अगर सच कहूं तो शायद स्वामी विवेकानंद को कोई नही जानता..।
हम आप अक्सरहाँ चुनौतियों से दूर भागते है..मगर ये भूल जाते है कि हम जितना चुनौतियों से भागेंगे चुनौतियां उतना ही पीछा करेगा..और भागते-भागते हम इतने कमजोर हो जाएंगे कि वो हमसे आगे निकलकर हमारा रास्ता घेर लेगा और हमें कैद कर लेगा..।
आज के युवा को "युवा दिवस" मनाने की जरूरत नही है,बल्कि अपने यौवन का इस्तेमाल करके स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार करना है..।
● हमें खुद से पूछना चाहिए कि हम अपने यौवन का किस दिशा में इस्तेमाल कर रहें है..??
शिकागो यात्रा के दौरान स्वामी जी के समक्ष निम्नलिखित चुनौतियां था,मगर उन्होंने उस चुनौती को स्वीकार कर शिकागो जाना चुना..
- पहली चुनौती पैसों का था,इनके पास इतना पैसा नही था कि वो अमेरिका जा सके ,किसी तरह खेतड़ी महाराज से चंदा एकत्रित करके अमेरिका पहुंचे..।
मगर इनके पास इतने पैसा नही था कि ये होटलों में रह सके..।
तब इनकी मुलाकात "मैडम केट सैनबोर्न" से होती है,जो स्वामी जी को अपने घर मे रहने के लिए आमंत्रित करती है,और समाज के प्रभावशाली लोगों से परिचित करवाती है..।
-जब वो अमेरिका पहुंचे थे तब गर्मी था मगर कुछ महीनों में ही कड़ाके की ठंड पड़ने लगा,मगर इनके पास भगवा कपड़े के सिवा और कोई कपड़ा नही था..
-सबसे बड़ी मुसीबत तब आई जब इन्हें पता चला कि 'विश्व धर्म संसद' में शामिल होने की रजिस्ट्रेशन की तारीख एक महीने पहले ही समाप्त हो चुका है।बिना किसी निमंत्रण और पहचान पत्र न होने के कारण इन्हें प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया गया..।
आप सोच सकते है क्या बीता होगा..हमारी बस,ट्रैन,फ्लाइट छूटती है तो हमपे क्या बीतता है..इन्होंने तो अपने देश को छोड़कर चंदा से एकत्रित किये गए पैसा से वंहा पहुंचे थे..जरा इस परिस्थिति में खुद को रखकर देखिए तब अहसास होगा..।।
- भगवे कपड़े और रंग रूप देखकर लोग इनका सड़कों पर मजाक उड़ाते थे..और होटल में कमरा देने से मना तक कर देता था..।
जब इन्हें लगा कि अब 'विश्व धर्म संसद' में भाग नही ले पाऊंगा तब ये शिकागो से बोस्टन चले गए..
बोस्टन में इनका मुलाक़ात हावर्ड यूनिवर्सिटी के"प्रोफेसर जॉन हेनरी राइट" से हुआ प्रोफेसर स्वामी जी से इतने प्रभावित हुए की उन्होंने खुद विश्व धर्म संसद के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर शिफारिश किया..।
स्वामी जी ने कहा मेरे पास कोई परिचय पत्र नही है..
तो प्रोफेसर ने कहा- आपसे परिचय पत्र मांगना वैसा है,जैसे सूर्य से स्वर्ग में चमकने का अधिकार मांगना..।
प्रोफेसर ने स्वामी जी का सारा खर्चा उठाया और शिकागो का टिकट दिलाया.।
•जब बोस्टन से शिकागो पहुंचे तो रास्ता भटक गए जिस कारण सारी रात रेलवे स्टेशन पर बिताया..सुबह होते ही वो अपनी मंजिल को ढूंढ रहे थे,मगर ढूंढते-ढूंढते इतना थक गए कि एक घर के सामने थक कर बैठ गए..।तब ही घर का दरवाजा खुलता है और एक महिला निकलती है,जिनका नाम '' जॉर्ज W. हेल था..उन्होंने स्वामी जी को घर के अंदर बुलाया और खाना खिलाया और स्वयं विश्व धर्म संसद में ले जाकर उनका नाम दर्ज करवाया..।
जब हमारा उद्देश्य नेक होता है और हमारे पास धैर्य होता है,तब पूरी कायनात भी हमारे लिए काम करती है😊..।
● स्वामी जी ने पहली बार पक्षिमी दुनिया को भारतीय दर्शन से परिचय करवाया
●स्वामी विवेकानंद भारतीय आध्यात्मिकता,संस्कृति और योग के पहले ब्रांड अम्बेसडर थे..।
आप एक बार फिर से सोचिए..अगर स्वामी विवेकानंद 'विश्व धर्म संसद" में भाग नही लेते तो कोई उन्हें जान पाता..??
● जिंदगी में जब भी चुनौतियां आये उसे सहस्र स्वीकार कीजिये,क्योंकि चुनौतियां ही तो इंसान को इंसान बनाता है..।


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