मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

आंनद की अनुभूति..मगर क्यों..??

कभी-कभी आनंद की अनुभूति होती है..
जैसे पूरा रोम-रोम हर्षित हो चुका है..।
शरीर का पूरा कोशिका जागृत हो चुका हो..
ऐसा महसूस होता है..।
मगर ये क्यों होता है..??

इसका कारण मालूम नही..
जब थोड़ा सोचा तो कुछ जबाब मिला..
पहला "अंतस मन" जिससे अभी तक मे अनभिज्ञ हूँ,मगर वो नही..
शायद मेरे कुछ संस्कार(कार्य) के कारण वो मुस्कुराता हो,और इस कारण पूरे शरीर में रोमांच पैदा होता हो..।

हम सब कंही-न-कंही एक दूसरे से जुड़े हुए है..
कुछ लोगों से खास जुड़ाव होता है..
शायद उन खास लोगों में से कोई खास लोग हर्षित होकर जिक्र या याद कर रहें हो..तो वो तरंगें हम तक पहुंचती है,और इस स्थूल शरीर को रोमांचित कर देता है..।।

कभी-कभी इसका विपरीत भी होता है..
आप उदास होते है,
मगर क्यों होते है..?
इसका लाख कारण ढूंढने पर भी नही पता चलता है..
शायद यही कारण होता हो..।।

इसीलिए मुस्कुराइए और अच्छे कार्य कीजिये..
जिससे आपके अंदर विद्यमान सूक्ष्म शरीर आपको हमेशा आंनदित रखें..।

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