ये तब पता चलता है..
जब दोस्त से दूरियां बढ़ जाती है..।
और अचानक फिर से जब...
दोस्त से करीबियां बढ़ती है..
तब दोस्त की अहमियत का अहसास होता है..।
दोस्त वो अहसास है..
जिसे बयां नहीं किया जा सकता..।
वो जेठ की गर्मी है..
तो चैत्य का फुहार है..
वो पूस का ठिठुरन है..
तो फागुन का बहार है..।
इनके बिना..
जीवन कंहा आसान है..।।

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