तो क्या होगा..
सामर्थ्यवान को सामर्थ्य स्वयं के लिए नहीं..
बल्कि सबके लिए मिला है..।
अगर वो सामर्थ्य स्वयं के लिए इस्तेमाल करेंगे..
तो उनका सामर्थ्य क्या रह जायेगा..??
हवा,पानी,अग्नि,आकाश,मिट्टी..
इनका सामर्थ्य स्वयं के लिए नहीं..
सबके लिए है..
मगर हम इनका दोहन किये जा रहें है..
और ये है..
जो मौन होकर मुस्कुरा रहें है..।
उन पैसों,ताकत,रुतबा,
का क्या मोल रह जाएगा..
जो खुद तक ही,
सिमट कर रह जायेगा..।
खुदा ने दिया है आपको..
ख़ुदा का प्रतिबिंब बनकर..
सबों का सरोकार करने को..
मगर आप खुद तक ही..
सिमट कर रह जाएंगे..
तो उस ख़ुदा को..
कैसे मुँह दिखा पाएंगे..।
आईने अगर गंदा हो,
तो उसे साफ करते है..
ये नहीं कि,
चेहरा देखना ही बंद कर देते है..
चेहरा अगर धूमिल दिखें..
तो आईने को साफ करते है..
ये नहीं कि...
नया आईना ही खरीद लेते है..।

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