रविवार, 19 जुलाई 2026

मूवी : श्रीकांत..

72 वाँ राष्ट्रीय अवार्ड के लिए बेस्ट मूवी के लिए "श्रीकांत" मूवी को चुना गया..।




ये मूवी श्रीकांत बोल्ला के जीवन पर आधारित है,जो बचपन से ही अंधे थे..।

मगर उन्होंने जिंदगी में वो मुकाम हासिल किया जो भारत की 95% से ज्यादा आबादी उस मुकाम को हासिल नही कर सकते..।


- अभी भी साइंस स्ट्रीम लेकर कितने लोग पढ़ते है..

- भारत के कितने लोगों को MIT(विश्व की सबसे अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थान) में पढ़ने का मौका मिलता हूं..।

- भारत के कितने लोग सफल एंटरप्रेन्योर(उद्यमी) बनते है..।


उन्होंने वो सब हासिल किया जो वो पाना चाहते थे..उसके लिए उन्होंने मेहनत किया..और उन्हें अच्छे लोगों का साथ मिलता रहा..।


हममें से अक्सरहाँ लोग कुछ करना तो चाहते है..मगर करते नही..अगर करते है,तो उसे मुकाम तक नही पहुंचा पाते..।।


इसी फ़िल्म में A.P.J अब्दुल कलाम सर् की एक लाइन है..

"अच्छा करो,अच्छे लोग खुद-व-खुद मिलते रहेंगे.."।


इस फ़िल्म के बारे में कहें तो फ़िल्म का मुख्य पात्र अपने परिस्थितियों का रोना कभी नही रोता..शायद इसिलिय वो सफल हुए..

मगर हम आप अपने परिस्थितियों का अक्सरहाँ रोना रोते है..मगर उस परिस्थितियों का समाधान नही ढूंढते..।


एक बार ये मूवी अवश्य देखें..

क्योंकि ये मूवी एक समय पे खुद से रु-ब-रु करवाती है..हमारे आपके दोनों पहलुओं को दिखाता है..।


"सफल वही होते है,जो सफल होना चाहते है.."

शनिवार, 18 जुलाई 2026

आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..।

आपने कभी गौर किया है..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..??
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..?



थोड़ा रुकिए,और जरा सोचिए..
सोचिए नहीं, मनन कीजिये..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..
अगर कुछ मिलता है..
तो वो आपके जिंदगी में क्या बदलाव ला रहा है..
क्या वो ऊर्जा आपके जिंदगी को नया आयाम दे रहा है..?
या फिर आपको धरातल में ही ले जा रहा है..?
जरा सोचिए..।


समय ऊर्जा है..
और ऊर्जा जिंदगी है..।
आप अपना समय जैसे इस्तेमाल करेंगे..
जिंदगी वैसी ही होगी..।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

दादी माँ..

आपका न होना बैचैन करता है मुझे..
आपका न होना बेघर लगता है मुझे..
आपका न होना..
ये सोच के दिल सहमता है मेरा..।
कंहा चली गई आप..।

मेरे आने के खबर सुनते ही..
कई दफा आपका फोन आ जाना न-गवारा गुजरता था मुझे..।
मेरे इंतजार में,
मेरा वाट जोहना अजीब लगता था मुझे..।
घर पे दस्तक देते ही..
आपके मुस्कान का दीदार करना..
और आपके चरणों का स्पर्श करना..
अलग अनुभूति देता था मुझे..।।

ये पहली दफा होगा,
जब घर पहुंचते ही,
आपका दीदार नही होगा..
आपके मुस्कुराते चेहरे से दो-चार नही होगा.।


आपके बेगैर उस घर में..
पहली दफा कैसे रह पाऊंगा मैं..।
मेरे सूखे बालों में तेल कौन लगाएगा अब,
वो मेरी गोल्ड बिस्कुट जबरदस्ती कौन खिलायेगा अब..
घर से बाहर दूर जाते वक्त चुपचाप कौन,मेरे हाथों में पैसा थमायेगा अब..।।
यही सब सोच के जी घबराता है..
ज्यों-ज्यों घर के करीब पहुंच रहा हूँ..
आपके न होने का अहसास और बढ़ता जा रहा है..।
आपके बेगैर उस घर में कैसा रह पाऊंगा मैं..
दादी माँ..।।



बुधवार, 15 जुलाई 2026

ये मायने नही रखता..

ये मायने नही रखता की..
वो कितना प्यार करता है..।
मायने ये रखता है कि..
आप कितना प्यार करते है..।
क्या आप इतना प्यार करते है कि..
उसके हर गुनाह को माफ़ कर सके..
अगर हां..
तो आप सच में प्यार करते है..।

मगर ये संभव कंहा..।
इसिलिय तो..
प्यार करने वालों की तादाद घटती जा रही है..
प्यार का मिशाल बनने वालों की तादाद घटती जा रही है..।
अब कंहा मिलता है हीर-रांझा,
और कंहा दिखता है लैला-मजनू की जोड़ी..।
अगर कोई दिख भी जाये..
तो वो सिर्फ आकर्षण है..
जब तक आकर्षण रहेगा तबतक साथ रहेंगे..
जब आकर्षण खत्म होगा..
तो शायद साथ रहकर भी साथ नही रह पाएंगें..।।




कैसे हो..

तुम्हारा हाल पूछने का मन करता है..
मगर ड़र लगता है..
कंही तुम्हारा जबाब न आये,तो..
मेरे हाल का..
क्या हाल होगा..?

यही सोचकर..
तुम्हारा हाल पूछने का मन नही करता..।
मगर फिर भी..
तुम्हारा हाल पूछने का मन करता है..।।
कैसे हो..??



इंडियन वुमन..

स्त्री क्यों असहाय होती है..?
स्त्री असहाय नहीं..
बल्कि हमारी सोच ही निकृष्ट होती है..।

बहन कैसे अपना सबकुछ छोड़ कर..
यानि अपना नाम तक...छोड़ कर
दूसरे का घर बसाने चली जाती है..?
किसी की बीवी बन कर उसके दुनियां को सजाने लगती है..
फिर दादी-नानी बनकर पूरा कुनबा संभालने लगती है..।
आखिर फिर भी वो असहाय क्यों है..??


सोमवार, 13 जुलाई 2026

मौन

मौन हमें..

मृत बना देता है..

या फिर मृत्यु से परे पहुंचा देता है..।

मगर आप मौन क्यों है..??

ये मायने रखता है..।

क्या आप मौन वर्तमान परिस्थितियों के कारण है..?

या फिर मौन का प्रस्फुटन स्वयं ही हुआ है..?


अगर मौन का प्रस्फुटन स्वयं ही हुआ है, 

तो..

आपका मौन खुशबू की तरह पूरे फिजा में फैल कर,

सबको आनंदित करेगा..।


अगर आप मौन अपने विपरित परिस्थितियों के कारण है,

तो..आपका मौन सिर्फ आपको ही नही,

बल्कि आपके आसपास वाले को भी अमावास की रात की तरह भयावह बना देगा.।।



बप्पा..