क्योंकि यंहा सही कौन है..
क्योंकि सबमें कुछ-न-कुछ खामियां है..
क्यों न मैं..
उनके खामियों को दरकिनार कर
उनके खूबियों को स्वीकार करू..।
मगर ये आसान कंहा है..
जब हमारा अहम बड़ा हो जाता है..
तो कंहा किसी की खूबियां दिखती है..
अगर दिखती है,तो सिर्फ और सिर्फ कमियां ही..।
तो क्या करें..??
अपने अहम को, कमजोर होने का इंतजार करें..
सारे यश,कीर्ति और पुण्य का क्षरण होने का इंतजार करें..।
मैं किसे गलत कहूँ..
क्योंकि यंहा सही कौन है..
क्योंकि सबमें कुछ-न-कुछ खामियां है..
क्यों न मैं..
उनके खामियों को दरकिनार कर
उनके खूबियों को स्वीकार करू..।

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