शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

मैं उनके मैसेज का इंतजार करती रहीं..

मैं उनके मैसेज का इंतजार करती रहीं..
मिनटों तक..
न जाने ये मिनट..
कब घंटो में बदल गए पता ही नहीं चला..
ये घंटें..दिन में बदल गए..
और दिन सप्ताह में..
और सप्ताह महीनों में..।
हां महीनों हो गए..
उनके मैसेज का इंतजार करते हुए..।

हरेक रोज सोचती हूँ..
आज कंही उनका मैसेज न आये..
और कंही वो..
ये ना पूछ ले..
की कैसी हो..??
क्या जबाब दूंगी मैं..।
ये सोच के हर रोज भगवान से प्राथना करती हूं..
उनका कोई मैसेज न आये..।
तो फिर क्यों मैं..
उनके मैसेज का इंतजार करती हूं..??
शायद अपने पापों का पश्चाताप करती हूं..।

हर रोज,हर पहर..
हर शाम,हर रात..
मोबाइल ये सोच के स्क्रोल करती हूं..
कंही कोई आभा ही दिख जाए उनका..
उनके आभा के सहारे ही..
जी लुंगी में..।




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