शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

शाम से सुबह..

शाम से सुबह..
और सुबह से शाम..
ये सिलसिला न जाने कब से चला आ रहा है..
मगर हम अब भी बेहोश है..।
और दिन से रात..
और रात से दिन..
का रट लगाए हुए है..।


जब उस छोटे से पिंड में अनहद नाद फूटा होगा..
तब न दिन रहा होगा,न रात हुआ होगा..
अगर हुआ होगा..
तो धुंधली सी शाम या फिर धुंध से छनकर आती हुई सुबह की रोशनी..।
ये सिलसिला न जाने कितने साल हजार साल चला होगा..
एक शाम को रात होने में..
या फिर एक सुबह को दिन होने में कितना लंबा सफर तय करना पड़ा होगा..।


ये शाम सबको अपने में समेट रही है..
और सुबह, सबको अपने हिस्से की रोशनी दे रही है..।

ये शाम है, साधना का..
और ये सुबह है,आराधना का..
इसे यू ही जाया न होने दे..।।

(माफ कीजियेगा..ये आपको शायद समझ में न आये..अगर आपको ब्रह्मांड की निर्मण की प्रक्रिया मालूम हो तो आपको जरूर समझ मे आएगा😊 एक बार बिग-बैंग थ्योरी जरूर पढ़ लीजियेगा)




गुरुवार, 18 दिसंबर 2025

सब संघर्ष से जूझ रहे है..

हमें लगता है संघर्ष सिर्फ हमारे ही जिंदगी मैं है..
घर से बाहर निकलिए आपसे भी ज्यादा लोग संघर्ष कर रहे है..
कोई कुछ सांस के लिए तो कोई कुछ पल के लिए संघर्ष कर रहे है..
और हम घर में बैठकर सोच रहे है कि संघर्ष सिर्फ हमारे ही जिंदगी में है..


WHO के अनुसार प्रत्येक मिनट 105 लोग रोग से जूझते हुए एक-एक सांस के लिए तड़प के मरते है,और प्रत्येक घंटे 6300 लोग.और प्रत्येक दिन 1.5 लाख लोग..।
और हम यू ही..अपना मिनट,घंटा और दिन जाया कर रहे है...।

क्या आपको पता है..विश्व मे कितने दिव्यांग लोग है..??
विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के अनुसार पूरे विश्व मे 130 करोड़ लोग दिव्यांग है..यानी विश्व की 16%आबादी दिव्यांग है..।।
आशा करता हूँ आप उनमें से नही होंगे...।



क्या आपको पता है इनके जीवन मे किस तरह की समस्या आती है..??
शायद आपको पता नही होगा..
क्योंकि आप उनके जिंदगी से 2-4 नही होते है..।
उन्हें पारिवारिक,सामाजिक,आर्थिक हरेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है..
मगर..उनमें से कुछ ऐसे लोग होते है जो अपनी विकलांगता को अपनी वैसाखी बना कर जिंदगी के हरेक सपनों को पूरा करते है..और अपनी विकलांगता को मात देते है..।।

मगर आज सबसे ज्यादा मानसिक रोगग्रस्त आज की युवा पीढ़ी है..
जो देखने मे तो पूर्ण स्वस्थ है..मगर वो मानसिक रूप से कमजोर है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि उसे पता ही नही है कि उसे क्या करना है..?
अगर कुछ कर रहा है तो उसे अहसास ही नही है कि मैं जो कर रहा हूँ वो सही है या गलत..??
सच कहूं तो उसे इन सब का अहसास ही नही हो रहा है..
पता है क्यों..??

क्योंकि आज की युवा पीढ़ी अपना समय तो..यू ही जाया कर रही है..
ILO(इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन) के 2024 के रिपोर्ट के अनुसार 80% भारतीय युवा बेरोजगार है(MoSPI भारत सरकार के 2025 के रिपोर्ट के अनुसार 4.7%)
पोर्न हब के अनुसार 40% युवा पोर्न एडिक्टेड है..
40% से ज्यादा युवा सोशल मीडिया एडिक्टेड है..
35% से ज्यादा युवा जंक फूड एडिक्टेड है..
60% से ज्यादा युवा डिप्रेशन से ग्रस्त है..



मगर उन्हें इन सबसे फर्क नही पड़ता,क्योंकि उन्हें इन सब चीजों से डोपामिन मिल रहा है,और मस्त जिंदगी जी रहे है..
क्योंकि इस पीढ़ी को किसी चीज के लिए संघर्ष नही करना पड़ रहा है..
न पढ़ने के लिए,न खेलने के लिए,न खाने के लिए,न कहीं जाने के लिए..
क्योंकि एक क्लिक पे सबकुछ उपलब्ध है..।

मगर एक चीज जो उपलब्ध नही है..वो आइडेंटिटी...
उनकी जो भी आइडेंटिटी है वो आभाषी(virtual) है,इसिलिय सबकुछ होने के बाद भी वो अकेले है..क्योंकि उनकी अपनी स्थायी पहचान नही है..।
उनके पड़ोसी भी उन्हें अच्छी तरह से नही जानते..
क्योंकि आज के युवा ने अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली है..
जो शुरुआत में तो अच्छा होता है..मगर ज्यों-ज्यों समय बीतता है..
तो संघर्ष शुरू होता है..और वो इसे समझ नही पाते..जिस कारण वो एक दलदल से निकल कर दूसरे दलदल में फंसते जाएंगे..
और उनके इस दलदल में फंसने के कारण कुछ मुट्ठीभर लोग इसका फायदा उठाएंगे..या कहें तो उठा रहे है..।
आपके आसपास वो सबकुछ है जिससे आप कुछपल के लिए वास्तविक दुनिया से निकलकर आभासी दुनिया मे जा सकते है..
मगर फिर वास्तविक दुनिया मे ही आना पड़ेगा..।
मगर कुछ लोग इस मकड़जाल से बाहर नही निकल पाते जिस कारण प्रत्येक दिन भारत मे ~500 के आसपास लोग आत्महत्या करते है..और ये आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है,जो चिंताजनक है..।।
इसका कारण क्या है..??
लक्ष्यविहीन जिंदगी..और आभाषी जिंदगी से निकलने के बाद वास्तविक जिंदगी का सामना करने में असमर्थता..।।

मगर इससे निकलना बहुत आसान है...
बस आपको अपना पहला कदम घर से बाहर निकालना होगा..।
जब आप वास्तविक जिंदगी में कदम रखेंगे तब आपको अहसास होगा..
आपका संघर्ष तो कुछ भी नही है..
यंहा तो लोग एक सांस,एक पल,1₹ तक के लिए संघर्ष कर रहें है..।।

घर से बाहर तो निकलिए...
आपके हरेक समस्या का समाधान, आपके घर के बाहर इंतजार कर रहा है..।।

संघर्ष तो जिंदगी का वैशाखी है जो जीना सिखाता है..
संघर्ष तो जिंदगी का रंग है, जो जिंदगी में रंग भरता है..
संघर्ष तो वो हमसफ़र है, जो जिंदगी को खुशनुमा बनाता है..
इसीलिए जिंदगी में जब भी संघर्ष आये,तो उसे सहस्र स्वीकार करें..।।

मालूम नही क्यों..

मालूम नही क्यों..
आपकी कमी खल रही है..।
मालूम नही क्यों..
आपकी याद आ रही है..।
मालूम नही क्यों..
शायद मैं स्वार्थी हूँ...
इसीलिए शायद में आपको याद कर रहा हूँ..।
शायद में असहाय हूँ, 
इसीलिए शायद आपको याद कर रहा हूँ..।
सच कहूं तो..
मालूम नही क्यों..
मैं आपको याद कर रहा हूँ..।।
शायद उस जंहा से भी आप मुझे देख रही है..
और ढेर सारा प्यार मुझपे बरसा रही है..।।
मालूम नही क्यों..
लव यू दादी माँ..।।


धुंए से आग...

हममें से अक्सरहाँ लोगों को, शिकायत रहता है कि...
लोग मेरी सुनते नही,मुझे समझते नही या फिर लोग मुझसे दूर भागते है..??
कभी सोचा है आखिर क्यों..??

हममें से अक्सरहाँ लोगों ने ठंड में अलाव(आग) में हाथ सेका होगा
मगर क्या आपने एक चीज गौर किया है..
जब आग सुलगाई जाती है,तब उसमें से ढेर सारा धुंआ निकलता है,जब धुंआ निकल रहा होता है,तब उस अलाव(आग) के पास कोई नही जाता..ज्योहीं आग पकड़ लेती है, तो उस अलाव को सभी चारों और से घेर कर हाथ सेंकते है..।।


जीवन का भी यही दस्तूर है..।
जब आप संघर्ष कर रहे होते है तब आप उस अलाव की तरह होते है जो सिर्फ धुंआ ही फैला रहा होता है..
और ज्योहीं आप सफल होते है,त्योंही आप उस अलाव की तरह हो जाते है,जिसे सभी चारों ओर से घेरे होते है..।।

आप अपने जीवन में जब भी हताश और निराश हो तो उस धुँएदार अलाव को याद करें..आखिर कभी न कभी तो अलाव का धुआं खत्म तो होगा ही..
जो दूर भाग रहे थे वो खुद-व-खुद बिन बुलाए ही करीब आयेंगे..।।
इसीलिए हताश मत हो..
धुंआ निकल रहा है तो,आग पकडेगा ही...।।

आपबीती..

"ये जरूरी नही की आप आगे है,तो आप आगे ही रहेंगे या पीछे है,तो पीछे ही रहेंगे..।"


 मैं रोज सुबह मढ़ से जेटी लेकर वर्सोवा जाता हूँ..ये कई बार हुआ है,मगर इस बार ये घटना बहुत कुछ सीखा गया..।
अक्सरहाँ में जेटी से जाता हूँ तो किनारे पे खड़ा या बैठ जाता हूँ,जिससे जल्दी उतरकर बाहर जा सकू..
मगर आज उल्टा हुआ,जेटी ने दूसरा किनारा स्टैंड पे लगा दिया..
जिससे जो पीछे थे वो आगे हो गए,और जो आगे थे वो पीछे हो गए..।।

इस घटना ने मेरी उदासी को बहुत हद तक दूर कर दिया..।
और एक नई ऊर्जा का संचार मेरे अंदर किया..।
जिंदगी कभी-कभी बिना अपेक्षा के वो सब दे देगी जिसका आपको उम्मीद भी नही है..
और जिंदगी आपको कभी वो भी नही देगी जिसका आप अपेक्षा कर रहे है..।।
इसलिए उदास मत हो..
इस नायाब प्रकृति के पास ढेर सारे जरिये है..अर्श से फर्श पर पहुचाने का और फर्श से अर्श पर पहुँचाने का..।।

इसलिए बस देखता जा..
क्योंकि जो चीज हमारे हाथ मे है ही नही उसके लिए परेशान होने से क्या मिलेगा..

मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

आप अपना हीरो खुद है..

आप अपना हीरो खुद है,
अगर नही है,
तो बनने की कोशिस कीजिये..
सिर्फ कोशिस नही बल्कि..
आप जो चाहते है,
वो बनिये..
क्योंकि आप ही अपना हीरो है..।

आप जिसे अपना हीरो(आइडियल) मान रहे है,वो आपके कभी आदर्श हो ही नही सकता,सिर्फ वो ही नही,बल्कि कोई नही..
क्योंकि उनका परिस्थिति उनका परवरिश आपसे बिल्कुल अलग है..।
इसीलिए उन्हें अपना हीरो मानकर अपना जीवन मत जाया कीजिये,बल्कि उनसे अच्छी चीजें सीखिए,जिससे जिंदगी को सफल बना सके..।।

आप अपना हीरो स्वयं है,
अपने अतीत में झांकिए, आपने कितने ऐसे काम, कई बार किया होगा जो औरों के लिए असंभव लग रहा होगा..
मगर आपने किया..
क्योंकि आप स्वयं हीरो है..।।

अपने अंदर सो चुके हीरो को जगाइए..
और बेहतरीन हीरो बनिये..
क्योंकि ये रंगमंच आपका इंतजार कर रहा है,
इसे और ज्यादा देर इंतजार मत करवाइये..।।

आप अपना हीरो स्वयं बनिये..।।

सोमवार, 15 दिसंबर 2025

मैं कंहा रह गया..

मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..
सब मुझसे आगे निकलते गए..
और मैं सिर्फ देखता रहा..
मैं कंहा रह गया जिंदगी के इस दौड़ में..।

जो मुझसे पीछे थे वो मुझसे आगे निकल गए..
जो मुझसे आगे थे वो मुझसे बहुत आगे निकल गए..
और मैं सिर्फ हाथ बांधे देखता रहा..।।


मुझे ईष्या नही है उनसे..
बल्कि वो मेरे प्रेरणाश्रोत है..।
उनकी सफलताओं से मुझे अपनी गलतियों का भान होता है..
ना जाने फिर भी मैं ऐसा कह रहा हूँ खुद से..।
एक समय आएगा..
जब मैं एक लंबी छलांग लगाऊंगा..
और इन सबसे आगे हो जाऊंगा..।
पहले तो मैं UPSC के सहारे कहा करता था..
अब तो उसका भी सहारा छूट गया..।
आखिर फिर ऐसा कौन सा छलांग लगाऊंगा, 
की मैं..सबसे आगे निकल जाऊंगा..।।

Yoga for digestive system