तोड़ता हूँ अपने लिए..।
जब नियम को तोड़ कर तार-तार कर देता हूँ..
तब ख्याल आता है कि..
ये नियम बनाया था
मैंने अपने लिए..।
अक्सरहाँ इन बातों को दरकिनार कर आगे बढ़ जाता हूँ..
मगर कभी तो रुकना होगा..
और इन बातों का ख्याल करना होगा..।
जो नियम बनाये थे मैंने..
अपने भले के लिए..
तो भला कबतक,
नियम को दरकिनार कर आगे बढ़ता रहूंगा..।
कभी तो रुकूँगा..
और अपने बनाये नियम पे चलूंगा..
शायद वो वक़्त अब आ गया है..
अपने बनाये नियम को दृढ़ता से अनुसरण करने का..।

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