बुधवार, 31 दिसंबर 2025

गलतियां..

कुछ गलतियां हम अतीत में करते है..
और उसे भूल जाते है..
शायद ये गलतियां..
गलती से गलत हो जाती है..।
और भविष्य में कभी उन गलतियों से मुलाकात होती है..
तो हम मुस्कुराते हुए,
और खुद पर हंसते हुए..
उन गलतियों को सुधारते है..।

कुछ गलतियां गलती से गलत हो जाती है..।


मुझे लगा मेरे पाँव..

मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..
मगर जब मैंने अपने आस-पास देखा..
तो यंहा सब शून्य में झूल रहे है..।
चाहे चाँद हो या हो सितारे..
यंहा सब शून्य से ही संचालित हो रहे है..।
मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..।


बहुत सोचा,बहुत जाना..
तब पता चला.. 
मेरे पाँव जमीं पर क्यों है..??
क्योंकि मेरा खुद का अस्तित्व ही नही है..
मैं इसलिए हूँ, क्योंकि ये पृथ्वी है..।
जिस रोज मैं का भान हो जाएगा..
मैं भी..
मैं हो जाऊंगा..।
और इस शून्य का हिस्सा हो जाऊंगा..
तब मेरे भी पाँव जमीं पर नही होंगे..।

मुझे लगा मेरे पाँव जमीं पर है..

2025 को कैसे याद रखें..

2025 कैसे बीत गया पता ही नही चला...
अगर ये सवाल आपके मन मे भी उठ रहा है..तो..
ये अच्छा संकेत नही है..क्योंकि
आपने ये साल भी यू ही जाया कर लिया..।


अगर हम हरेक पल को,हरेक दिन को अच्छी तरह से जियें तो वो दिन भी साल के बराबर हो जाता है..इसीलिए आनेवाले हरेक पल को जाया नही होने देंगे ये दृढनिश्चय लेकर अगले वर्ष की सुबह की शुरुआत करेंगे..।।

2025 को हम-आप कैसे याद रख सकते है..??
असान है..आसान सवाल पूछकर...
इस साल के आखरी दिन फिर से हम 2025 को जी सकते है..।

चलिए कुछ सवाल खुद से पूछते है...।

आपने इस साल सबसे ज्यादा खुशी और बेफिक्री कब महसूस की..?
 (समय लीजिये..और आंख बंद कर उन लम्हों को याद कर कुछ पल जीयें)

किस चीज ने सबसे ज्यादा ऊर्जा दी और किस चीज ने उसे खत्म किया..?

कौन सी चीज इस साल असंभव लग रहा था,लेकिन आपने कर दिखाया..?

कौन सी ऐसी आदत है,जिसे लगातार करते रहे तो जीवन में अच्छे और बुरे बदलाव आएंगे..।(किन आदतों को छोड़ना चाहेंगे और किन आदतों को आगे भी लेकर चलेंगे)

ऐसी कौन सी चीज नियंत्रित करने की कोशिश की,जो वास्तव में आपके नियंत्रण से बाहर था।(जो चीज हमारे नियंत्रण में नही है,उसे नियंत्रण करने की कोशिश भी नही करना चाहिए,नही तो जिंदगी में तनाव बढ़ता है।)

क्या किसी को माफ करना या किसी से माफी मांगना जरूरी है..??
(मनोवैज्ञानिक के अनुसार किसी के प्रति गुस्सा,नाराजगी पकड़े रहने से मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा खत्म होती है।माफ करने से या फिर माफी मांगने से जिंदगी हल्की और संत्युष्ट महसूस करती है।)अगर किसी से माफी मांगना बाकी रह गया हो,या फिर माफ करना तो जल्दी कीजिये..।

और आखरी बात..जो रिश्ते अनमोल है,उन्हें 2025 में कितनी बार फोन किया..??
अगले साल उन्हें और ज्यादा कॉल कैसे कर सकते है..।।
(इस मामले में मेरी स्थिति भी दयनीय है😢,मैं 2026 में अपने चाहने वालों को कम से कम सप्ताह में एक दिन तो जरूर कॉल करूँगा।)

ये कुछ सवाल खुद से पूछकर 2025 को अलविदा कह सकते है..
और पूरे जोश और उल्लास के साथ 2026 का स्वागत कर सकते है..।।

क्योंकि प्रकृति की नियति ही है आगे बढ़ना..इसलिए अपने अतीत को भूलकर अपने अतीत से सीखकर अपने भविष्य का स्वागत करें..।।

मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

सबको अपनी कहानी..

सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।
भले ही वक़्त अभी साथ न दे..
भले ही अभी कलम साथ न दे..
या फिर भले ही किस्मत अभी साथ ना दे..।
कहानी तो मन-मस्तिष्क में रच चुकी है..
बस उसे धरातल पल कलम और कागज से उकेरना है..।
सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।


चाहे बार-बार जिंदगी में रुकावट क्यों न आये..
किसी-न-किसी बार रुकावट को पार कर ही जाऊंगा..।
पार करने को मनुष्य से अब रह ही, क्या गया है..
चाहे हिमालय की चोटी हो,या हो समुन्द्र की गहराई..
या फिर पृथ्वी से दूर चंद्र और मंगल ही क्यों न हो..
अब कोई अछूता न रहा है...।
बस जरूरत है एक दृढनिश्चय इच्छा शक्ति की..
और कठिन परिश्रम की..।
कहानी खुद-खुद बन जाएगी..
और वक़्त,कलम,कागज एकसाथ आकर.. 
नई कहानियां बुन देंगी..।
सबको अपनी कहानी खुद लिखनी होती है.
मुझे भी अपनी कहानी खुद लिखनी है..।



रविवार, 28 दिसंबर 2025

फर्क ये नही पड़ता...

फर्क ये नही पड़ता है, कि,आप है कौन..?
फर्क ये पड़ता है कि,आप है कौन..

फर्क ये नही पड़ता कि आप कंहा से आये..
फर्क ये पड़ता है कि आप है कंहा..

फर्क ये नही पड़ता कि आपने कैसी जिंदगी जिया..
फर्क ये पड़ता है कि आप कैसी जिंदगी जी रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,आप कितनी दफा गिरे..
फर्क ये पड़ता है कि आप गिर के उठे की नही..

फर्क ये नही पड़ता कि लोग क्या सोच रहे है..
फर्क ये पड़ता है कि अब लोग क्या सोच रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,आप क्या सोच रहे है..
फर्क ये पड़ता है कि आप सच मे सोच रहे है..।

फर्क ये नही पड़ता कि,दुनिया कैसी है..
फर्क ये पड़ता है कि, दुनिया ऐसी है.।

फर्क ये नही पड़ता है कि,आप है कौन..
फर्क ये पड़ता है कि,आप है कौन..।


गुरुवार, 25 दिसंबर 2025

प्यार की पांति..मैं जब तुम्हें..

मैं जब तुम्हें, कुछ लिखता हूँ,तो..
मेरे हाथ थरथराते है..
और हृदय घबराता है..।
इसलिय नही की..
मैं गलत कर रहा हूँ..।
इसलिए कि..
कंही मेरी लेखनी, तुम्हें पसंद न आये..।

मैं जब तुम्हें कुछ कहना चाहता हूं..
तो मेरे लब थरथराते है,
और मेरा शरीर कंपकपाता है..।
इसलिए नही की मैं तुमसे डरता हूँ,
इसलिय की..
तुम मुझे देख के असहज न हो जाओ..।

मैं जब तुम्हारे करीब आता हूँ..
तो खुद को निर्जीव पाता हूँ..
इसलिय नही की..
मेरी सांसें रुक जाती है..।
इसलिय की..
मेरी सांसे तुमसे चल रही होती है..।

मैं जब तुम्हें..



बुधवार, 24 दिसंबर 2025

खालीपन..

मैं जब-जब खुद को खाली महसूस करता हूँ..

तो मैं,तुम्हारे करीब आ जाता हूँ..

खुद को भरने के लिए..।


तुममें समाहित अथाह ऊर्जा में से..

कुछ ऊर्जा लेकर..

फिर से खुद को ऊर्जावान बनाने के लिए..

मैं तेरे करीब आ जाता हूँ..।


मैं जब भी खुद को खाली महसूस करता हूँ..

मैं तुम्हारे करीब आ जाता हूँ...।




प्यार की पांति..मैं तुमसे

मैं तुमसे मिलना चाहती हूं..
मगर कैसे..
तुम समुंद्र हो तो मैं नदी हूँ..
तुम वटवृक्ष हो तो मैं खजूर हूँ..
तुम गंगा की मैदान हो,तो मैं थार का रेगिस्तान हूँ..।
भला मैं तुमसे कैसे मिल सकता हूँ..।

मैं कुछ नही जानती..
मैं सिर्फ तुमसे मिलना चाहती हूँ..।।

मगर कैसे..??
कैसे समझाऊ तुम्हें..
तुम्हारी सुबह की शुरुआत सूर्य की मीठी तपिश से शुरू होती है,
और मेरी सुबह की शुरुआत,सूर्य की लालिमा की मासूमियत के साथ..।
तुम्हारी रात जब होने को होती है,तो मेरी सुबह होने को होता है..।
तुम्हें अपने चाँद-सितारे को देखने को लाखों खर्च करने होते है,और मेरे चाँद- सितारे यू ही आसमाँ में भटकते मिल जाते है..।।
तुम चलती हो अपने दस हज़ार स्टेप पूरा करने को,
और मैं चलता हूँ,अपने लक्ष्य को पाने को..।
अब तुम्हीं बताओ..
मैं भला कैसे...
तुमसे मिल सकता हूँ..।



क्या सोच रहे हो तुम..

क्या सोच रहे हो तुम..??
यही सोच रहा हूँ कि..
क्या सोच रहा हूँ मैं..।

सच कहूं तो..
कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... 
मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ..
यही सोच-सोच कर..
कुछ तो सोच रहा हूँ मैं..।

क्या सोच रहा हूँ..
अब मत ये पूछना..
क्योंकि.. 
यही सवाल तो मैं खुद से..
वर्षों से पूछता आ रहा हूँ की..
क्या सोच रहा हूँ मैं..??

क्या सोच रहा हूँ मैं..??
या फिर क्या खोज रहा हूँ मैं..??
जैसे कस्तूरी मृग भटकता है..
वैसे ही शायद भटक रहा हूँ मैं..।
बस मालूम नही क्यों भटक रहा हूँ मैं..
शायद यही सोच-सोच कर..
कुछ तो सोच रहा हूँ मैं..।।

शायद उस "मैं" के बारे में ही सोच रहा हूँ मैं..
जिस 'मैं" का भान नही है..मुझको..।

जिस मैं से ये ब्रह्मांड है..
वो "मैं",
मैं कैसे हो सकता हूँ..??
शायद यही सोच-सोचकर
कुछ तो सोच रहा हूँ मैं..।।



प्यार की पांति..उसने कहा..

उसने कहा..
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।
कबतक यू ही..
खुद से मुँह फेरते रहोगे..
कबतक यू ही सबसे मुँह फेरते रहोगे..।

उस काबिल तो बनो..
जिससे अपना मुँह,
मुझको दिखा तो सको..।

उसने कहा..
सिर्फ तुम ही नही गिरे हो..
हरेक रोज कई गिरते है..।
मगर तुम उन जैसा तो न बनो..
जो गिर के उठ न सके..।
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
कबतक जिंदगी यू ही अकेले काटते रहोगे..
कबतक यू ही सबसे मुँह फेरते रहोगे..
कंही ऐसा न हो..
की ये एकांकीपन तुमसे ही मुँह फेरने लगे..।
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
मैं भी..भला कबतक तुम्हें झकझोरता रहूंगा..
एकदिन मैं भी कंही थक जाऊंगा..
तो फिर मेरा क्या होगा..??
मेरे लिए ही सही..
काबिल तो बनो..।

उसने कहा..
क्या कहा..??
उसने कहा..
बहुत कुछ कहा..
मगर मैं,नासमझ..
कुछ समझ न पाया..
उसने कहा..
क्या कहा..??


मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

विनोद कुमार शुक्ल

कुछ दिन पहले ही तो आपको पढ़ा था,
कुछ दिन पहले ही तो आपको सुना था..।
किसको पता था की, 
आप यू ही छोड़ के चले जाओगे..।
शायद आपका मकसद पूरा हो गया..
हिंदी साहित्य का फिर से पुनरुत्थान जो आपके द्वारा हो गया..।।


आप आने वाले नई पीढ़ियों के लिए प्रकाशस्तंभ थे..
आपका यू ही छोड़ के चले जाना..
न जाने कितने लोगों के लिए असहनीय है..।।

मगर क्या करें..
जाना तो सबको है ही..तो चल दिये..।
वैसे कई हिंदी साहित्य के पुरोधा को पीछे छोड़ दिये है..
अब नई पीढ़ी..
अपने अनुसार अपनी कहानियां लिखें,पढें और सुने..
हम तो पुराना हो चुके थे,
इसलिए भी चल दिये..।

सच कहूं..
तो पहले शरीर साथ नही दे रहा था..
कुछ दिनों से तो, हाथ भी साथ नही दे रहा था..
कलम पकड़ के कागज पे कुछ उकेड़ नही पा रहा था..
अब तुम्हीं बताओ..
बिना कागज और कलम के, 
कैसे जिंदगी बिताऊँ..??
इसीलिए..
कागज की नाव बनाकर
कलम की पतवार बनाकर..
नोकर की कमीज,पहनकर..
दीवार में एक खिड़की थी,को यादकर में बह चला..
उससे मिलने जिससे सबको मिलना है एक दिन..।








सोमवार, 22 दिसंबर 2025

मैं जब भी..

मैं जब ही इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम मुझे हरेक बार ऊर्जावान बना देते हो..
मेरे चेहरे से उदासी हटा कर,ताजगी भर देते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार...
हताशाओं और निराशाओं से भरी जिंदगी को,
दलदल से निकाल कर...
एक नए मुकाम पे खड़ा कर देते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार..
मेरे मुरझाये हुए चेहरे पे मुस्कान बिखेर जाते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..
तुम हरेक बार...
मुझे नए जिंदगी से रु-ब-रु करवाते हो..।

मैं जब भी इन राहों से गुजरता हूँ..


रविवार, 21 दिसंबर 2025

विश्व ध्यान दिवस..

ध्यान से तो हम सब अवगत होंगें.. मगर "विश्व ध्यान दिवस" से नही क्योंकि पिछले(2024) साल ही UNO(सयुंक्त राष्ट्र संघ) द्वारा इसे मनाया जाना शुरू किया गया..।

21 तारीख का दिन क्यों चुना गया..??


आखिर क्यों UNO ने इसे मनाना शुरू किया..?
क्योंकि सस्टेनेबल गोल-3 को हासिल करने में ध्यान अहम रोल अदा करता है,इसे बच्चे से बूढ़े और हरेक वर्ग के लोग करके, इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते है..।
(कुल 17 सस्टेनेबल गोल है,जिसमें "स्वस्थ शरीर और कल्याण" तीसरे नंबर का गोल है,ये 17 SDG(सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल) 2030 तक हासिल करना है।)



ध्यान क्या है..??
हममें से शायद ही कोई होगा जो ध्यान शब्द से परिचित नही होगा..यंहा तक कि सबको ये भी मालूम होगा कि ध्यान कैसे करना है..।
मगर ध्यान क्या है, इसका जबाब देने में सब सहज नही होंगे..।


महर्षि पतंजलि के अनुसार ध्यान -
"तत्र प्रत्ययैयकतानात ध्यानम।"
अर्थात जंहा चित्त की वृत्ति एक ही विषय मे निरंतर प्रवाहित होता रहता है,वही ध्यान है..।
साधारण शब्दों में कहें तो- आप जो कर रहें है उसमें अपना 100% देना ही ध्यान है..।
कितना सरल है...।

मगर जब भी हम ध्यान शब्द सुनते है तो..हमारे सामने आंख बंद कर बैठे एक छवि उभरती है..हमें लगता है, यही ध्यान की प्रक्रिया है..।जो कि सही है,मगर ये सबसे सरल और कठिन प्रक्रिया है..।।

आज के समय मे हम सब कुछ-न-कुछ कर रहे है,मगर हम में से कितने लोग 100% समर्पण के साथ अपना कार्य कर रहे है..??हम कोई भी कार्य 100% डेडिकेशन के साथ नही करते..जिस समय हम 100% डेडिकेशन के साथ कार्य करते है,उसी समय ध्यान शुरू हो जाता है..।।

सफल लोगों का क्या राज है..??
यही की वो अपने कार्य को 100% डेडिकेशन के साथ करते है..और सफल व्यक्ति के फेहरिस्त में आ जाते है..।।

आज के समय मे ध्यान बहुत जरूरी हो गया है क्योंकि हम किसी भी कार्य को एकाग्रता से नही कर रहे है..2015 के माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प के एक अध्ययन के अनुसार- 2000 ई तक मनुष्य की एकाग्रता शक्ति 20 सेकंड था, मगर जब से मोबाइल क्रांति की शुरुआत हुई और सोशल मीडिया का उद्भव हुआ तब से मनुष्य की एकाग्रता शक्ति घटती चली गई और ये अब 8 सेकंड से कम हो गया है..।।

श्रीमदभगवदगीता में श्रीकृष्ण के अनुसार ध्यान में क्या करना चाहिए -

"योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः।"
योगी को एकांत स्थान में बैठकर निरंतर अपने मन को परमात्मा में लगाना चाहिए..।

उपनिषदों के अनुसार ध्यान करने से क्या होता है..??

 "आत्मानं रथिनम विद्धि शरीरं रथमेव तू।"
ध्यान के द्वारा इन्द्रियों और मन को नियंत्रित होने से आत्मसाक्षात्कार होता है..।


आधुनिक शोध के अनुसार ध्यान करने से क्या होता है..??
आधुनिक न्यूरोसाइंस, मनोविज्ञान और मेडिकल रिसर्च में पाया गया है कि शरीर,मष्तिष्क और मन पर ध्यान का गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है..

◆ ध्यान का मस्तिष्क पर प्रभाव-
ब्रेन वेव्स(अल्फा,थीटा) संतुलित होता है,जिससे मानसिक शांति बढ़ती है।
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स सक्रिय होता है,जिससे निर्णय क्षमता और एकाग्रता बढ़ता है।
एमिगडाला(तनाव केंद्र) की सक्रियता कम होती है,जिससे भय और चिंता घटती है।
ग्रे मैटर की मात्रा बढ़ती है,जिससे स्मरण शक्ति बढ़ती है..।


ध्यान का हृदय और रक्तचाप पर प्रभाव-
ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है।
हृदय गति संतुलित होता है।
हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।


ध्यान का प्रतिरक्षा तंत्र पर प्रभाव-
शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है।
सूजन कम होता है।
बीमारियों से लड़ने का क्षमता बढ़ती है।


ध्यान का तनाव और चिंता पर प्रभाव-
कार्टिसोल हॉर्मोन(तनाव हॉर्मोन) का स्तर घटता है।
एंग्जायटी, डिप्रेशन और मानसिक थकान में कमी आती है।
भावनात्मक संतुलन विकसित होता है।


ध्यान का एकाग्रता और स्मरण शक्ति पर प्रभाव-
ध्यान से अटेंशन स्पेन बढ़ता है।
•सीखने की क्षमता और रचनात्मकता में वृद्धि होता है।

ध्यान का व्यक्तित्व पर प्रभाव-
धैर्य,करुणा और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है।
नकारात्मक भावनाओं में कमी आता है।
सकारत्मक सोच बढ़ता है..।


ध्यान हमारे जिंदगी के हरेक पहलू में सकारात्मक बदलाव लाता है..
इसलिए इस अन्तर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस के अवसर पर,ध्यान को अपने जिंदगी में अपनाकर सिर्फ अपना ही नही बल्कि दूसरों के भी जिंदगी में हम बदलाव ला सकते है..😊।

शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

शाम से सुबह..

शाम से सुबह..
और सुबह से शाम..
ये सिलसिला न जाने कब से चला आ रहा है..
मगर हम अब भी बेहोश है..।
और दिन से रात..
और रात से दिन..
का रट लगाए हुए है..।


जब उस छोटे से पिंड में अनहद नाद फूटा होगा..
तब न दिन रहा होगा,न रात हुआ होगा..
अगर हुआ होगा..
तो धुंधली सी शाम या फिर धुंध से छनकर आती हुई सुबह की रोशनी..।
ये सिलसिला न जाने कितने साल हजार साल चला होगा..
एक शाम को रात होने में..
या फिर एक सुबह को दिन होने में कितना लंबा सफर तय करना पड़ा होगा..।


ये शाम सबको अपने में समेट रही है..
और सुबह, सबको अपने हिस्से की रोशनी दे रही है..।

ये शाम है, साधना का..
और ये सुबह है,आराधना का..
इसे यू ही जाया न होने दे..।।

(माफ कीजियेगा..ये आपको शायद समझ में न आये..अगर आपको ब्रह्मांड की निर्मण की प्रक्रिया मालूम हो तो आपको जरूर समझ मे आएगा😊 एक बार बिग-बैंग थ्योरी जरूर पढ़ लीजियेगा)




गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

सब संघर्ष से जूझ रहे है..

हमें लगता है संघर्ष सिर्फ हमारे ही जिंदगी मैं है..
घर से बाहर निकलिए आपसे भी ज्यादा लोग संघर्ष कर रहे है..
कोई कुछ सांस के लिए तो कोई कुछ पल के लिए संघर्ष कर रहे है..
और हम घर में बैठकर सोच रहे है कि संघर्ष सिर्फ हमारे ही जिंदगी में है..


WHO के अनुसार प्रत्येक मिनट 105 लोग रोग से जूझते हुए एक-एक सांस के लिए तड़प के मरते है,और प्रत्येक घंटे 6300 लोग.और प्रत्येक दिन 1.5 लाख लोग..।
और हम यू ही..अपना मिनट,घंटा और दिन जाया कर रहे है...।

क्या आपको पता है..विश्व मे कितने दिव्यांग लोग है..??
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार पूरे विश्व मे 130 करोड़ लोग दिव्यांग है..यानी विश्व की 16%आबादी दिव्यांग है..।।
आशा करता हूँ आप उनमें से नही होंगे...।



क्या आपको पता है इनके जीवन मे किस तरह की समस्या आती है..??
शायद आपको पता नही होगा..
क्योंकि आप उनके जिंदगी से 2-4 नही होते है..।
उन्हें पारिवारिक,सामाजिक,आर्थिक हरेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है..
मगर..उनमें से कुछ ऐसे लोग होते है जो अपनी विकलांगता को अपनी वैसाखी बना कर जिंदगी के हरेक सपनों को पूरा करते है..और अपनी विकलांगता को मात देते है..।।

मगर आज सबसे ज्यादा मानसिक रोगग्रस्त आज की युवा पीढ़ी है..
जो देखने मे तो पूर्ण स्वस्थ है..मगर वो मानसिक रूप से कमजोर है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि उसे पता ही नही है कि उसे क्या करना है..?
अगर कुछ कर रहा है तो उसे अहसास ही नही है कि मैं जो कर रहा हूँ वो सही है या गलत..??
सच कहूं तो उसे इन सब का अहसास ही नही हो रहा है..
पता है क्यों..??

क्योंकि आज की युवा पीढ़ी अपना समय तो..यू ही जाया कर रही है..
ILO(इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन) के 2024 के रिपोर्ट के अनुसार 80% भारतीय युवा बेरोजगार है(MoSPI भारत सरकार के 2025 के रिपोर्ट के अनुसार 4.7%)
पोर्न हब के अनुसार 40% युवा पोर्न एडिक्टेड है..
40% से ज्यादा युवा सोशल मीडिया एडिक्टेड है..
35% से ज्यादा युवा जंक फूड एडिक्टेड है..
60% से ज्यादा युवा डिप्रेशन से ग्रस्त है..



मगर उन्हें इन सबसे फर्क नही पड़ता,क्योंकि उन्हें इन सब चीजों से डोपामिन मिल रहा है,और मस्त जिंदगी जी रहे है..
क्योंकि इस पीढ़ी को किसी चीज के लिए संघर्ष नही करना पड़ रहा है..
न पढ़ने के लिए,न खेलने के लिए,न खाने के लिए,न कहीं जाने के लिए..
क्योंकि एक क्लिक पे सबकुछ उपलब्ध है..।

मगर एक चीज जो उपलब्ध नही है..वो आइडेंटिटी...
उनकी जो भी आइडेंटिटी है वो आभाषी(virtual) है,इसिलिय सबकुछ होने के बाद भी वो अकेले है..क्योंकि उनकी अपनी स्थायी पहचान नही है..।
उनके पड़ोसी भी उन्हें अच्छी तरह से नही जानते..
क्योंकि आज के युवा ने अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली है..
जो शुरुआत में तो अच्छा होता है..मगर ज्यों-ज्यों समय बीतता है..
तो संघर्ष शुरू होता है..और वो इसे समझ नही पाते..जिस कारण वो एक दलदल से निकल कर दूसरे दलदल में फंसते जाएंगे..
और उनके इस दलदल में फंसने के कारण कुछ मुट्ठीभर लोग इसका फायदा उठाएंगे..या कहें तो उठा रहे है..।
आपके आसपास वो सबकुछ है जिससे आप कुछपल के लिए वास्तविक दुनिया से निकलकर आभासी दुनिया मे जा सकते है..
मगर फिर वास्तविक दुनिया मे ही आना पड़ेगा..।
मगर कुछ लोग इस मकड़जाल से बाहर नही निकल पाते जिस कारण प्रत्येक दिन भारत मे ~500 के आसपास लोग आत्महत्या करते है..और ये आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है,जो चिंताजनक है..।।
इसका कारण क्या है..??
लक्ष्यविहीन जिंदगी..और आभाषी जिंदगी से निकलने के बाद वास्तविक जिंदगी का सामना करने में असमर्थता..।।

मगर इससे निकलना बहुत आसान है...
बस आपको अपना पहला कदम घर से बाहर निकालना होगा..।
जब आप वास्तविक जिंदगी में कदम रखेंगे तब आपको अहसास होगा..
आपका संघर्ष तो कुछ भी नही है..
यंहा तो लोग एक सांस,एक पल,1₹ तक के लिए संघर्ष कर रहें है..।।

घर से बाहर तो निकलिए...
आपके हरेक समस्या का समाधान, आपके घर के बाहर इंतजार कर रहा है..।।

संघर्ष तो जिंदगी का वैशाखी है जो जीना सिखाता है..
संघर्ष तो जिंदगी का रंग है, जो जिंदगी में रंग भरता है..
संघर्ष तो वो हमसफ़र है, जो जिंदगी को खुशनुमा बनाता है..
इसीलिए जिंदगी में जब भी संघर्ष आये,तो उसे सहस्र स्वीकार करें..।।

मालूम नही क्यों..

मालूम नही क्यों..
आपकी कमी खल रही है..।
मालूम नही क्यों..
आपकी याद आ रही है..।
मालूम नही क्यों..
शायद मैं स्वार्थी हूँ...
इसीलिए शायद में आपको याद कर रहा हूँ..।
शायद में असहाय हूँ, 
इसीलिए शायद आपको याद कर रहा हूँ..।
सच कहूं तो..
मालूम नही क्यों..
मैं आपको याद कर रहा हूँ..।।
शायद उस जंहा से भी आप मुझे देख रही है..
और ढेर सारा प्यार मुझपे बरसा रही है..।।
मालूम नही क्यों..
लव यू दादी माँ..।।


धुंए से आग...

हममें से अक्सरहाँ लोगों को, शिकायत रहता है कि...
लोग मेरी सुनते नही,मुझे समझते नही या फिर लोग मुझसे दूर भागते है..??
कभी सोचा है आखिर क्यों..??

हममें से अक्सरहाँ लोगों ने ठंड में अलाव(आग) में हाथ सेका होगा
मगर क्या आपने एक चीज गौर किया है..
जब आग सुलगाई जाती है,तब उसमें से ढेर सारा धुंआ निकलता है,जब धुंआ निकल रहा होता है,तब उस अलाव(आग) के पास कोई नही जाता..ज्योहीं आग पकड़ लेती है, तो उस अलाव को सभी चारों और से घेर कर हाथ सेंकते है..।।


जीवन का भी यही दस्तूर है..।
जब आप संघर्ष कर रहे होते है तब आप उस अलाव की तरह होते है जो सिर्फ धुंआ ही फैला रहा होता है..
और ज्योहीं आप सफल होते है,त्योंही आप उस अलाव की तरह हो जाते है,जिसे सभी चारों ओर से घेरे होते है..।।

आप अपने जीवन में जब भी हताश और निराश हो तो उस धुँएदार अलाव को याद करें..आखिर कभी न कभी तो अलाव का धुआं खत्म तो होगा ही..
जो दूर भाग रहे थे वो खुद-व-खुद बिन बुलाए ही करीब आयेंगे..।।
इसीलिए हताश मत हो..
धुंआ निकल रहा है तो,आग पकडेगा ही...।।

आपबीती..

"ये जरूरी नही की आप आगे है,तो आप आगे ही रहेंगे या पीछे है,तो पीछे ही रहेंगे..।"


 मैं रोज सुबह मढ़ से जेटी लेकर वर्सोवा जाता हूँ..ये कई बार हुआ है,मगर इस बार ये घटना बहुत कुछ सीखा गया..।
अक्सरहाँ में जेटी से जाता हूँ तो किनारे पे खड़ा या बैठ जाता हूँ,जिससे जल्दी उतरकर बाहर जा सकू..
मगर आज उल्टा हुआ,जेटी ने दूसरा किनारा स्टैंड पे लगा दिया..
जिससे जो पीछे थे वो आगे हो गए,और जो आगे थे वो पीछे हो गए..।।

इस घटना ने मेरी उदासी को बहुत हद तक दूर कर दिया..।
और एक नई ऊर्जा का संचार मेरे अंदर किया..।
जिंदगी कभी-कभी बिना अपेक्षा के वो सब दे देगी जिसका आपको उम्मीद भी नही है..
और जिंदगी आपको कभी वो भी नही देगी जिसका आप अपेक्षा कर रहे है..।।
इसलिए उदास मत हो..
इस नायाब प्रकृति के पास ढेर सारे जरिये है..अर्श से फर्श पर पहुचाने का और फर्श से अर्श पर पहुँचाने का..।।

इसलिए बस देखता जा..
क्योंकि जो चीज हमारे हाथ मे है ही नही उसके लिए परेशान होने से क्या मिलेगा..

मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

आप अपना हीरो खुद है..

आप अपना हीरो खुद है,
अगर नही है,
तो बनने की कोशिस कीजिये..
सिर्फ कोशिस नही बल्कि..
आप जो चाहते है,
वो बनिये..
क्योंकि आप ही अपना हीरो है..।

आप जिसे अपना हीरो(आइडियल) मान रहे है,वो आपके कभी आदर्श हो ही नही सकता,सिर्फ वो ही नही,बल्कि कोई नही..
क्योंकि उनका परिस्थिति उनका परवरिश आपसे बिल्कुल अलग है..।
इसीलिए उन्हें अपना हीरो मानकर अपना जीवन मत जाया कीजिये,बल्कि उनसे अच्छी चीजें सीखिए,जिससे जिंदगी को सफल बना सके..।।

आप अपना हीरो स्वयं है,
अपने अतीत में झांकिए, आपने कितने ऐसे काम, कई बार किया होगा जो औरों के लिए असंभव लग रहा होगा..
मगर आपने किया..
क्योंकि आप स्वयं हीरो है..।।

अपने अंदर सो चुके हीरो को जगाइए..
और बेहतरीन हीरो बनिये..
क्योंकि ये रंगमंच आपका इंतजार कर रहा है,
इसे और ज्यादा देर इंतजार मत करवाइये..।।

आप अपना हीरो स्वयं बनिये..।।

सोमवार, 15 दिसंबर 2025

मैं कंहा रह गया..

मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..
सब मुझसे आगे निकलते गए..
और मैं सिर्फ देखता रहा..
मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..।

जो मुझसे पीछे थे वो मुझसे आगे निकल गए..
जो मुझसे आगे थे वो मुझसे बहुत आगे निकल गए..
और मैं सिर्फ हाथ बांधे देखता रहा..।।


मुझे ईष्या नही है उनसे..
बल्कि वो मेरे प्रेरणाश्रोत है..।
उनकी सफलताओं से मुझे अपनी गलतियों का भान होता है..
ना जाने फिर भी मैं ऐसा कह रहा हूँ खुद से..।
एक समय आएगा..
जब मैं एक लंबी छलांग लगाऊंगा..
और इन सबसे आगे हो जाऊंगा..।
पहले तो मैं UPSC के सहारे कहा करता था..
अब तो उसका भी सहारा छूट गया..।
आखिर फिर ऐसा कौन सा छलांग लगाऊंगा, 
की मैं..सबसे आगे निकल जाऊंगा..।।

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

दादी माँ..

आजकल आपकी बहुत याद आ रही है..दादी माँ..
न जाने क्यों..??
आपके जाने से कुछ लोग जरूर खुश होंगे..तो वंही कुछ लोगों को आपकी बहुत कमी खल रही होगी..उनमें से मैं भी एक हूँ..।

अगर आप इस जंहा पे होते तो आप ज्यादा खुश होते..
छोटे चाचा ने दिल्ली में जमीन रजिस्ट्री करवाई है..
तो लाल चाचा ने दिल्ली में 2BHK का फ्लैट लिया है..
आपके 3 बेटों में से 2 बेटों ने बहुत बड़ा काम किया है दादी माँ..
आप होते तो सच मे बहुत खुश होते..।।

आप कंही न कंही से तो देख ही रही होंगी..क्योंकि अब आप इस ब्रह्मांड का हिस्सा जो बन गई है..।


गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

प्रकृति हमेशा एक रास्ता बनाती है..

आपके पास हमेशा एक मौका होता है..
चाहे आप कितने भी बुरे दौड़ से क्यों न गुजर रहे हो,आपके पास एक मौका होता है,उस बुरे दौड़ से निकलने का..मगर निकलना तो आपको ही पड़ेगा,वो हौंसला, जुनून,कठिन परिश्रम तो आपको ही करना होगा..।

प्रकृति सबके लिए रास्ता बनाता है..उस रास्ते पर तो हमको ही चलना होगा,
जब हम प्रकृति द्वारा बनाये गए समय पर उस रास्ते से नही चलते तब वो रास्ता कोई काम का नही रह जाता,फिर प्रकृति हमारे लिए दूसरा रास्ता बनाता है,अगर हम फिर से उस रास्ते पे चलने पे असफल हो गए,तो प्रकृति फिर तीसरा रास्ता बनाता है,प्रकृति कभी भी रास्ता बनाना बंद नही करता,वो हमेशा हमारे लिए रास्ता बनाते रहता है..।


भले ही हमारा लक्ष्य कुछ और क्यों न हो..मगर प्रकृति का एक ही लक्ष्य है,की आप सफल हो..और आपके सफलता में प्रकृति हमेशा अपना सहयोग दे रहा होता है..।
जब हमारा तादात्मय प्रकृति से बैठ जाता है,तो वो हमारे अनुरूप ही रास्ता बनाता है,मगर जब हमारा तादात्म्य प्रकृति से नही बैठता है,तो प्रकृति हमेशा वो रास्ता बनाता है,जो हमारे लिए बेहतर हो..।।

मगर हम जैसे कई नक्कारे निक्कमे लोग है,जो न प्रकृति से तादात्म्य बिठा पाते है और न ही प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे चलते है..।
आखिर क्यों..??
क्या हम खुद के लिए और दूसरे के लिए बोझ बनना चाहते है..।
अगर प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे नही चलना है तो फिर क्यों उस रास्ते पे कदम रखकर उस रास्ते को बेकार कर रहे हो..इससे खुद की जीवन भी बर्बाद कर रहे हो साथ ही प्रकृति की मंशा को भी,मगर जब हम कुछ कदम चल कर मंजिल तक नही पहुंच पाते तो फिर प्रकृति एक नया रास्ता बनाता है,और वो बनाता रहता है,और वो तबतक बनाता रहेगा जबतक की आप उस रास्ते पर चलकर सफल न हो जाये..।।

पूरी प्रकृति आपको सफल होना देखना चाहता है,और वो आपके सफलता के लिए अपनी पूरी सृष्टि की सरंचना को आपके अनुसार ढालता है,फेर-बदल करता है..मगर हमें ये सब नही दिखता..क्योंकि हमने प्रकृति से अपना तादात्म्य बिठा के ही नही रखा है..।।

प्रकृति ने आपको जिस उद्देश्य से भेजा है,वो अपने उदेश्य की पूर्ति के लिए आपके लिए हमेशा रास्ता बनाता रहेगा..
अगर आप उस जगह पर पहुंचने में असफल होते है तो प्रकृति आप जैसे दूसरे को उस जगह पर पहुचायेगा..
आपने गौर किया होगा..अगर आप अपने सपने नही पूरा करते तो कोई और उस सपने को पूरा करता है,और पूरा जंहा उसका गुणगान करता है,फर्क बस इतना है कि आप उस रास्ते पे सही से चले नही,और दूसरा सही से चल कर उस मंजिल तक पहुंचा..।
मगर प्रकृति इतना अन्यायी नही है,वो तबतक आपके लिए रास्ता बनाता रहेगा जबतक की आप अपने मंजिल पर पहुंच न जाये..।।

प्रकृति से जितना  तादात्म्य बिठायेंगे प्रकृति उतना मदद करेगा..अगर प्रकृति से तादात्म्य नही बिठाया तो प्रकृति सिर्फ रास्ता बना कर छोड़ देगी,अगर तादात्म्य बिठाया तो वो सिर्फ रास्ता ही नही बल्कि उस रास्ते पे आपको चलने में सहयोग भी करेगी..।।

आखिर प्रकृति से कैसे तादात्मय बिठाया..??
ये तो मुझे भी नही पता..
मगर मुझे ये पता है कि आखिर क्यों प्रकृति से तादात्म्य नही बैठ रहा है..??
क्योंकि में अपने समय का सही सदुपयोग नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं लक्ष्यविहीन जिंदगी जी रहा हूँ।

इसीलिए प्रकृति से तादात्म्य नही बिठा पा रहा हूँ..
शायद मैं लक्ष्यपरक जिंदगी जियूँ,और अपने समय और ऊर्जा का सही सदुपयोग करू तो प्रकृति स्वयं ही मुझे अपनी और आकर्षित कर लेगी..।।

क्योंकि प्रकृति का एक ही उद्देश्य है,सबको स्वयं में समाहित करके स्वयं जैसा बनाना..
जैसे एक पिता और गुरु का सपना होता है कि उसका पुत्र,शिष्य उससे भी ज्यादा सफल हो,उसी तरह इस प्रकृति की भी इच्छा है कि उसके द्वारा निर्मित इस सृष्टि में उस जैसा भी कोई हो,जो इस सृष्टि के संचालन में सहयोग करें..।।
प्रकृति हमेशा बाहें फैलाये हुए है,मगर कुछ कदम तो स्वयं ही बढ़ाना होगा..।
जिस तरह फूल सुंगंध फैला कर भौंरा को अपनी और आकर्षित करता है..
उसी तरह प्रकृति हमारे लिए रास्ता बना कर हमें अपने बाहों में भरने के लिए हमारा इंतजार कर रही है..जिस तरह भौंरा को स्वयं ही पुष्प के पास जाना होता है,उसी तरह हमें भी स्वयं ही उस रास्ते पे चलना होगा..।।

बस आप एक कदम तो बढ़ाओ,प्रकृति अपनी ऊर्जा से आपको दो कदम और आगे खींच लेगा,क्योंकि आपसे ज्यादा बेशब्री से उसे आपका इंतजार है..।।




शनिवार, 6 दिसंबर 2025

दोसजी..

आज तकलीफ हुई..सिर्फ तकलीफ ही नही, बल्कि रुआंसी भी हो गया मैं..।
मगर मैं तुमसे नाराज नही हूँ मेरे दोस्त..बस थोड़ी सी तकलीफ हुई..
और ये तकलीफ भी पानी के बुलबुले के समान है..।।

मैं क्या समझू..??
व्हाट्सएप का रिप्लाई नही करते,फोन रिसीव नही बल्कि काट देते हो..।।
इतनी तो तुम्हें आजादी है,ही..वैसे भी अब हम में और तुम में समानता कंहा रहा..।
तुम 1 से 2 हो गए..और में अकेला रह गया..😊

ये तो मेरी आपबीती है,जो मैंने सुना दिया..।

मगर तुम जिस दौर से गुजर रहे हो..उसे तुम्हारे सिवा और कौन समझ सकता है..
जंहा तक मैं जानता हूँ,किसी के खालीपन को भरना मुमकिन ही नही है,और ऐसे व्यक्ति का खालीपन भरना तो बड़ा मुश्किल है,जो ताउम्र दूसरे के खालीपन को भरने में सहयोग करता रहा हो..।
तुम्हारे जिंदगी में उनका अहम योगदान है,आज तुम जो हो,वो उनके कारण ही हो,और ऐसे व्यक्ति का ऐसे वक्त साथ छूटना जब तुम जिंदगी के अहम पड़ाव में कदम रख रहे हो..।
मैं समझ सकता हूं.. मगर कुछ कर नही सकता..।।

और ऐसे वक्त चुप रहने का ही मन करता है,किसी से कुछ बात करने का मन नही करता..।।
आशा करता हूँ,जो तुम्हारी जिंदगी में आई है..
वो तुम्हें इन दुःख से उबरने में जरूर सहयोग करेंगी..।।

वैसे भी पत्नी से बड़ा कोई मित्र नही होता..
तुम उन्हें हमेशा पत्नी से ज्यादा मित्र ही समझना,
उनके भावनाओं का सम्मान करना..
क्योंकि तुम्हारी और उनकी परवरिश अलग-अलग माहौल में हुआ है,इसलिए विचारों में मतभेद हो सकता है..
और उन मतभेद को दूर करने के लिए मैत्रीपूर्ण विचार करके मतभेद को दूर करना..।।

और क्या कहूं.. मेरे दोस्त..।

मुझे तुम्हारे कॉल का इंतजार रहेगा..।
तुम अकेले ही थे जिससे कुछ बाते हुआ करता था,जिंदगी के कुछ पन्ने पे,मगर तुम्हें तो एक नई मित्र मिल गई है..।
आशा करता हूँ, तुम्हारी मित्र किसी की कमी नही खलनी देगी..।



मगर मुझे तुम्हारी कमी जरूर खलेगी😊..।।
लव यू दोसजी..।।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

रास्ते..

जब लोगों को आपसे उम्मीद नही होती है,
तब ही खुद से उम्मीद करने का वक़्त होता है..।

जब सारे रास्ते बंद हो जाते है..
तब एक रास्ता खुलता है..
और वो..
वो रास्ता होता है,
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते थे..।
वो रास्ता हमेशा किसी न किसी रूप में आपतक आता है..
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते है..।।


इसीलिए जिंदगी में हताश और निराश मत हो.. ..
धैर्य रखों..
क्योंकि,जो कुछ भी नही है,
वो बहुत कुछ है..
फर्क बस इतना है कि हम समझ नही पाते..।

इन आसमां से भरे तारों से परे भी कुछ है..
इन उफनाती हुई समुद्रं के उसपार भी कुछ है..
सीना ताने खड़े इस पहाड़ के उसपार भी कुछ है..
रेत से भरे मैदान के उसपार भी कुछ है..
इस अंधियारी रात के बाद ही सुबह तो है..
इसलिए हताश मत हो..
जिंदगी के इस चक्र में असफलता के बाद,
 कभी-न-कभी सफलता का चक्र तो है..।

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

मैं क्या से क्या हो गया..

मैं क्या से क्या हो गया..
जब खुद को देखता हूँ,
तो खुद को ही, हीन समझता हूं,
मैं क्या से क्या हो गया..
कंहा मेरे सपने थे..
कंहा मेरे ख्वाब थे..
न अब सपने है,और न ही ख्वाब है..
बस एक हांड-मांस का शरीर है..।
कभी दूसरों के जिंदगी में रंग भरने का सोचा करता था..
आज खुद ही, बदरंग जिंदगी जी रहा हूँ..।

मैं क्या से क्या हो गया..
शायद मैं हुआ नही,होने दिया..
सब कुछ गवाने के बाद ..
अब दूसरों की जिंदगी को गवा रहा हूँ..
आखिर क्यों..??
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं,
दूसरों के जिंदगी पे डाल रहा हूं..
आखिर क्यों..??
मैं क्या से क्या हो गया..
अभी भी वक़्त है..
मुस्कुरा के कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया..।
अभी भी वक़्त है,
रंगीन से बदरंग हुए जिंदगी में रंग भरने का..
अभी भी वक़्त है,
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं को,
रंगीन छावं में तब्दील करने का..
अभी भी वक़्त है..
सीना तानकर,
मुस्कुराते हुए कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया😊...।।




आप भारत के कितने प्रधानमंत्री को जानते है..

हम मनुष्यों की एक खूबी है..
हम अच्छाइयों को लंबे समय तक याद नही रखते जबकि किसी बुराइयों को लंबे समय तक ढोते है..।।

अगर आपसे पुछु..
पिछले सप्ताह आपके साथ क्या-क्या अच्छा हुआ, तो शायद आप नही बता पाएंगे,मगर आपसे पुछु आपके साथ क्या-क्या बुरा हुआ,वो आपको बिल्कुल याद होगा..।।
इसमें हमारी आपकी कोई गलती नही है,दरसल ये आनुवांशिक प्रक्रिया है,कुछ लोग इसे तोड़ने में सफल होते है,और अपने व्यक्तित्व से सबको आश्चर्यचकित करते है..।।

हां हम कंही और थे..
हमारा सवाल क्या था..??
हां, आप बताये भारत में अबतक कितने प्रधानमंत्री हुए है..??
चलिए ये तो गूगल या AI से भी पूछ सकते है..पूछ लीजियेगा मगर..।।

हम ये पूछना चाहते है कि..
आपको भारत के कितने प्रधानमंत्री के नाम पता है..??
और क्यों...??

80% भारतीय सिर्फ 4 प्रधानमंत्री के नाम जानते है..
पहला- पंडित जवाहरलाल नेहरू
दूसरा- लाल बहादुर शास्त्री
तीसरा- इंदिरा गांधी
चौथा- अटल बिहारी बाजपेयी

और वर्तमान में- नरेंद्र मोदी भारत के 14वे प्रधानमंत्री है..।।


तो फिर आखिर क्यों भारत की आम जनता 10 प्रधानमंत्री के नाम से अनभिज्ञ है..??
क्या उन्होंने कोई अच्छा काम नही किया..??
क्या उनका कार्यकाल छोटा था..??
क्या उनका व्यक्तित्व आकर्षक नही था..??

•जंहा तक अच्छे काम की बात है..तो हम उन प्रधानमंत्री को नही भूल सकते जिन्होंने संचार क्रांति की नींव रखी..मगर हम भूल चुके है..
•आज भारत जिस GDP का और इतने बड़े बाजार का दंभ भर है,उसमें उस P.M का अहम योगदान है,जिसने पहली बार भारत के बाजार को पूरे विश्व के लिए खोला..
कुछ लोग इनसे भी जरूर परिचित होंगे..।।

मगर आखिर क्यों..पूरा भारत सिर्फ नेहरू,शास्त्री,इंदिरा और अटल को ही जानता है..??
जरा सोचिए..शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इनके नाम से अनभिज्ञ होगा..?

इन चारों में एक सामान्य बात थी...
इन चारों को युद्ध का सामना करना पड़ा..
और युद्ध की त्रासदी हमारे जेहन में बसी हुई है,जो कभी हट नही सकता,यंहा तक कि आपके जेहन में नही भी है,तो आपके जेहन में किताबों, अखबारों, समाचारों, फिल्मों के माध्यम से आ ही जाएगी...।।

क्योंकि त्रासदी दर्द देती है,और दर्द दूर हो भी जाये न,तो उसका डर सदैव बना रहता है..।।

हम अच्छाइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को याद नही रखते,वंही बुराइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को लंबे समय तक याद रखते है..।

हम लोगों की बुराइयों को तो याद रखते है,मगर उनके अच्छाइयों को भूल जाते है..।।

हां सच में भूल जाते है..।

अच्छा एक सवाल बताये..
भारत में संचार क्रांति की नींव किस प्रधानमंत्री ने रखा...
क्या आपको पता है,भारत के GDP में सर्वाधिक किस सेक्टर का योगदान है..??
सर्विस सेक्टर का..
LPG(liberalization, Privatization, Globalization) लाने का श्रेय किस प्रधानमंत्री को दिया जाता है..।

पता है,इन दो कदमों के कारण ही आज विश्व के अग्रणी देशों में से एक है हम।मगर बहुत कम ही लोग उन दो कदम उठाने वाले प्रधानमंत्री को जानते होंगे..।।



शनिवार, 29 नवंबर 2025

कुछ गलतियां

जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए,
जिसका मलाल ताउम्र होना चाहिए..
अगर कोई गलतियां न हो..
और उसका मुस्कान भरा अफसोस न हो..
तो फिर ये भी कोई जिंदगी है..
इसलिए..
जिंदगी में कुछ गलतियां होना चाहिए..।
जब जिंदगी में अकेलापन सताये..
तो यही गलतियां तो साथ रह जाता है..
और एक नए होंसले के साथ आगे बढ़ने का मुकम्मल राज देता है..

इसलिए जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए..
जिसका मलाल ताउम्र रहें...।।


शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..,
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी ने तो वो सबकुछ दिया..
जिस-जिस के में लायक था..
मगर मैं क्या...???
उस लायक बन पाया..
जिस लायक जिंदगी ने मुझसे अपेक्षा की थी..
तो जबाब है नही..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..
खुद से ही शिकायत है..।
मैं ही काबिल न बन पाया..
अपने कमजोरियों से भागता रहा..
और कमजोरियों के बोझ तले दबता गया..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है...
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी तो अब भी..
हाथ फैलाये हुए है,
मुझे आलीगं करने के लिए..।
मैं ही बेबकूफ हूँ..
इन बेड़ियों को अपना साथी मानकर इससे लिपटा हुआ हूँ,
जबकि ये बेड़ियां सिर्फ जख्म दे रही है..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..


रविवार, 23 नवंबर 2025

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..।
कभी दूसरों के सपनों को पूरे करने का सपना देखा करता था,
आज खुद के भी सपने पूरे नही कर पा रहा हूं..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी अपनों को मुझमें उम्मीद दिखती थी,..
आज सबों ने मुझसे उम्मीद छोड़ दी है..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सबकुछ बदल गया है..
मगर बदला नही है,तो मेरे आदतों और मेरे असफलताओं का सिलसिला..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
न जाने अब भी,
मैं खुद से उम्मीद किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ.. 
मगर क्यों आया हूँ..??
इसके जबाबों का इंतजार किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।।



कभी पूछा है खुद से..

कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम कर क्या रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम जा किधर रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम चाहते क्या हो..
कभी पूछा है खुद से..
आखिर तुम्हारी मंजिल कंहा है...
कभी पूछा है खुद से...

क्यों पूछते डर लगता है..??
कंही सच्चाई से सामना न हो जाये..
क्या करना है,पता नही है,
किधर जाना है,पता नही है,
क्या चाहते है,पता नही है,
मंजिल कंहा है,पता नही है..।
इसीलिए पूछते डर लगता है..।

आखिर इस डर से भला कबतक भागोगे..
कभी तो सामना करना पड़ेगा..
हिम्मत जुटाओ और अपने सवालों का सामना करो..
क्योंकि सवाल में ही हल छुपा हुआ है..।
आखिर कब तक भागते रहोगे,
आखिर कब तक टालते रहोगे..।

जो हो तुम उसे स्वीकार कर..
स्वयं के वास्तविकता को अंगीकार कर..
फिर से खुद को तराशकर..
नव-निर्मित मानव तैयार कर..
अपने असफलताओं के बेड़ियों को तोड़कर..
सफलता के नए सोपान रचकर..
अपने आप को स्वीकार कर..
इस जीवन का उद्धार कर..।।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025

ये उम्मीद ही तो है..

जब किसी को तुमसे उम्मीद न हो..
तो तब तुम खुद से उम्मीद रखो,
कोई रखें या न रखें तुम जरूर खुद से उम्मीद रखों..
ये उम्मीद ही तो है...
जो जीने का हौंसला देता है,
ये उम्मीद ही तो है..
जो असंभव को संभव बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नर को नारायण बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है,
जो दानव को देवता बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नही है,उस से भी साक्षात्कार कराता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो कल का सूरज दिखाता है..
ये उम्मीद ही तो है..

बिना उम्मीद के यंहा, कंहा कुछ है..
उम्मीद की ज्योत तबतक जलाये रखो..
जबतक सांस और धड़कन चल रही है..
क्या पता कब उम्मीद की किरण आये..
और जिंदगी की दिशा बदल दे..।
ये उम्मीद ही तो है.


गुरुवार, 20 नवंबर 2025

मैं हारा नही हूँ..

मैं हारा नही हूँ, ना ही थका हूँ,
मैं तो सिर्फ राह से भटक गया हूँ,
मुझे अब भी उम्मीद है..
कभी तो खुद को सही राह पर लाऊंगा..
और अपनी मंजिल को पा जाऊंगा..
मैं हारा नही हूँ, ना ही थका हूँ...।



शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

चिल्ड्रेन्स डे....

क्या आपको पता है..चिल्ड्रेन्स डे क्यों मनाते है..??
आपको पता ही होगा..।

इस बाल दिवस पर हम ग्वाल-बाल से क्या सीख सकते है..??

1. वर्तमान में जिये...
   पता है आपको.. बच्चों का खुशियों का राज क्या है..??
वो हमेशा वर्तमान में जीते है,खेलते वक़्त खेल पर ध्यान,खाते वक़्त खाने पर ध्यान,सोते वक्त सोने पर ध्यान..।
इसलिए खुश रहना है तो इन बच्चों की तरह वर्तमान में जिये..।
मगर इस आधुनिक युग मे हम उनकी भी दिनचर्या खराब कर रहें है..।

2.बच्चों की तरह हँसिये..
 आपको याद है,आपने आखरी बार दिल खोलकर कब हँसा था..अगर नही हंसे थे तो बच्चों के साथ समय बिताइए दिल खोलकर हंसने का मौका मिलेगा..।
इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम हँसना भी भूल गए है..।

3.बच्चों की तरह दौड़िये..
आपको याद है..आप आखरी बार कब दौड़े थे..
अगर स्वस्थ रहना है,तो बच्चों की तरह दौड़िये..।

4.बच्चों की तरह खाइये..
बच्चें तब ही खाते है,जब उन्हें भूख लगता है और उतना ही खाता है,जितने की भूख रहती है..
और हम आप क्या करते है..पता ही है,पसंद की चीज मिले तो भूख न होने पर भी खा लेते है..इसीलिए तो सीने की जगह पेट आगे निकल जाता है..😊

5.धूप में समय बिताइए..
 आपको अपना बचपन याद है,कितनी दफा माँ-बाप से बात सुनने को मिला होगा धूप में नही खेलना है..।और आज हम अपने बच्चों को भी कह रहे है,धूप में नही खेलना है..
खुद विटामिन-D लेने के लिए बीच पे जाते है..😊

अगर स्वस्थ रहना है,तो इन प्यारे बच्चों के साथ समय बिताइए..
आप मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ रहेंगे..।।


इस भागदौड़ भरी जिंदगी में,
इन बच्चों को भी प्यार चाहिए..
इस सोशल मीडिया के दौड़ में, 
इन्हें भी लाइक और सब्सक्राइब चाहिए..।

हम जितना ख्याल अपने गेजेट का रखता है
उतने ही ख्याल की उम्मीद ये हमसे रखते है..।
ध्यान रखिएगा इनका..
कंही गलती से गलती न हो जाये इनके परवरिश में,
नही तो अनफॉलो करने लगेंगे ये.. 
क्योंकि सोशल मीडिया के युग के बच्चे है ये..।

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में,
इन बच्चों को भी प्यार चाहिए..
इस सोशल मीडिया के दौड़ में, 
इन्हें भी लाइक और सब्सक्राइब चाहिए..।


Yoga for digestive system