रविवार, 22 फ़रवरी 2026

आप उनको कितना महत्व देते है..

क्या आपको पता है..
इस पृथ्वी पर सर्वाधिक मूर्ति किसकी बनी हुई है,और बन रही है..??
ये शायद आपको मालूम होगा..😊
उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया था..मगर आज सर्वाधिक मूर्तियां उन्ही की है..
और वो है- "महात्मा बुद्ध"।

और एक सवाल और जो कि आपको मालूम ही होगा..
किस राजनीतिज्ञ का सर्वाधिक मूर्तियां पृथ्वी पर है..?
ये वो है..जिन्हें आज के युवा बिना जाने ही दो-चार कहते रहते है..
जबकि विश्व उनका सम्मान करता है..
आइंस्टीन ने उनके बारे में कहा था- 

"आने वाली पीढ़ियां शायद ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति कभी इस धरती पर चला था।"

 (Generations to come will scarce believe that such a one as this ever in flesh and blood walked upon this earth.)

आइंस्टीन ने ये शब्द गांधीजी के बारे में कहा था..।
अक्सरहाँ लोग गांधी जी के बारे में कहते है..काहे का राष्ट्रपिता..??मगर जब उसे पता चलता है कि उन्हें राष्ट्रपिता से संबोधन सुभाष चंद्र बोस ने किया था..तब लोग चुप हो जाता है..।।गांधी सिर्फ एक राजनीतिज्ञ नही थे..वो खुद में एक विश्विद्यालय थे..उनकी सोच और विचार आज भी प्रसांगिक है,और आगे भी रहेगा..गांधी को पढ़ना नही समझना जरूरी है..इस गर्मी छुट्टी में स्वयं और अपने बच्चे को गांधी की आत्मकथा पढ़ाये..।।

यू ही न्यूज़ स्क्रॉल कर रहा था..तो एक तस्वीर दिखी..और मैं सोचने लगा..
आखिर क्यों..
हम उन्हें तो जानते है,
मगर इन्हें नही जानते,
जिनके कारण हम उन्हें जानते है..।

शायद हममें से बहुत कम लोग ही "कस्तूरबा गांधी" को जानते होंगे..
गांधी से महात्मा गांधी बनने में अहम योगदान कस्तूरबा गांधी का था..।


•वंही सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध की यात्रा में यशोधरा का अहम योगदान है..।
•वंही अंबेडकर से बाबासाहब अंबेडकर बनने में रमा बाई का अहम योगदान था..

कहा जाता है हरेक सफल व्यक्ति के पीछे एक महिला का योगदान होता है..
मगर वो महिला कंही खो जाती है..और लोग भूल जाते है..।

महिला(माँ, aunty,बहन,पत्नी,बेटी) वो पारस पत्थर है..जो पुरुष को तराशती है..।
वो एक असभ्य मनुष्य को सभ्य बना देती है..।।

एक पुरुष के जीवन मे हरेक पड़ाव पर एक महिला की जरूरत होती है..अगर वो न हो,तो पुरुष पथभ्रष्ट हो जाता है..।।
अगर महिला आप पे निःस्वार्थ प्रेम लुटाए तो आपको दुनिया का सर्वश्रेष्ठ इंसान बना देगी...।मगर कुदृष्टि पड़ गई तो आपका जीवन नरकमय बना देगी..।।

मगर वर्तमान में लोगों का दृष्टिकोण बदल रहा है...
क्या हमारा दृष्टिकोण सही है...??
सोचियेगा..
जब हमारे ही दृष्टि में दोष है तो हम कैसे सही और बुरा देख सकते है..😊।

हम उनको कितना महत्व देते है..
जिनके कारण आज हमारा अस्तित्व है..
जिनके कारण जिंदगी को नया उद्देश्य मिला..
जिनके कारण जिंदगी को सार्थक बना रहे है..
जिनके कारण जिंदगी इंद्रधनुष की तरह रंगीन बन रही है..।



"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥"


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