तब आप अपनी कमियों का ही इजहार कर रहें होते है..।
इसिलिय जब भी किसी की शिकायत करें..
तो सोच ले..
कंही आप अपने कमियों का तो इजहार नही कर रहें है..।।
वंही जब आप किसी की प्रसंशा कर रहे होते है..
तो अप्रत्यक्ष रूप से आप स्वयं को ही निखार रहें होते है..।।
दोनों ही परिस्थितियों में आप..
किसी के आंख के तारे..
तो किसी के आंख के कांटे..
बन जाते है..।।
तो क्या किसी की शिकायत नही करें..??
करें..
अगर आप उनके कमियों को दूर कर सकते है,
या फिर उनकी मदद कर सकते है तब..।।
अन्यथा मजे लेने के लिए..
या फिर दिल का बोझ हल्का करने के लिए नही करें..
तो फिर क्या करें..
उनकी प्रसंशा करें..
क्योंकि हरेक इंसान में..
अवगुण से ज्यादा गुण ज्यादा होता है..।
और हमें उनका सिर्फ एक ही अवगुण दिखता है..।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें