सोमवार, 12 जनवरी 2026

स्वामी विवेकानंद और जमशेदजी टाटा

स्वामी विवेकानंद जी के सपनों के भारत को अगर किसी ने साकार किया या कर रहा है,तो वो जमशेद जी टाटा और टाटा ट्रस्ट है..।

शायद, स्वामी जी, जमशेद जी टाटा से मिलने के बाद ही कहे होंगे-
"मुझे केवल 100 ऊर्जावान युवा दे दो और मैं इस देश को बदल दूंगा।"
मगर अफसोस भारत को 10 भी ऊर्जावान युवा नही मिल पाया..
अगर मिल जाता तो देश का दशा और दिशा कुछ और होता..।
जब एक टाटा कंपनी भारत के दिलों पे राज करती है,तो उस जैसी 10 कंपनी होती तो विश्व पर राज करती..।

स्वामी विवेकानंद और जमशेद जी की मुलाकात..
स्वामी जी मई 1893 में SS Empress of india नामक जहाज पर सवार होकर "विश्व धर्म सम्मेलन"में भाग लेने जा रहे थे और उसी जहाज पर जमशेद जी टाटा भी सवार थे..।



 ● यह मुलाकात केवल एक संयोग नही था ,बल्कि भारत के वैज्ञानिक पुनर्जागरण की नींव थी..
- विवेकानंद की आध्यात्मिक दृष्टिकोण और टाटा के औद्योगिक दृष्टिकोण का संगम भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ..।

जो आगे चलकर भारत का सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक संस्थान IISc बंगलुरु(1909)बनता है..जंहा C.V.Raman,homi jahangir bhabha,vikram sarabhai , Satish dhavan ,G.N.Ramchandran , C.N.R.Rao..ऐसे - ऐसे व्यक्ति ने यंहा शिक्षण और प्रशिक्षण किया है..।
आज हम जिस इसरो(ISRO) पे गुमान कर रहे है..उसकी उपज भी IISc बंगलुरु के छांव में ही हुआ..।।

स्वामी विवेकानंद से प्रेरित होकर जमशेद जी ने झारखंड में TISCO की नींव रखी..।

टाटा ट्रस्ट आज भी स्वामी जी के भारत के सपने को साकार कर रहा है,टाटा ट्रस्ट ~66% हिस्सा जन कल्याण में खर्च करता है..।

जिस दरिद्रनारायण की सेवा की बात स्वामी विवेकानंद कर रहे थे उसमे टाटा ट्रस्ट आज भी अपना योगदान दे रहा है..।
जमशेदजी टाटा जी को पिछले सदी(100 साल) का विश्व का सबसे बड़ा दानवीर माना जाता है..
 -इन्होंने अपने जीवनकाल में 102 बिलियन डॉलर(आज के वैल्यू के हिसाब से) दान किये,जो बिल गेट्स और वॉरेन बफ़े जैसे दिग्गजों से भी बहुत अधिक है..।।

स्वामी जी को आज भी उस 100 युवाओं का तलाश है,जो भारत का परचम पूरे विश्व में लहराए..
शायद ये वही सदी है,जंहा स्वामी जी के सपने साकार होते हुए नजर आएंगे..।।
स्वामी विवेकानंद यही चाहते थे कि अध्यात्म और विज्ञान का मिलन हो..और आज दुनिया उस और बढ़ रही है..।।




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