रविवार, 12 अप्रैल 2026

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं कर क्या रहा हूँ..??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं जा किधर रहा हूँ...??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं व्यर्थ ही जीवन गवां रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की कुछ सोच ही नही पा रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..
मगर..
सोचना ही छोड़ दु..
तो फिर कैसे अपने सोच को साकार करू..।

इस सोच ने ही तो..
इस संसार के अस्तित्व को साकार किया..
इस सोच ने ही तो..
इस विश्व का विस्तार किया..
इस सोच ने ही तो..
कई संस्कार का विस्तार कर..
नए कीर्तिमान का निर्माण किया..।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..।
मगर..
इस तरह की सोच तब आती है..
जब जिंदगी..
हमारे अनुकूल नही चलती..।
मगर फिर सोचता हूँ..
आखिर हमारे अनुकूल चलती ही क्या है..??
जो चल रही है..
अगर उसे ही ईमानदारी से अपने अनुकूल बना ले..
तो फिर सोचना ही क्या है..।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं कर क्या रहा हूँ..??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं जा किधर रहा हूँ...??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं व्यर्थ ही जीवन गवां रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की कुछ सोच ही नही पा रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..।




बुधवार, 8 अप्रैल 2026

मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..

मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..
अंधेरे के तलाश में..।
जंहा कोई कोलाहल न हो..
जंहा सिर्फ और सिर्फ घनघोर अंधेरा हो..
जंहा चांद तारों की भी रोशनी न आये..
मैं वंहा..
थोड़ा देर सोना चाहता हूं..।




मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..
अंधेरे के तलाश में।
जंहा न कोई सुगंध,और न ही कोई दुर्गंध हो..
मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..
जंहा स्वयं का भी, भान न हो..।

मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..।
है अगर किसी को उस जंहा का पता..
तो जरूर इल्तला करें..
कब से बेचैन हु मैं..
क्योंकि..
मैं,थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..
अंधेरे की तलाश में..।

बड़ा अजीब है..
सिर्फ मैं ही नही,
कई और है..
अंधेरे की तलाश में..।
उनकी बेचैनी को देख कर..
अब मेरे सोने की इच्छा नही रही..।
क्योंकि जो अंधेरा में ढूंढ रहा..
वो अंधेरा कंही, है ही नही..।

मैं ही अंधेरे में भटक रहा हूँ.
और भटक कर थक गया हूँ..
उजाले की तलाश में..।

मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूं..
अंधेरे की तलाश में..।।





मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

शिव..

शिव कहते है..
लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।

तब ही शिव का ज्ञान,
और शिव का भान संभव है..।

शिव तो शिव है..
शिव तो हर जगह विद्यमान है..
शिव को जानने के लिए,
खुद को भी सब जगह विद्यमान कर..।

शिव कहते है..
लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।


क्या आप स्वस्थ हैं?

अक्सर जब कोई हमसे पूछता है, "कैसे हैं आप?"

तो हमारा सहज जवाब होता है, "ठीक हूँ।" लेकिन क्या हम वाकई ठीक होते हैं?

क्या केवल बीमारी का न होना ही 'स्वस्थ' होना है?


समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः।

प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥

(सुश्रुत संहिता)


जिसका वात-पित्त-कफ (दोष) संतुलित हो, जिसकी जठराग्नि तेज हो, जिसके शरीर के धातु और मल-क्रियाएं सामान्य हों, और सबसे महत्वपूर्ण—जिसकी आत्मा, इंद्रियां और मन प्रसन्न हों, वही वास्तव में 'स्वस्थ' है।



वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य के आंकड़े चिंताजनक हैं..


मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा हैभारत में, लगभग 15% वयस्क ऐसे हैं जिन्हें किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता है।


जीवनशैली बीमारियाँ (Lifestyle Diseases): एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 60% मौतें गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर के कारण होती हैं, जिनका सीधा संबंध हमारे खान-पान और तनाव से है।


शारीरिक निष्क्रियता: 'द लैंसेट' की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 50% भारतीय महिलाएं और 25% पुरुष पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते, जो भविष्य में गंभीर रोगों का कारण बन सकता है।



शारीरिक स्वास्थ्य: क्या आपका शरीर आपका साथ दे रहा है?

​योग के अनुसार एक स्वस्थ शरीर वह है जहाँ ऊर्जा का प्रवाह निर्बाध हो। क्या आप बिना जल्दी थके अपने दिनभर के कार्य कर पा रहे हैं?

मानसिक स्वास्थ्य: विचारों का संतुलन

मानसिक थकान शारीरिक थकान से कहीं ज्यादा घातक है। सांख्य दर्शन के अनुसार, दुखों का निवारण विवेक और आत्मज्ञान से होता है। स्वस्थ मन वह है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न हो

प्रतिदिन 10-15 मिनट का ध्यान (Meditation) मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'शील्ड' का काम करता है।


सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य

​मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। यदि हमारे संबंध कटु हैं, तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते। साथ ही, जब हम अपने अंतर्मन से जुड़ते हैं, तब ही हम 'स्वस्थ' (स्व + स्थ = स्वयं में स्थित होना) होते हैं

रविवार, 5 अप्रैल 2026

मैं जब भी..

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला शरीर के बिना..
आत्मा कैसे रह सकता है..।।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला सूरज के पृथ्वी का क्या हश्र होगा...
ये सोच के ही मन घबराता है..।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

शहर और अंधेरा..

चला था अंधेरे में,
अंधेरा ढूंढने..
मगर इस शहर में अब, अंधेरा है कंहा..??
जो अंधेरा मिले कंही..।

ये शहर अंधेरा को लील रहा है ऐसे..
जैसे कृष्ण विवर लील रहा हो रोशनी को..।।

चला था अंधेरे में,
अंधेरा ढूंढने..
मगर इस शहर में अब, अंधेरा है कंहा..??
जो अंधेरा मिले कंही..।


बुधवार, 1 अप्रैल 2026

मालूम नही क्यों..

मालूम नही क्यों..
तेरे साथ कुछ वक्त बिताने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे कंधे पे सर् रखकर,
तेरे बारे में सबकुछ जानने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे मौन को पढ़ने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे गोद मे सर् रखकर..
तेरे चेहरे को पढ़ने को मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
कुछ पल के लिए..
तुममें समाहित होकर अपना अस्तित्व खो देने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शून्यता का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शिवत्व का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..


कभी तो जागोगे..