों सड़क के बीच मे है..वो उदास है..वो दोनों आपस मे कुछ बात करते है,मालूम नहीं क्या बात करते है..वो लड़की कहती है ये शर्ट उतार दो ये मैंने गिफ्ट की थी..लड़का शर्ट उतार देता है..उसके सीने पर एक टेटू है जिसे उसने उस लड़की के लिए बनाया था..।लड़की बोलती है क्या-क्या उतारोगे..ये पेंट भी तो मैने ही दिया था,लड़का गुस्सा में पेंट भी उतार देता है..लड़की रोते हुए वंहा से चली जाती है..।लड़का बीच सड़क पर बेबस होकर बारिश में भींग रहा होता है..।




इस सपने के क्या मायने है..??
मालूम नहीं..
शायद यही मतलब है कि काबिल बनो..अगर काबिल नहीं बनोगे, तो लोग यू ही छोड़ के चले जायेंगे..।

मेरे अंदर एक छोटा सा लेखक है,उसके नजरिया से देखें तो सपने का दूसरा दृश्य उस लड़के के जिंदगी की शुरुआत की कहानी है..सपने के पहले दृश्य में जो लेडी है,शायद वो वही लेडी है,जो उसे उस रात छोड़ के चली जाती है..।मानो कोई सपना नहीं, बल्कि कोई फ़िल्म सपने में देख रहा हो..शायद ये फ़िल्म देखने के वजह से ऐसा हुआ हो..शायद.. क्योंकि अक्सरहाँ हम सपने में वहीं देखते है जो वास्तविक दुनिया मे देखते है..।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

मैं...

बर्बाद होने दो सभी को..
आबाद होने दो सभी को..
जब उन्हें अहसास होगा..
हमतक आएंगे वो सभी..
जो भटक गए हें राह..
जो हो गए हें ग़ुमराह..
कंहा जाएंगे..
और कंहा तक जायेंगे..
अंतोतगत्वा मेरे पास ही आएंगे..।।

मैं ही, वो हूँ..
जिसका तुम्हें तलाश है..।
मगर मुझे पहचान कैसे पाओगे..??
क्योंकि मैं वो नहीं..
जिसका तुम्हें तलाश हैं. ।
मैं वो हूँ..
जिसका सबोको तलाश है..।
मैं तो तुम्हारे सांसों में हूँ..
अपने सांसों के सहारे ही..
मुझतक पहुंच पाओगे..
अन्यथा यू ही भटकते-भटकते..
जिंदगी जाया कर जाओगे..।





मंगलवार, 29 सितंबर 2026

सब्जीवाले अंकल..

क्या हम जो सोचते है..
वैसा होता है क्या..??

चलिये एक वाकया बताता हूँ..जो अभी-अभी मेरे और सब्जी वाले अंकल के बीच हुआ..।
मैं योग क्लास लेकर अपने रूम पर आ रहा था कि..
अचानक मैं सब्जीवाले अंकल के दुकान पर पहुंच गया..जबकि मुझे कुछ लेना नही था..
मुझे देखते ही वो बोल..
जो हम सोचते है..
वो जरूर होता है..।
हम आप ही के बारे में सोच रहे थे..
आंवला लाये थे ..।
मैं मन-ही-मन मुस्कुराया..
और सोचने लगा..।
क्या ये इत्तिफ़ाक़ था..
या फिर..
जो हम सोचते है..
वो जरूर होता है..।।




ये बात उन्हें भी मालूम है..
सिर्फ उन्हें ही नहीं..
पूरे जग को पता है..
मगर इन बातों पे कितनों को विश्वास है कि..
जो हम सोचते है..
वो जरूर होता है..??
इसके लिए दृढ़-इच्छाशक्ति और विश्वास होना चाहिए..
अगर आपके पास है..
तो जरूर..
जो आप सोचेंगे,वैसा ही होगा..।।

कुछ लोग..