शुक्रवार, 24 जनवरी 2025

खुद को अकेले छोड़े

आज हम चारों और से घिरे हुए है,आंतरिक और बाह्य दोनों तरफ से घिरे हुए है..
हमें इस बात का भले ही अहसास न हो कि हमारे आस-पास कोई नही है,मगर वास्तविकता तो ये है कि हमारे आसपास एक पूरी आभासी दुनिया है..
आप इससे जबतक भागने की सोचेंगे तबतक बहुत देर हो चुकी होगी..क्योंकि आप इस दलदल में इतना फंस चुके होंगे कि, इसके बिना आप रह ही नही पाओगे..
आप दो कदम तो बाहर निकलने के लिए बढ़ाओगे..मगर आप फिर इसके और आकर्षित होकर इस दलदल में कूद जाओगे.।।

ये दलदल,ये आभासी दुनिया हमारे-आपके हाथ मे ही है..
ये स्मार्टफोन..
जरा सोचिए इसने आपसे क्या-क्या छीना है...??
इसने आपसे सबकुछ छीन लिया है..
आपका नींद,चैन,सुकून, आंनद.. सबकुछ..
अगर आप असफल है..तो इसका सबसे बड़ा योगदान इस स्मार्टफोन का भी होगा..।।
आपने आखरी बार कब 2 घंटे भी एकांकी समय गुजारा था..
शायद आपको याद नही होगा..

स्मार्टफोन तक तो ठीक था..अब तो स्मार्टवॉच भी अच्छी तरह से हमारी चैन छीन रहा है..

दुनिया पर वही राज करते है..
जिनके पास सोचने और समझने की शक्ति है..
आज स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हमारे सोचने और समझने की शक्ति ही छीन रहा है..
हमारा अपना कोई विचार ही नही है..
जिसका विचार पसंद आये हम उसके साथ हो लेते है..मगर ये नही सोचते कि क्या सही है या क्या गलत..।

हमारी स्थिति सच मे गुलामों जैसी हो गई है...
• आपने अपना समार्टफोन इसलिए लिया होगा क्योंकि आपने कंही ऐड देखा होगा..
•आज हम ~60% से ज्यादा सामना कंही न कंही ऐड देख के ही लेते है..चाहे वो खाने का हो या फिर पहनने का..

आज हम खुद से कुछ कर ही नही रहे है,हमसे तो किसी न किसी रूप में कराया जा रहा है..

एक घंटा एकांतवास में गुजारे..
जंहा सिर्फ और सिर्फ आप ही हो..
आपका स्मार्टवॉच भी न हो..
देखिए जिंदगी में कैसा बदलाव आता है...।।



गुरुवार, 23 जनवरी 2025

सुभाष चंद्र बोस..

1905 के "स्वदेशी आंदोलन" के समय एक किशोर बंगाली क्रांतिकारियों का फोटो पेपर से काट कर दीवाल पे चिपकाता है..जिसको देखकर ब्रिटिश सरकार के कर्मचारी, उसके पिता ने घबराकर उसे फाड़कर फेंक दिया..

15 साल की उम्र में अपने माता को पत्र लिखता है-
"क्या हमारे देश की हालत बद-से-बदतर ही होती जाएगी, क्या भारत माता का कोई लाल अपने हितों को छोड़कर अपना पूरा जीवन माँ के प्रति समर्पित नही करेगा..??"

ये पत्र लिखने के बाद कुछ समय के बाद ही वो स्वंतंत्रता सेनानी हो गए... जिनके देशभक्ति को गांधीजी ने सर्वोत्तम बताया..

वो व्यक्ति नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे..


इनके पिता ने बड़े प्यार से इनका नाम सुभाष रखा जिसका मतलब अच्छा बोलने वाला होता है...उनके पिता ने कल्पना नही की होगी कि वह अपने भाषण क्षमता का इस्तेमाल वे लोगो मे क्रांतिकारिता का जोश भरने के लिए करेंगे..

1940 में 11वी बार गिरफ्तार करके बोस को  कलकत्ता के प्रेसिडेंसी जेल में डाल दिया वंहा तबियत अस्वस्थ होने के बाद उन्हें घर मे ही नजरबंद कर दिया गया.. 
17 जनुअरी 1941 को आधी रात को बीसवीं सदी की सबसे बड़ी साहसिक राजनीतिक पलायन किया..जबतक अंग्रेज़ को पता चला तबतक वो काबुल जाने के लिए पेशावर पहुंच गए..फिर वो मास्को गए वंहा से बर्लिन पहुंच गए..

"अगर किसी राष्ट्र के पास सैन्य ताकत नही है,तो वह अपनी आजादी को बचाने की उम्मीद नही रख सकता ।"

जर्मनी से वो फिर जापान पहुँचे और वंहा 'आज़ाद हिंद फौज' के नेता बन गए..इनके फ़ौज में ~50 हजार फ़ौज थे..
 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सभी नेताओं को जब गिरफ्तार कर लिया गया था,तब आजाद हिंद फौज अपने चरम पर था..वो भारत के पूर्वी क्षेत्र में घुसने में कामयाब रही.

मगर तबतक जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया..कुछ महीनों के बाद बोस रुस के लिए निकले..ताइपे में ईंधन भराने के बाद ज्योहीं प्लैन हवा में उड़ा , आग लग गई..जिसका कोई साक्ष्य नही है..
मगर बोस कंहा गए पता नही चला..
इस घटना पे जॉर्ज ऑरवेल कहते है- दुनिया के लिए ये अच्छा हुआ।

इसके लिए 3 आधिकारिक आयोग बने,आखरी आयोग 2006
में बना जिसमे मान लिया गया कि उनकी मृत्यु 1945  में ही हो गया था..।।
भारत के बाहर उन्हें जो प्रतिष्ठा मिली थी.. 
उनके मृत्यु के बाद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका असर बना रहा..

1921 में अपने भाई शरत को पत्र में लिखा था-

"जिंदगी में कोई संघर्ष न हो,
तो उसका आधा मजा चला जाता है ।"


मंगलवार, 21 जनवरी 2025

नास्त्रेदमस

"नास्त्रेदमस" का नाम सुनते ही आपके जेहन में क्या आता है..
एक भविष्यवक्ता, जिसके कई भविष्यवाणी सच हुए है..।

इसके अलावा हममें से शायद ही किसीको पता होगा कि उन्हें ने मानव समुदाय के लिए और क्या किया...।।



हममें से अक्सरहाँ लोगों को "यूरोप के प्लेग त्रासदी"(ब्लैक डैथ) के बारे में जानकारी होगी..
ये त्रासदी ऐसा था कि, यूरोप की आबादी 50% से कम हो गया था..

ये समय 1528 का था जब "नास्त्रेदमस" ने इस त्रासदी में अपने पत्नी और 2 बच्चों को खोया..
इसके बाद वो प्लेग को समझने का प्रयास करने लगे...
औरों लोगों को समझाने का प्रयास किया कि- ये कोई भगवान का कहर नही बल्कि एक बीमारी है...
लोगों में अंधविश्वास इतना था कि, लोग घाव के जगह चूहे को पकड़कर सहलाते थे..उनका विश्वास था कि इससे घाव ठीक हो जाएगा..।।

नास्त्रेदमस ने अपने आस-पास अध्ययन करने पर पाया कि-
प्लेग का सबसे बड़ा कारण अस्वच्छता है..
उन्होंने ही सर्वप्रथम यूरोप के लोगों को पानी उबालना सिखाया और उस पानी का इस्तेमाल करना सिखाया..

उन्होंने प्लेग से मरे रोगी को अच्छी तरह दफ़नानं सिखाया..
उन्होंने पूरे यूरोप को स्वछता का पाठ सिखाया..
कुआँ,नाला,तालाब,नदी को स्वछता के प्रति लोगों को जागरूक करने में सफल रहे..

उनके इस प्रयास के कारण उन्हें यूरोप में प्लेग का डॉक्टर के नाम से लोग पुकारने लगे..
मगर हम उन्हें किस रूप में जानते है..।।

आज हममें से कई लोग यूरोप की स्वछता की बात तो करते है..
मगर इसके पीछे जिसका अहम योगदान था उसके बारे में हम नही जानते...।।

"कोई जरूरी नही की हम सबकुछ जाने ही..
जरूरी ये है कि हम जिसे जाने,उसे अच्छी तरह जाने..."





आप अपने बच्चों के साथ कितना समय बिताते हैं..

वर्तमान में जिंदगी कितनी आसान हो गई है..
2010 से पहले तक लगभग हरेक चीज के लिए लाइन लगाना पड़ता था..
मगर वर्तमान में लगभग किसी चीज के लिए लाइन लगाना नही पड़ता है..
मगर फिर भी,समय नही बचता....
आखिर ये समय कंहा चला जाता है..??

वर्तमान में हमारे पास इतना समय नही बचता की हम अपनों बच्चों के साथ समय बिताए...।।
बच्चों के साथ रहने का मतलब बच्चों के साथ समय बिताना नही है..
आप जरा गौर कीजियेगा..
जब आप बच्चों के साथ होते है तो क्या करता है..
अगर बच्चा रोये तो आप यूट्यूब पे वीडियो लगा के दे देते है,
या TV पे कार्टून लगा देते है,या फिर कुछ खाने को दे-देते है..
मगर आप ये जानने की कोशिश नही करते कि आखिर वो रो क्यों रहा है...
आजकल ये चलन बढ़ता जा रहा है..
हमारे-आपके बच्चें आजकल अपने परिवार के जगह मोबाइल के साथ व्यतीत करते है..
क्योंकि उसका रोना और उसका मटरगस्ती हमें पसंद नही आता..
इसीलिए हम उसके हाथ में एटम बम रूपी मोबाइल हाथ मे धरा देते है..जो बहुत ही घातक है..।।



क्या आपको याद है..
आपने आखरी बार किसी बच्चे के साथ मटरगस्ती कब किया था..
या फिर उसके साथ सफर पे कब गए थे..
या उसके साथ बातचीत करते हुए कब सोये थे..

वर्तमान में हम इतना एकांकी हो गए है की, जो हमारे साथ है,उसके साथ होते हुए भी हम नही है..क्योंकि हमने एक अपना ही दुनिया रच लिया है..ये दुनिया यूट्यूब, इंस्टाग्राम, और फेसबुक है..इस दुनिया के लिए हमारे पास इतना समय है कि हम खाना-पीना यंहा तक कि सोना भूल जाते है..।।

इसके चक्कर मे हम अपने बच्चों को समय नही दे पा रहे है..
हम 3 से 6 घंटों तक विन्ज़ो वाच करते है मगर बच्चों के ऊपर 30 मिनट भी क्वालिटी टाइम नही बिताते..।।

आखिर क्यों...??
हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार 10 में 7 परिवार वालों ने माना कि वो अपने बच्चों से ज्यादा समय स्मार्टफोन(सोशल मीडिया) पे देते है,जिस कारण बच्चों और पेरेंट्स में दूरियां बढ़ी है..।।






रविवार, 19 जनवरी 2025

अपना-अपना आसमां

शहर में सबका अपना-अपना आकाश है,
कई बदकिस्मती लोग ऐसे है,
जिनके हिस्से में आकाश क्या, प्रकाश तक नही है..
शहरों में आकाश का दायरा भी,
पैसों से खरीदा जाता है,
जिसके पास जितना पैसा है,उसके हिस्से में उतना आकाश और प्रकाश है..।
मगर ये भी बदकिस्मती लोग है..
क्योंकि इन्हें बाहर की हवा के जगह AC की हवा पसंद है,
सूर्य की प्रकाश के जगह कृत्रिम प्रकाश पसंद है।



इस शहर से दूर....
एक गाँव है..
जंहा पूरा आसमां हमारा है,
जंहा पूरा प्रकाश हमारा है..।।
हम में ही, वो काबिलीयत नही,
जो आसमां और प्रकाश को समेट पाऊ..।।



अब इस गाँव को भी, 
शहर में कमाने वालों की नजर लग गई है,
शहर से गाँव मे जब से पैसे आने लगे है..
सबके घर की छड़दिवाली(boundary wall) बढ़ने लगी है,
और आंगन,दरवाजे गायब होने लगे है..।

बचपन मे आंगन से चाँद देखा करते थे,
अब तो छत पे जाकर देखना पड़ता है,
शहरों के तो छत भी बिक चुके है,
अगर मन हुआ भी तो,चांद का दीदार दुर्लभ है..।।

शहर में सबका अपना-अपना आकाश है..।।



शुक्रवार, 17 जनवरी 2025

हम भारत के लोग...

कुछ चीजें हमारे हाथ में नही होती..
जैसे कि हमारा जन्म कंहा और किस परिवार में होगा..।।

मगर हमारा जन्म कंहा और किस परिवार में हुआ है,ये हमारे पूरे जीवन को निर्धारित करता है..।

अगर कोई बच्चा बिहार,झारखण्ड,ओडिशा और U.P में पैदा होता है,और दूरी ओर एक बच्चा गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़ में पैदा होता है,तो उसके जन्म से हो दोनों के बीच मे आय का 6 गुणा अंतर होगा..।।

- उसी तरह अगर कोई बच्चा स्कूल जाएगा तो उसे कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा मात्र 11-18% स्कूल में ही है,वंही केरल में 98% स्कूलों में इस तरह की सुविधा है..।।

हमारे संविधान निर्माताओं ने "अवसर की समानता " की बात की..
मगर आज भारत में दिन-प्रतिदिन असमानता बढ़ती जा रही है..

2021-22 की एक रिपोर्ट(स्टेटिक रिसर्च डिपार्टमेंट) के अनुसार भारत के 10% आबादी के पास कुल आय का 77% है..।।

•वंही "इकोनॉमिक्स टाइम्स" की 2024 के रिपोर्ट के अनुसार भारत के 1% लोगो के पास कुल आय का 40.1% है..।।



भारत मे ये असमानता पिछले 6 दशक में सर्वाधिक है..।
इस रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में इकोनॉमिक ग्रोथ तो हुआ है,साथ ही अमीर और गरीब के बीच मे खाइयां बढ़ी है..।।



अमीर और गरीबी के बीच की खाइयां हो या फिर विकसित और अविकसित राज्य हो,इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ हमारे राजनेताओं का है..
अगर आर्थिक विकास का सही बंटवारा होता तो, कम से कम शिक्षा,स्वास्थ्य और रोजगार के लिए लोगों के एक राज्य से दूसरे राज्य के लिए पलायन न करना पड़ता..।।


मंगलवार, 14 जनवरी 2025

प्रयास से परिणाम मिलते है

असफलता का स्वाद हम सबने चखा है..
अगर आपने नही चखा है तो आप बदकिस्मती लोगों में से एक हो,क्योंकि सफलता का मजा असफल होने के बाद ही आता है...।
इसीलिए जब असफल हो तो घबराए नही,बल्कि अपनी असफलता से सीखे..
और सीखने का प्रयास निरंतर जारी रखें,
क्योंकि " प्रयास से ही परिणाम मिलते है।"

ऐसा इस धरा पे कोई नही है,जिसे बिना प्रयास के ही सफलता मिल गया हो..
सबने अथक परिश्रम करके कोई मुकाम को हासिल किया है..
मगर कुछ लोग होते है,जो अथक प्रयास तो निरंतर करते रहते है,मगर उन्हें वो परिणाम नही मिलता...
शायद नियति उन्हें कंही और ले जाना चाहती है,और वो, कंही और जाना चाहते है..।।

धैर्य रखें,और प्रयास जारी रखें..परिणाम जरूर मिलेगा..।।

•थॉमस अल्वा एडिसन कई प्रयास के बाद बल्ब का आविष्कार कर पाए..।।
•KFC के संस्थापक हारलैंड सैंडर्स के कई असफल प्रयास के बाद KFC अस्तित्व में आया..

 ऐसे ढेर सारे उदाहरण हमारे गली मोहल्ले में मिल जाएंगे..
जो कल तक तो कुछ नही थे,मगर अचानक उनके जिंदगी में बदलाव आ गया..
ये कैसे हुआ..??
क्योंकि उन्होंने प्रयास नही छोड़ा..निरंतर जिंदगी में प्रगति के लिए वो प्रयास करते रहें..।।

विश्वास रखें- "प्रयास से परिणाम मिलते है"

Yoga for digestive system