क्योंकि जब हम हार मान लेते है..
तो आने वाली पीढियां भी हार मान लेती है..
और वर्तमान पीढ़ी भी..।
भले ही जीत सुनिश्चित न हो..
मगर मैदान में डटे रहों..
क्या पता,
पासा कब पलट जाए..
और जीत हमारे हिस्से में आ जाये..।।
इस तरह जितने वालें तुम सिर्फ अकेले नही होंगे...
इतिहास तुम्हारे जैसे योद्धाओं से भरा पड़ा है..
जिसने अंतिम क्षण तक मैदान में डटने का निर्णय लिया..
उसके ही सर पर जीत का सहरा सजा है..।
इसीलिए,

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