आप कर क्या रहें है..?
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
कभी खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..?
घंटों यू ही जाया कर रहें है..
क्यों कर रहें है..?
उस क्यों को ढूंढिये..
और खुद से पूछिए..
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
सुबह से शाम..
शाम से रात..
और रात से सुबह..
कब हो जाता है..
ये पता नही चलता..।
ये क्यों नही पता चलता..?
उस क्यों को ढूंढिये..
और खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..?
साल दर साल यू ही बीत गए..
और हम वंही के वंही रह गए..
बीज अंकुरित होकर पेड़ बन गए..
पेड़ से गिरा बीज भी अंकुरित होकर पेड़ बन गये..।
और हम वंही के वंही रह गए..
क्यों रह गए..?
उस क्यों को ढूंढिये..।
और खुद से पूछिए..
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
सबको भान है अपने कर्तव्य का..
मगर कितने निभाते है अपने कर्तव्य को..?
आखिर क्यों लोग हो जाते है..
कर्तव्यमूढ़..??
उस क्यों को ढूंढकर..
अपने कर्तव्य का पालन कीजिये..।
या फिर यू ही..
घंटों,दिन,साल..जाया कीजिये..।
कभी खुद से पूछिए,
आप कर क्या रहें है..?
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
कभी खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..??


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