शनिवार, 10 अक्टूबर 2026

धर्म और बाजार..

जिस तरह से धर्म का बाजारीकरण किया जा रहा है,कंही ऐसा न हो कि बाजार धर्म को लील जाए..ये बुद्ध,महावीर,नानक और कबीर की धरती रही है..जंहा इनलोगों ने पूरी जिंदगी खफा दी धर्म के नाम पर पांखड करने वालों का विरोध करते हुए..
मगर आज धर्म के नाम पर जो हो रहा है उसके खिलाफ कोई बोलने वाला नही है..आखिर कौन बोलेगा..क्योंकि कंही न कंही धर्म के बाजारीकरण से सबका लाभ हो रहा है..।
जो धार्मिक है उन्हें लग रहा है लोग बहुत धार्मिक हो रहे है..
जो अधार्मिक है वो भी मुस्कुरा रहें है..।

आप खुद से पूछिए..
क्या आप धार्मिक है..??
अगर हां..?
तो कैसे..??

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