जनाब लोग ही नही..
सबकुछ बदलता है..
जिससे आपको लगाव होता है..
उसके बदलाव का अहसास होता है..
जिससे लगाव नही होता है..
उसके बदलाव का अहसास नहीं होता है..।।
आपने खुद को सीमित ही इतना कर लिया है कि..
आपको सिर्फ कुछ लोगों का बदलने का अहसास होता है..
खुद को इतना विस्तारित करें..कि
हर क्षण ब्रह्मांड में हो रहे बदलाव का अहसास कर सकें...।
छोड़िए हटाइये खुद को इतना विस्तारित मत कीजिये..
खुद को इतना संकुचित कीजिये कि
अपने हृदय गति और सांसों में हो रहे बदलाव का अहसास हो सके..।
ये कैसे होगा..?
ये कैसे होगा नहीं,ये हर क्षण हो रहा है..
बस अपने आपको स्थिर करके देखना है..।।
खुद के अंदर सांसों के सहारे गोता लगाइए..
और सांसों के सहारे बाहर आइए..
तबतक गोता लगाते रहिये जबतक वो मिल न जाये...
जिसकी आपको तलाश है..।

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