बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

माना कि..

माना कि,है तुममें..
ढेर सारी कमियां..
मगर..
उन खूबियों का क्या करें..
जो तुम्हें खास बनाता है..।
तुम्हारी कमियां..
उभरती है,
तुम्हारी कमजोरियों से..।
मगर तुम्हारी..
खूबियां उभरती है..
निःस्वार्थ भाव से
अच्छाई के लिए..
किसी के भलाई के लिए..।।

मैं तुम्हें..
कैसे बुरा कहूं..
जब तुम्हें अपने बुराइयों का अहसास है..।
तुम खास हो..
इस प्रकृति का अहसास हो..।

प्लीज..
तुम वो होओ..
जिसके लिए तुम हुए हो..।।



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माना कि..