मुझे प्यार का इजहार करना नही आता..।
अगर देखना ही,हो तुमको..
मेरे दिल मे झांक कर देखो..
प्रेम का सैलाब बह रहा है..।
मुझे नही आता..
इस भीड़ की तरह प्रेम जताना..।
क्या करूँ..
मैं हूँ ही ऐसा..।
मैं तुमसे मिलकर..
"मैं"हो जाना चाहता हूँ..।
क्योंकि इस जंहा में सिर्फ एक ही सत्य तो है..
और वो है..
"मैं" हो जाना..।।

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