सोमवार, 3 फ़रवरी 2025

कॉकरोच

डायनासोर पृथ्वी से विलुप्त हो गया,मगर डायनासोर से भी  पहले से पाए जानेवाला एक जीव हमारे आसपास मौजूद है..
आपको पता है वो कौन सा जीव है..??
वो हमारे किचेन का अप्रिय मेहमान "कॉकरोच" है..।।

आपको पता है उसके पास कितना दिल होता है..??
10 दिल वाला और नीले खून वाला यह जीव हरेक कठिन परिस्थितियों का सामना कर जिंदा राहने का माद्दा रखता है..

इसीलिए तो कितने बड़े-बड़े गए और ये छोटे अभी तक इस पृथ्वी पर विद्यमान है..।

कॉकरोच विपरीत परिस्थितियों में लकड़ी और पत्थर खा कर जीवित रहते है,इतना ही नही खतरों से बचने के लिए उल्टे होकर मरने का ढोंग भी करते है..
अपने अंडों को बचाने के लिए ये कोकून में सुरक्षित कर चिपका देते है..जिससे इनका वंश चलता रहे..

सीख:-" संयम और संघर्ष आगे बढ़ते रहने का सूत्र है" ।




गुरुवार, 30 जनवरी 2025

कीचड़,कमल और हम..

एक प्रश्न पूछता हूँ..
-भगवान का सबसे प्रिय पुष्प कौन है..?
-आध्यात्मिक रूप से सबसे ज्यादा महत्व किस फूल का है..?
शायद आपको जबाब मिल गया होगा..
चाहे कोई भी धर्म हो,
हरेक धर्म मे कमल फूल की प्रासंगिकता है...आखिर क्यों..

कमल पवित्रता,सादगी और ओज का प्रतीक है...
चाहे कीचड़ कितना भी क्यों न हो कमल अपने ऊपर कीचड़ के छींटे तक को आने नही देता जबकि उसका जड़ और डंठल कीचड़ में ही रहता है..उसमें जो सुंगध होता है,वो प्रकृति की सुंगंध होती है..उसका ओज हमेशा प्रतिबिंबित होता रहता है,दिन में सूर्य की रोशनी से तो रात में चाँद और तारे की रोशनी से..।


हम मनुष्य भी कमल के समान ही है..
हमारे नाभि से नीचे का हिस्सा जड़ है जो कीचड़ में सना हुआ है..
हमारा रीढ़ कमल के हिस्से के समान है.. और उसपर कमल पुष्प रूपी हमारा मस्तिष्क आसीन है..।
मगर कमल पुष्प रूपी अधिकांश मस्तिष्क खिल नही पाते...आखिर क्यों...??

वर्तमान समय में हमारा पूरा शरीर कीचड़ से लथपथ हो गया है..
मष्तिष्क रूपी पुष्प को खिलने का मौका ही नही मिल रहा है..
क्योंकि हमारे आसपास सिर्फ और सिर्फ कीचड़ ही है..
सुबह से शाम तक हम कीचड़ में ही सने रहते है..
अब तो हम इस कीचड़ के इतने आदि हो गए है कि हमें अहसास तक नही होता कि हम कीचड़ में सने हुए है..।

हम किस तरह के कीचड़ से सने हुए है..
आज हमने दिनचर्या से लेकर खान-पान तक सब को कीचड़ से लथपथ कर दिया है..
आज हम ऐसे-ऐसे चीज खा-पी रहे है जो खाने योग्य नही है,इसका असर हमारे पूरे शरीर पर विपरीत रूप में होता है..
इन्हें खाने-पीने से मष्तिष्क से निचला भाग बहुत ज्यादा ही विकसित हो जाता है जिस कारण अनेक समस्या होती है वंही मष्तिष्क अविकसित होने लगता है,वर्तमान में तो इसका गति और बढ़ गया है इसका प्रमुख कारण स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना है..जिससे हमारा मस्तिष्क इतना दूषित हो रहा है..की हमें अब इसके दूषित होने का आभास ही नही हो रहा है क्योंकि हमारे आसपास दूषित मस्तिष्क की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है..।।

क्या इससे छुटकारा पाया जा सकता है..??
जी हां,बिल्कुल..
आपने कमल के फूल को देखा होगा उसपे कभी भी धूल नही जमती..और वो कभी गंदा नही होता..।
क्यों..??
क्योंकि कमल के फूल ने अपने अंदर वो बदलाव लाया है,जिससे वो गंदगी को अपने ऊपर जमने नही देती..
भले ही वो कीचड़ कितना भी उर्वर क्यों न हो कमल का जड़ जरूरत के अनुरूप ही उससे उर्वरक लेता है,उसमें डूब नही जाता..भले ही पानी का कितना स्वच्छ धारा क्यों न बहे वो उसके साथ नही बहता..
इसी तरह हम मनुष्य को भी इस भोगवादी दुनिया में डुबना नही बल्कि उसका जरूरत के रूप में इस्तेमाल कर अपने मस्तिष्क का विकास करना चाहिए..।

ये कैसे संभव होगा..??
उस कमल के फूल की तरह ही एक स्थान पर अडिग रहकर ...
एक आसन लगाए और बैठिये और ध्यान कीजिये..
अगर आप लगातर ध्यान करते रहेंगे तो उस कमल के पुष्प के समान ही आपके अंदर भी पवित्रता,सादगी और ओज आ जायेगा..।।

ध्यान कैसे करें..
बस रीढ़ की हड्डी को सीधे करके आंख बंदकर बैठ जाये..और कुछ नही करना है..
ध्यान में जाना नही होता,ध्यान खुद आता है..मगर पहल,पहले आपको करना होगा..।

ध्यान कितना देर तक करें..
आपकी जितनी उम्र है..उतना मिनेट तो करना ही चाहिए..।।


एक प्रश्न फिर पूछता हूँ..??
क्या कमल की पंखुड़ियां झड़ती है..




मंगलवार, 28 जनवरी 2025

नज़रिया..

एक कहानी सुनाता हूँ..
एक चौराहे पे एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को मार रहा था..
उस झगड़े को देख रहें लोगों में से.. 
एक ने कहा- अच्छा कर रहा है,जो मार रहा है..
दूसरा व्यक्ति ने कहा- आह, कैसे मार रहा है,थोड़ा भी दया नाम की चीज नही है..
तीसरे व्यक्ति ने कहा- इस दोनों का रोज का है..
जरा आप बताइए इस दोनों में से कौन सही है और कौन गलत है..??
शायद आप निर्णय नही कर पाएंगे कि कौन सही है और कौन गलत है..क्योंकि आपको परिस्थितियों का ज्ञात नही है..।।

मगर क्या हम सोशल मीडिया के युग मे ऐसा कर पा रहे है..
शायद नही..
हम बिना असलियत को जाने ही सही और गलत बोलने लगते है..हम यंही तक नही,बल्कि अपने मत पे मतैक्य होने पर लड़ने भी लगते है..।।

"जो चीज हमें सत्य लग रहा है,जरूरी नही की वो दूसरे के लिए सत्य है..क्योंकि काल,परिवेश और परिस्थितियों के अनुसार सत्य भी बदल जाता है।।"

"वास्तविकता ये है कि हम में खुद ही इतनी खामियां है कि हमें दूसरों में सिर्फ खामियां ही दिखती है..
जिसदिन हममें अच्छाइयों का अंकुर फूटना शुरू हो जाएगा..
उस दिन से दूसरों के बुराइयों में भी हमे अच्छाइयां दिखनी शुरू हो जाएगी..।।"

इसलिए दूसरों के विचार से असहमत होने से पहले परिस्थितियों का ज्ञान होना जरूरी है..।।

एक और छोटा सा वास्तविक घटना सुनाता हूँ..
एक घर मे एक बच्चें का जन्म हुआ,ये खबर सुनकर अर्धनारीश्वर लोग बधाइयां मांगने के लिए आये..
उस परिजन और आसपास वाले लोगों ने अर्धनारीश्वर से झगड़ा किया जिसमें एक अर्धनारीश्वर का हाथ टूट गया..वो लोग थाना गए रिपोर्ट लिखवाने थानेदार ने रिपोर्ट नही लिखा..
अगले दिन अर्धनारीश्वर लोगों ने उन पुलिस वालों को मारने के लिए दौड़ाना शुरू किया..

अब आप सोचिए..किसने सही और किसने गलत किया..??

सोमवार, 27 जनवरी 2025

अपेक्षा बोझ नही,दायित्व है..

अपेक्षा हमेशा तकलीफदेह होती है..
हमारी उम्र ज्यों-ज्यों बढ़ती जाती है..
त्यों-त्यों लोगों की अपेक्षा हमसे बढ़ती जाती है..
और हम अपेक्षाओं के बोझ के तले दबते जाते है..।
हम चाहकर भी इन अपेक्षाओं का उपेक्षा नही कर सकते..
क्योंकि हमसे अपेक्षा हमारे माँ-बाप और हमारे हितैषी रखते है..
जिनके अपेक्षाओं को पूरा करना हमारा कर्तव्य होता है..।

मालूम नही कब ये अपेक्षा एक बोझ सा लगने लगता है..।
शायद ये अपेक्षा तब बोझ लगने लगता है,
जब हम किसी के अपेक्षाओं पे खड़े नही उतड़ते..।



वैसे भी माँ-बाप और चाहने वाले क्यों न अपेक्षा करें..
क्योंकि उन्होंने हमारा लालन-पालन किया है..
अगर वो हमारा लालन-पालन न करते तो हमारा क्या होता..??
अगर वो गर्भ में ही मेरा दमन कर दिया होता तो..??
इसीलिए हमसे अपेक्षा रखना उनका अधिकार है..
आखिर उनके अपेक्षा में कंही-न-कंही हमारा ही भला छुपा होता है..
सच कहूं तो माँ-बाप ही है,जो हमेशा हमारे कल्याण के बारे में सोचते है..।
मगर हम जब सक्षम नही होते तो उनके कल्याण में हमें,उनका स्वार्थ नजर आने लगता है..
वास्तविकता तो ये है कि..हम ही नाकाबिल है, जो अपने कमजोरियों को छुपाने के लिए उनके ऊपर दोषारोपण करते है..।।

आखिर आपसे कोई अपेक्षा क्यों न रखें..??
अगर आप किसी के अपेक्षा पे नही उतरते तो ये आपकी कमी है..अपनी कमियों को दूर करके कम-से-कम अपनों के अपेक्षा पे तो खड़े उतरे..।
दरसल हममें सबसे बड़ी ये कमी है कि हमें अपनी कमियां नजर नही आती..इस वजह से हमसे की गई अपेक्षा को जब हम पूरा नही कर पाते तो अपेक्षा हमें बोझ लगने लगती है..।।

आपसे सब अपेक्षा नही रखते..
जो आपके हितैषी होते है..
वही आपसे अपेक्षा रखते है..।।
जिस रोज लोग आपसे अपेक्षा रखना बंद कर दे तो सोच लीजिये.. 
आप या तो गलत दिशा पे जा रहे है,या फिर आप मृतप्राय हो चुके है..।।

अपेक्षा बोझ नही,दायित्व है..
अगर आप नाकाबिल होते है, तो आपको अपेक्षा हमेशा बोझ लगेगी..
अगर आपसे कोई अपेक्षा रखता है,या रखें हुए है..
तो मुस्कुराइए😊... 
की आप जिंदा है..
और जिंदा व्यक्ति कुछ भी कर सकता है..

रविवार, 26 जनवरी 2025

गणतंत्रता दिवस के मायने..

आज 26 जनुअरी है..
इससे बचपन की कुछ यादें जुड़ी हुई है..
हां सच में,कुछ ही यादें जुड़ी हुई है..।।

हमारी(~70% से ज्यादा की) परवरिश और शिक्षा वैसी जगह पर हुई, जंहा पे, शिक्षक को भी पूर्णतया 26 जनुअरी की महत्वता का पूर्ण ज्ञान नही था/है..।।




आज भी भारत की ~50% से ज्यादा आबादी को पता नही होगा कि हम 26 जनुअरी क्यों मनाते है..??
- स्कूली बच्चों के लिए बस एक उत्सव होगा..
- कामगार लोगों के लिए ये एक छुट्टी का दिन होगा..
( वैसे भी आज संडे है...90% से ज्यादा कामगार लोग मन ही मन बोल रहे होंगे साला एक छुट्टी मारा गया..क्योंकि हमें काम से प्यार नही बल्कि आर्थिक उपार्जन का एक साधन मात्र है)
-नेताओं के लिए झंडोत्सव का दिन होगा..

सच कहूं तो किसी के लिए ये खास दिन नही होगा..
ना ही सरकार चाहेगी की ये कोई खास दिन हो..सिर्फ छुट्टी के सिवा..।।

हम 26 जनुअरी क्यों मनाते है..??

आज भी भारत के बहुत बड़ी आबादी को स्वतंत्रता और गणतंत्रता के बारे में पता नही है..

आज के ही दिन हमारा संविधान लागू हुआ,और पूरा देश का वागडोर अब किसी के हाथ मे नही बल्कि संविधान के हाथ मे था..
और इस संविधान को शक्ति "हम भारत के लोग" से मिल रही थी..
हमारे संविधान निर्माताओ ने कई सपने देखें थे..कुछ साकार हुए,और कुछ को साकार करने का प्रयत्न कर रहे है,और कुछ का सिर्फ दिखावा कर रहे है..

हमारे संविधान निर्माताओं ने - सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का सपना था..अभी तक कोई सपना पूरा नही हुआ है..

सामाजिक न्याय में बहुत हद तक सुधार हुआ है..मगर अभी भी आपको ढेर सारे ऐसे घटना देखने को मिल जाएगा जो आपको विचलित कर देगा..4 दिन पहले की बात है राजस्थान में एक दलित की शादी पुलिस और फ़ोर्स के सरंक्षण में करवानी पड़ी क्योंकि दूल्हा घोड़ी पर चढ़ करके जा रहा था..क्योंकि उस परिवार वर्षों पहले घोड़ी पे चढ़ने के वजह से दूल्हा की हत्या कर दी गई थी..

आर्थिक न्याय...अब आप ही बताए कि कितना न्याय हुआ है..
हां आज 90 के दशक जैसी गरीबी नही है..मगर आज आय की असमानता आजादी के बाद से बढ़ती ही जा रही है..
 " भारत के 1% लोगों के पास आय का 40.1% है,वंही
     भारत के 10% लोगों के पास आय का 77% है.."

राजनीतिक न्याय:- आज कोई आम आदमी M.L.A और M.Ps का चुनाव नही लड़ सकता क्योंकि आज इस चुनाव में जिनके पास पैसा और रुतबा है,उन्हें ही पार्टी टिकट देती है..भले ही आपने समाज मे कितना योगदान दिया है..इससे पार्टी को कोई मतलब नही है..

हमारा संविधान 5 तरह की स्वंतंत्रता की बात करता है:-
" विचार,अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना"
आज अगर आप किसी भी सरकार के खिलाफ गलत विचार और अपना अभिव्यक्ति रखते है..तो आप सरकार के रडार पर आए चाहे नही आये मगर आप उनके अनुयायी के राडार पर जरूर आ जाएंगे(वर्तमान हरेक राष्ट्र का यही हाल है)

-आज एक दूसरे के प्रति कितना विश्वास रह गया है हम-आप जानते ही है..
-धर्म और उपासना..आज बहुत सारे लोग धर्म और उपासना के बारे में कुछ नही जानते मगर इसके बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते है..।।

फिर हमारा संविधान "प्रतिष्ठा और अवसर की समानता" की बात करता है..
अगर आप किसी सरकारी दफ्तर में जाते है तो कितना प्रतिष्ठा मिलता है..
जंहा तक अवसर की समानता की बात है..ये तो मजाक बन कर रहा गया है..
जब आप इसकी मांग करेंगे तो आपके ऊपर सिर्फ ज्यादती होगी..
हाल ही में बिहार में एक घटना घटी.. BPSC के अभ्यार्थियों ने री-एग्जाम की बात की क्योंकि 11 हज़ार छात्रों का एग्जाम दुबारा लिया जा रहा था..सरकार ठंड के रातों में पानी से भिंगो कर लाठी से बुरी तरह मारा..
(BPSC के 12 दिसम्बर वाले एग्जाम से 6%छात्र पास हुए, और 4 जनुअरी वाले एग्जाम से 20% से ज्यादा छात्र पास हुए)

कंहा है अवसर की समानता..??
अगर आप हिंदी भाषी राज्य में जन्म लेते है तो आपका औसत मासिक आय 9 हज़ार के आसपास होगा..
और आप गैर हिंदी भाषी राज्य में जन्म लेते है तो आपका मासिक आय ~27हज़ार होगा..

उत्तर भारत के स्कूल में, 10 में से शायद 2 ही बच्चे 10वी क्लास तक स्कूल में कंप्यूटर का इस्तेमाल कर पायेगा..
वंही दक्षिण भारत मे 10 में से 9 छात्र स्कूल में कंप्यूटर का इस्तेमाल कर पाते है..
कंहा है समानता..??

सरकार को क्या करना चाहिए:-
सरकार को कुछ नही भारत के हरेक नागरिक को अपने "मौलिक अधिकार"  और "मौलिक कर्तव्य"का ज्ञान अनिवार्य करना चाहिए..
जिस तरह सरकार ने "सर्व शिक्षा अभियान" चलाया उसी तरह सरकार को " सबको मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य का ज्ञान हो" का अभियान चलाना चाहिए..

मगर सरकार नही चलाएगी..
क्योंकि आज भारत मे कुछ चंद ही लोग है, जिन्हें मौलिक अधिकार का भान है,जब ये अपने अधिकार को लेकर सड़क पर उतड़ते है तो इन्हें दमन करने में सरकार को सहूलियत होता है..
अगर सबको मौलिक अधिकार का भान हो जाएगा तो सरकार तब कैसे दमन कर पायेगी..?

सभी को 26 जनुअरी को ढेर सारी शुभकामनाएं..
"गणतंत्रता दिवस" की शुभकामनाएं देकर आपको असमंजस में नही डालना चाहता..
क्योंकि कंही आप ये न सोचने लगे कि गणतंत्र क्या होता है..??


शुक्रवार, 24 जनवरी 2025

क्या चमत्कार होता है..

हम मनुष्य आज से ही नही बल्कि जब से सोचने-समझने की शक्ति हासिल किया, तब से ही चमत्कार शब्द का ईजाद किया..


क्या सच मे चमत्कार होता है..??
सच कहूं तो शायद नही..
प्राचीनकाल से ही मनुष्य चमत्कार की बात करते आया है..
जो चीज उन्हें समझ नही आता था,या फिर जो चीज वो नही कर पाते उसे वो चमत्कार मान लेते थे..

हम आज भी तो यही कर रहा है..
हमें जो चीज समझ मे नही आता उसे चमत्कार मान बैठते है..
और उसकी पूजा करना शुरू कर देते है..
हमारे समाज मैं कई ऐसे लोग मिल जाएंगे जो आज भी किसी चमत्कार के आस मैं बैठे हुए है..ऐसे लोगों के जीवन में कभी चमत्कार नही होता..

अगर चमत्कार होता है तो किसके साथ होता है..??
अगर आपने चमत्कार के बारे मे सुना है तो कुछ हद तक सही ही होगा..मगर आपने किसके बारे मे सुना है..
मुझे पूरा उम्मीद है कि आपने कोई भी चमत्कार किसी आम आदमी के जीवन मे घटित होने के बारे में नही सुना होगा..।।

चमत्कार अक्सरहाँ कठिन परिश्रमी और दृढ़निश्चयी व्यक्ति के ही जीवन में घटित होता है..दरसल ये कोई चमत्कार नही बल्कि उनके परिश्रम का फल होता है..
जब हम उस स्तर का मेहनत नही कर पाते तो उसे चमत्कार मान लेते है..।।

अगर चमत्कार होता तो,
वो किसी के भी जीवन में हो सकता था/है..।
मगर नही,
चमत्कार उन्हीं के जीवन में होता है,
जो अपने परिश्रम,साहस,दृढ़ता,धैर्य और विश्वास से अपने कर्तव्य पथ पे अड़िग रहते है..
अक्सरहाँ उन्ही के जीवन में चमत्कार होता है..।।

क्या आप भी अपने जीवन में चमत्कार लाना चाहते है..
तो कठिन परिश्रम,साहस,दृढ़ता, धैर्य और आत्मविश्वास की क्षमता को विकसित करें.. 
तब देखिए जिंदगी में चमत्कार कैसे होता है..
ये चमत्कार आपको नही बल्कि औरों को दिखेगा..।।

सच कह रहा हूँ..

सच कह रहा हूँ,
थक चुका हूं मैं,
सच कह रहा हूँ
मर चुका हूं मैं..।।

सच कह रहा हूँ,
मैं बस, जिंदा बोझ सा बन के रह गया हूँ..
एक चमत्कार के आस में जीवन व्यतीत कर रहा हूँ,
सच कह रहा हूँ,मर चुका हूं मैं....

सच कह रहा हूँ..
आधे से ज्यादा जिंदगी जाया कर चुका हूं मैं..
बची हुई उम्र को भी जाया करने की और बढ़ा जा रहा हूँ मैं..
सच कह रहा हूँ मैं,मर चुका हूं मैं...

अब कोई उम्मीद नही है किसी से..
सबके उम्मीदों पे,
पानी फेर दिया है मैंने..
कइयों के सपनों के साथ खिलवाड़ किया है मैंने..
अपने ही हाथों से,स्वयं का सत्यानाश किया है मैंने..
सच कह रहा हूँ,मर चुका हूं मैं..

सांस चलने से कोई जिंदा नही होता...
ना ही हांड-मांस की गठरी को ढोकर कोई जिंदा होता..
जिंदा लोगों की पहचान तो है,
नित नए परिवर्तन लाकर जिंदगी में आगे बढ़ते रहना..
सच कह रहा हूँ मैं,मर चुका हूं मैं..

मैं तो कब का मर चुका हूं...
बस सांसे चल रही है..
अगर जिंदा भी हूँ तो 1-2 लोगों के लिए..
अन्यथा मैं तो कब का मर चुका हूं..।।

सच कह रहा हूँ,मर चुका हूँ मैं..
अब लगता है,थक चुका भी हूँ..

क्या इसी तरह,मर के मरना है..
या फिर अच्छी तरह से मरना है..
ये भी नही निर्णय कर पा रहा हूँ मैं..
सच कह रहा हूँ मर चुका हूं मैं..

मैं इस तरह से मर कर मृत्यु को शर्मसार नही करना चाहता..
मैं तो इस तरह मरना चाहता हूं की, 
मृत्यु मेरी आलीगं को आतुर हो..
जब मेरा मृत्यु आलीगं करें..
तो मृत्यु भी हर्षित हो..
पूरा फ़िजा पुष्पित और ये जंहा सुगंधित है..।।

मैं इस तरह नही मरना चाहता..
मैं इस तरह असफलता का बोझ नही ढोना चाहता..

मैं अपनी असफलता को सफलता मैं परिवर्तित करूँगा..
मैं अपनी मृत्यु को उत्सव मैं परिवर्तित करूँगा..
मैं अपने प्रयास से स्वयं का निर्माण करूँगा..।

मैं सच कह रहा हूँ..
मैं फिर से एक नया शुरुआत करूँगा..
अपनी मृत्यु का बहुत विस्तार करूँगा..
मैं यू ही अब अपने जीवन को जाया नही करूँगा..
मैं स्वयं का निर्माण करूँगा..।।

सच कह रहा हूँ..
मैं फिर से एक शुरुआत करूँगा..।।



Yoga for digestive system